जानें अनेक औषधीय गुणों से युक्त 'पलाश के फूल' के फायदे और आयुर्वेद के अनुसार इस्तेमाल का तरीका

आयुर्वेद के अनुसार पलाश के फूल में कई औषधीय गुण होते हैं, जिसके कारण इसके प्रयोग से कई सामान्य और गंभीर बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

 
Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Mar 15, 2021Updated at: Mar 15, 2021
जानें अनेक औषधीय गुणों से युक्त 'पलाश के फूल' के फायदे और आयुर्वेद के अनुसार इस्तेमाल का तरीका

वसंत के मौसम में पलाश (Butea Monosperma) के फूल अपनी छटा जमकर बिखेरते हैं। पहले तो इन फूलों का इस्तेमाल होली खेलने के लिए रंग तैयार करने में भी किया जाता था लेकिन क्या आपको पता है कि पलाश जिसे ‘फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट’ भी कहा जाता है, आयुर्वेद के अनुसार एक सफल और बेहद गुणकारी फूल है। मूल रूप से भारत में पाया जाने वाले पलाश के फूल औषधि के रूप में भी प्रयोग में लाये जाते हैं। पलाश को ढाक, पलाह, फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट, बास्टर्ड टीक, पैरट ट्री, किमसूका, रक्त पसुका, कुल्हुड़ा, केस्कोड, खाखारो, खाखापादो, मुत्तुग, मुट्टुगा जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। पलाश के फूल, छाल, बीज और पत्ती का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, पलाश का फूल वात और कफ दोष को संतुलित करता है और शरीर को गर्म रखने में भी फायदेमंद माना जाता है।

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आयुर्वेद में पलाश के फूल का महत्व (Importance of Palash in Ayurveda)

आयुर्वेद के मुताबिक पलाश के फूलों का उपयोग औषधि के रूप में हजारों सालों से किया जाता है। पलाश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी गुण होते हैं जो तमाम समस्याओं में शरीर को फायदा देते हैं। इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में व्यापक तौर पर किया जाता है। पलाश में फूलों में ग्लूकोसाइड, ब्यूट्रिन, आइसोब्यूट्रिन जैसे रासायनिक तत्व शामिल होते हैं। इनमें एंटीहेल्मिंटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी माइक्रोबियल, एंटी-डायबिटिक, मूत्रवर्धक, एनाल्जेसिक, एंटीट्यूमर गुण भी पाए जाते हैं। आयुर्वेद में पलाश के फूलों का इस्तेमाल पेट की समस्याओं से लेकर सूजन आदि में किया जाता है। पलाश के फूलों से आयुर्वेदिक टॉनिक भी बनाई जाती है। पलाश के फूलों के अलावा इनके पत्ते, छाल और बीज का भी उपयोग आयुर्वेदिक औषधि के रूप में होता है। पलाश के पत्तों का पाउडर ग्लूकोज़ के मेटाबोलिज्म को संतुलित रखने में बेहद फायदेमंद माना जाता है। इससे ब्लड शुगर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा पलाश के पत्तों का उपयोग एंटीसेप्टिक के रूप में भी किया जाता है। एंटिफंगल और रोगाणुरोधी गुणों से युक्त पलाश का काढ़ा पीने से प्राइवेट पार्ट्स के इन्फेक्शन और पेशाब से जुड़ी समस्याओं में भी फायदा मिलता है।

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पलाश के प्रमुख फायदे (Medicinal Benefits of Palash)

वैसे तो पलाश को आयुर्वेद में चमत्कारिक औषधि के रूप में जाना जाता है और इसके फूल, पत्तों, बीज और छाल का उपयोग तमाम औषधीय गुणों के कारण किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार,पलाश वात और पित्त को संतुलित करता है। यह आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। पलाश में प्रमुख रूप से माइक्रोबियल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल, हाइपोग्लाइसेमिक, कसैले, और मूत्रवर्धक गुण होते हैं। पलाश के अनेक स्वास्थ्य लाभ होते हैं, आइए जानते हैं इसके बारे में।

मोतियाबिंद में पलाश का उपयोग (Uses of Palash in Cataracts)

पलाश के फूलों का उपयोग मोतियाबिंद के इलाज के लिए भी किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में वैद्य इसका इस्तेमाल मोतियाबिंद के इलाज में करते हैं। पलाश के फूलों का रस और बीज के पेस्ट को मिलाकर आंखों में काजल की तरह से लगाने से मोतियाबिंद की समस्या में फायदा मिलता है।

पेट के कीड़ों के लिए पलाश का उपयोग (Uses of Palash in Stomach Worms)

पलाश के फूलो का उपयोग पेट के कीड़ों को दूर करने के लिए किया जाता है। पलाश के फूलों में कीटाणुरोधी गुण होते हैं जो पेट के कीड़ों को दूर करने में फायदेमंद होते हैं। इनका आयुर्वेदिक तरीके से सेवन पेट की अन्य समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद में पलाश के फूलों का प्रयोग कर पेट की तमाम बीमारियों के लिए औषधि तैयार की जाती है।

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डायबिटीज में पलाश के फूलों का उपयोग (Uses of Palash in Diabetes)

डायबिटीज जैसी समस्या में भी पलाश के फूल बेहद लाभकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद में डायबिटीज के लिए पलाश के फूलों के सेवन के कई तरीके बताये गए हैं। पलाश के फूलों में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता होती है जो डायबिटीज के रोगियों को इस बीमारी से लड़ने में मदद करता है। डायबिटीज के रोगियों के लिए पलाश के फूलों का रस बेहद फायदेमंद होता है। पलाश के साफ फूल को एक कप पानी में पूरी रात भिगाकर रखें उसके बाद फूल का पानी कप में निचोड़कर पीने से फायदा होता है। आयुर्वेद में 45 दिन तक इसका सेवन किया जाता है।

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मूत्र रोग में पलाश के फूलों का उपयोग (Uses of Palash in Urine Problem)

पलाश के फूलों का उपयोग मूत्र संबंधी रोगों में भी किया जाता है। आयुर्वेद में इसे मूत्रवर्धक माना जाता है, पलाश के फूलों का रस पेशाब की वृद्धि, मूत्राशय की सूजन और अन्य मूत्र रोगों में फायदेमंद होता है। इसके फूलों का रस निकालकर उसे छान लें, अब इसके आधा कप रस का नियमित सेवन मूत्र से जुड़ी समस्याओं के लिए कर सकते हैं।

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बच्चों में एनीमिया की समस्या में पलाश का उपयोग (Uses of Palash for Anaemia in Kids)

पलाश के फूलों का आयुर्वेदिक तरीके से उपयोग बच्चों में एनीमिया की समस्या में बेहद फायदेमंद होता है। बच्चों में एनीमिया होने पर पलाश के फूलों का उपयोग कर सकते हैं इसके लिए सबसे पहले पलाश के फूलों को एक सूती कपड़े में भिगोकर रखें। इसका रंग लाल हो जाने पर इसे बच्चे के शरीर पर लपेटें। आयुर्वेद के मुताबिक ऐसा करने से बच्चों में एनीमिया की समस्या में फायदा होता है।

सूजन की समस्या में पलाश के फूलों का उपयोग (Uses of Palash in Inflammation)

पलाश के फूलों का सूजन जैसी समस्या में भी उपयोग किया जाता है। पलाश के फूलों में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन, चोट और मोच की समस्या में फायदेमंद होते हैं। पलाश के फूलों को साफ कर इसे पीस कर पेस्ट बना लें, सूजन वाली जगह पर इसके पेस्ट को लगाने से सूजन कम हो जाएगी। आयुर्वेद में इस पेस्ट का इस्तेमाल मोच में भी किया जाता है। 

गुर्दे की पथरी और दर्द में पलाश का उपयोग (Palash for Kidney Stone)

पलाश के फूलों का उपयोग गुर्दे की पथरी और दर्द में भी किया जाता है। पलाश के फूलों को चीनी के साथ उबालकर सूप की तरह तैयार कर लें और नियमित रूप से इसका सेवन करें। इससे गुर्दे की पथरी और पेशाब में जलन की समस्या में भी आराम मिलेगा। अगर डायबिटीज आदि समस्या से ग्रसित हैं तो बिना चीने के इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। किडनी की कई अन्य समस्याओं में यह फायदेमंद होता है। गुर्दे के दर्द की स्थिति में पलाश के फूलों का पेस्ट गर्म कर सूती कपडे में बढ़ लें और किडनी के आसपास इसकी मालिश करें इससे किडनी के दर्द में राहत मिलेगी।

इसके अलावा पलाश का इस्तेमाल कई अन्य तरीके से भी किया जाता है। पलाश के पत्तों का उपयोग फोड़े, फुंसी, त्वचा के अल्सर, सूजन, रक्तस्राव और बवासीर से छुटकारा दिलाता है। पलाश के फूल एंटीडायरियल, एंटी कैंसर, हेपाटो प्रोटेक्टिव, एंटी ऑक्सीडेटिव, एक्सपेक्टोरेंट, मूत्रवर्धक, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी गोनोरियल, टॉनिक, कामोद्दीपक गुणों से युक्त होते हैं। इनका इस्तेमाल कई अन्य बीमारियों के उपचार के लिए आयुर्वेद में किया जाता है। पलाश के बीज, छाल, जड़ और गोंद भी कई तरीके से इस्तेमाल किये जाते हैं। इसका किसी भी प्रकार से घरेलू इस्तेमाल करने से पहले किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट या चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

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