लेजर तकनीक से पायें जवां त्वचा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 18, 2013
Quick Bites

  • लेजर तकनीक से पायें खूबसूरती।
  • मिटाएं चेहरे के अनचाहे दाग-धब्बे।
  • जन्म निशान और छाइयां तक हटाएं।
  • लेकिन इसके इस्तेमाल में बरतें सावधानी।

लेजर तकनीक के जरिये खूबसूरती पाने का चलन बढ़ता जा रहा है। बढ़ती उम्र, प्रदूषण, त्वचा रोग तथा हार्मोनल बदलाव आपकी सुंदरता छीनने लगते हैं। और ऐसे में लेजर तकनीक आपको लौटा सकती है जवां और बेदाग खूबसूरती। न केवल उम्रदराज, बल्कि युवा भी इस तकनीक का सहारा लेने में पीछे नहीं हैं। आइए इस तकनीक के बारे में थोड़ा और जानते हैं-

लेजर तकनीक

 

त्वचा समस्याओं के कारण

बदलते खानपान, फैमिली हिस्ट्री, हार्मोंस का बिगडऩा, तेज धूप में रहना, पेस्टीसाइड भोजन लेने से स्किन से संबंधित समस्याएं सामने आ रही हैं। अगर लोग इन बातों पर ध्यान रखें तो किसी हद तक त्वचा की समस्याओं को रोका जा सकता है। महिलाओं व युवतियों में झुर्रियां, तिल उगने, चेहरे पर बाल उगने जैसी समस्याएं सामने आने लगीं हैं। इस वजह से समय से पूर्व चेहरा भद्दा हो जाता है। लेकिन अब इलाज की नई लेजर तकनीक आ गई हैं जिनसे काफी हद तक इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। बदलते खानपान, फैमिली हिस्ट्री, हार्मोंस का बिगडऩा, तेज धूप में रहना, पेस्टीसाइड भोजन लेने से स्किन से संबंधित समस्याएं सामने आ रही हैं। अगर लोग इन बातों पर ध्यान रखें तो किसी हद तक स्किन की समस्याओं को रोका जा सकता है।

 

 

लेजर तकनीक

  • लेजर तकनीक के जरिये टैटू, जन्म निशान, छाइयां होने व तिल के निशान भी हटाये जा सकते हैं। इसके साथ ही चेहरे पर अनचाहे बालों से निजात पाने के लिए भी महिलायें लेजर थेरेपी का सहारा ले रही हैं। लेजर तकनीक से 80 से 90 प्रतिशत तक इलाज हो जाता है वहीं, पांच से दस प्रतिशत तक चेहरे पर उगे बाल स्किन कलर जैसे हो जाते हैं, जो नजर नहीं आते। महिलाओं व युवतियों में झुर्रियां, तिल उगने, चेहरे पर बाल उगने जैसी समस्याएं सामने आने लगीं हैं। इस वजह से समय से पूर्व चेहरा भद्दा हो जाता है। लेकिन अब इलाज की नई तकनीक आ गई हैं जिनसे काफी हद तक इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • लेजर चिकित्सा में आपकी त्वचा की कोशिकाओं का पानी लेजर की किरण सोख लेता है। इस क्रिया से कोशिकाओं का तात्कालिक वाष्पीकरण होता है या वे नष्ट हो जाती है।
  • लेजर चिकित्सा के जरिये प्रभावित त्वचा को हटा दिया जाता है। उसके जगह नयी त्वचा निकल आती है। लेजर चिकित्सा के बाद त्वचा कुछ समय तक गुलाबी रहती है। लेकिन धीरे-धीरे यह अपनी सामान्‍य रंगत पा लेती है। आपकी त्‍वचा के अनुसार ही यह तय होता है कि आपको लेजर ट्रीटमेंट की कितनी सिटिंग लेनी होंगी। साथ ही डॉक्टर के निर्देशानुसार कुछ दिनों तक आपको सूर्य की किरणों से भी त्वचा का बचाव करना होता है।

 

इन चीजों का रखें ध्यान


मौसम बदलने के साथ ही त्‍वचा सम्‍बन्‍धी कई समस्‍यायें हो सकती हैं। गर्मियों में खासतौर पर ये समस्‍यायें अधिक सामने आती हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप जब भी बाहर से आयें तो चेहरे को साफ पानी से जरूरी धोयें। चेहरे को धूप की एल्‍ट्रावॉयलेट किरणों से बचाकर रखें। और त्‍वचा सम्‍बन्‍धी कोई भी तकलीफ होने पर डॉक्‍टर को दिखा लें।

 

इनसलिए ना कराएं लेजर

हर चीज के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। लेजर तकनीक के साथ भी यही समस्या है। लेजर तकनीक कराने के दौरान काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। जितना हो सके लेजरन का सहारा ना ही लें।
दरअसल लेजर तकनीक के इस्तेमाल से शरीर में काफी बदलाव होते हैं। इन बदलावों से ही आपको ऊपरी तौर पर परिणाम प्राप्त होते हैं। लेकिन इसके कुछ नुकसान होते हैं जो अंदरूनी तौर पर होते हैं और ज्लदी पता नहीं चलते। कई मामलों में तो ये गंभीर नुकसान भी पहुंचा देते हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लेजर से कुछ भी पर्मानेंट नहीं होता है और बार बार सिटिंग्स लेनी पड़ती है। ऐसे में अन्य विकल्प अधिक लाभकारी हैं जो न तो शरीर में कोई नुकसान पहुंचाते हैं और कीमत भी इनकी कम होती है।

 

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