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घी या बटर, पथरी में क्या खाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें किडनी पर इन दोनों का असर

पथरी में घी और बटर:   पथरी की समस्या में क्या घी या बटर का सेवन (Ghee vs butter which is better) करना चाहिए? आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इस बारे में विस्तार। 

पथरी में घी और बटर: पथरी की समस्या आजकल आम होती जा सही है। यह समस्या खराब लाइफस्टाइल, डाइट और किडनी के काम काज में खराबी की वजह से हो सकती है। लेकिन, पथरी में आपको कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। जैसे कि डाइट में उन चीजों के सेवन से बचें जो पथरी की समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसी स्थिति में डाइट से जुड़ा एक सवाल है कि पथरी की समस्या वाले लोगों को घी या बटर का सेवन करना चाहिए या नहीं? क्या इन दोनों के सेवन से पथरी की दिक्कत बढ़ सकती है या फिर इन दोनों में किसी एक का सेवन कर सकते हैं? जानते हैं इस बारे में विस्तार से Dr. Topoti Mukherjee, Lead Consultant-Nephrology & Kidney Transplant, Aster Whitefield Hospital Bengaluru, Kanikka Malhotra, Consultant Dietician & Diabetes Educator और Dr. Narendra K Shetty, Chief Wellness Officer, Kshemavana, Bengaluru से।

क्या घी या बटर से पथरी की समस्या हो सकती है-Can ghee or butter cause kidney stones?

Dr. Topoti Mukherjee का कहना है कि घी और मक्खन दोनों का सेवन कम मात्रा में किया जा सकता है क्योंकि इनमें से कोई भी सीधे तौर पर किडनी की पथरी के विकास से जुड़ा नहीं है। घी एक प्रकार का शुद्ध मक्खन है और इसमें लैक्टोज और कैसिइन की मात्रा कम होती है जो इसे लैक्टोज के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों के लिए उपयुक्त बनाता है। घी और मक्खन दोनों ही संतृप्त वसा युक्त खाद्य पदार्थ हैं, लेकिन दोनों में ऑक्सालेट नहीं होते हैं और यह सीधे तौर पर गुर्दे की पथरी का कारण नहीं बनते हैं।

तो, Kanikka Malhotra बताती हैं कि किडनी की पथरी के मामले में मक्खन की तुलना में घी की ज्यादा सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें लैक्टोज और कैसिइन की मात्रा कम होती है। डेयरी प्रोटीन का अधिक सेवन पथरी, विशेष रूप से कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी का कारण बन सकता है। चूंकि घी शुद्ध मक्खन है, इसलिए इसमें से अधिकांश दूध के ठोस पदार्थ निकाल दिए जाते हैं, जिससे पाचन आसान हो जाता है और मक्खन की तुलना में पथरी बनने की संभावना कम होती है। घी और मक्खन दोनों में संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है, इसलिए स्वास्थ्य के लिए इनका सेवन सामान्य रूप से कम मात्रा में करना चाहिए।

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घी या बटर, पथरी की समस्या में क्या खाना चाहिए-Ghee vs butter which is better for kidney stones in Hindi

Dr. Narendra K Shetty बताते हैं कि पथरी की समस्या अक्सर कैल्शियम-आधारित स्टोन यानी कैल्शियम ऑक्सालेट पत्थरों की वजह से होता है। अब बात बटर यानी मक्खन की करें तो इसमें कैल्शियम की उच्च मात्रा किडनी स्टोन बनने में योगदान दे सकती है। तो घी एक बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें कैल्शियम की मात्रा कम होती है और लैक्टोज नहीं होता। इसलिए ऑक्सालेट स्टोन से ग्रस्त लोगों के लिए घी बेहतर है। हालांकि, यूरिक एसिड स्टोन हाई सैचुरेटेड फैट की वजह से होता है। इसलिए घी और मक्खन दोनों में फैट होता है इसलिए इनका सेवन संयमित मात्रा में करना चाहिए।

घी बेहतर विकल्प है-Ghee is better option for kidney stone patients

एक्सपर्ट्स के अनुसार पथरी की समस्या में घी का सेवन ही बेहतर विकल्प है। घी कम कैल्शियम के कारण बेहतर है। घी इसलिए भी बेहतर है क्योंकि इसमें ऑक्सालेट या डेयरी प्रोटीन नहीं होते हैं। हालांकि, दोनों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। सबसे अच्छा तरीका यह है कि अगर घी का सेवन कर रहे हैं, तो सीमित मात्रा में करें। हाइड्रेटेड रहें और किडनी के अनुकूल आहार लें जिसमें ऑक्सालेट, सोडियम और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कम हों।

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हालांकि, आपको डॉक्टर को दिखाकर ही अपने लिए सही डाइट का चुनाव करना चाहिए जो इस स्थिति में आपके लिए बेहतर हो। ताकि यह पूरी तरह से आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद हो और किडनी में पथरी की समस्या को और न बढ़ाए।

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Pallavi Kumari

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चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 16, 2025 15:37 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
  • Apr 16, 2025 15:37 IST

    Published By : Pallavi Kumari

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