वीडियो गेम्स की लत बच्चे को शारीरिक और मानिसक रूप से बनाती है कमजोर, डॉक्टर से जानें कैसे करें उपाय

अगर आपके बच्चे को भी वीडियो गेम्स खेलने की लत है, तो यह आपके बच्चे के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariUpdated at: Feb 24, 2022 17:37 IST
वीडियो गेम्स की लत बच्चे को शारीरिक और मानिसक रूप से बनाती है कमजोर, डॉक्टर से जानें कैसे करें उपाय

इस तकनीकी के दौर में सबकुछ फास्ट और एडवांस हो चुका है। आजकल बच्चे दोस्तों और मैदान में खेलने की जगह अपने मोबाइल फोन में वीडियो गेम खेलना पसंद करते है। उन्हें बस एक कमरे में बंद होकर वीडियो गेम्स खेलना पसंद आता है। यह आदत उन्हें उनके परिवार और दोस्तों में दूर कर देती है। साथ ही ऐसे बच्चे मानिसक और भावनात्मक रूप से काफी कमजोर होते है। उनका शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व विकास उस ढंग से नहीं हो पाता है, जैसे अन्य बच्चों का होता है। ऐसे में वह समय की दौड़ में पीछे रह जाते है। साथ ही उन्हें खुद को दूसरों के सामने एक्सप्रेश करने में भी परेशानी आती है। इस लत को छुड़ाने के लिए माता-पिता को काफी मेहनत करनी पड़ती है। कई बार तो बच्चे वीडियो गेम न खेलने देने पर खाना न खाने और घर से भाग जाने तक की धमकी देते है। इस स्थिति में पेरेंटिस ये समझ नहीं पाते है कि बच्चों को कैसे समझाया जाएं। साथ ही कुछ गेम्स ऐसे होते है, जो बच्चों को आपने आपको शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए उत्साहित करते है और छोटे बच्चे आवेश में अपने आपको नुकसान पहुंचा लेते है। बच्चों को वीडियो गेम्स से दूर रखने के लिए और स्वस्थ दिनचर्या कैसे बनाएं। इसके लिए हमने बात की गुड़गांव के आर्टेमिल अस्पताल के चीफ पीडियाट्रीशयन डॉ राजीव छाबड़ा से। 

बच्चों पर वीडियो गेम्स का शारीरिक प्रभाव

1. दिमागी रूप से कमजोर होना

कई बार बच्चे घंटों बिना पलकें झपकाएं देर तक वीडियो गेम्स खेलते रहते है। ऐसे में उनकी मस्तिष्क की कार्य क्षमता और एकाग्रता प्रभावित होती है। साथ ही वह सिर में हमेशा दर्द, बेचैनी और भारीपन का एहसास हो सकता है। ऐसे बच्चे स्कूल की पढ़ाई पर भी अधिक ध्यान नहीं दे पाते है क्योंकि पढ़ाई के दौरान भी उनके दिमाग में काफी कुछ चल रहा होता है और वह उस वीडियो गेम से निकाल नहीं पाते है। 

video-games-children

Image credit- Freepik

2. शरीर कमजोर होना

छोटी उम्र में वीडियो गेम की लत के कारण बच्चे समय पर खाना नहीं खाते है। कई बच्चे तो वीडियो गेम खेलते हुए खाने की कोशिश करते है। ऐसे में उनका काफी नुकसान हो सकता है। इससे बच्चे जल्दी-जल्दी बीमार पड़ सकते है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और पाचन तंत्र प्रभवित हो सकता है क्योंकि गेम खेलने के चक्कर में वह खाने को अच्छे से चबाने की जगह निगलना शुरू कर देते है। 

3. शारीरिक विकास

छोटी उम्र में बच्चों का शारीरिक विकास जितना अधिक होता है, उतना बड़े होने के बाद संभव नहीं है लेकिन अगर वीडियो गेम के कारण आफका बच्चा खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों से दूर हो जाए, तो इसका सीधा असर उनके विकास पर पड़ सकता है। खेलने से उनकी लंबाई बढ़ती है और हड्डियां मजबूत होती है। साथ ही पोषक तत्वों का अच्छे से अवशोषण होता है। 

4. मोटापा

एक जगह बैठे रहने के कारण और जंक फूड के सेवन से बच्चों में मोटापा की समस्या हो सकती है। गेम खेलने के दौरान बच्चे खाना अधिक खा लेते है और खाना ढंग से चबाते नहीं है, जिसके कारण पाचन की क्रिया उचित ढंग से नहीं हो पाती है और बच्चों में मोटापा की समस्या हो सकती है इसलिए खाते वक्त बच्चों को टीवी या गेम न खेलने दें। 

इसे भी पढ़ें- रोज घंटों मोबाइल या वीडियो गेम की आदत से सेहत को होते हैं कई नुकसान, जानें इसके खतरे और बचाव के तरीके

बच्चों पर वीडियो गेम्स का मानिसक प्रभाव

1. बच्चों में चिड़चिड़ापन

लगातार गैजेट्स और वीडियो गेम देखने के कारण बच्चों के मस्तिष्क पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। ऐसे में सिरदर्द और भारीपन की समस्या हो सकती है। इस दौरान उन्हें अपने पेरेंट्स और दोस्तों की बात से भी चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। गेम के अलावा उनका मन अन्य किसी काम में नहीं लगता है और किसी काम को करने के दौरान चिड़चिड़ापन महसूस होता है। 

video-games-children

Image credit- Freepik

2. तनाव और अनिद्रा

तमाम बच्चे रात को देर तक ऑनलाइन गेम्स खेलते है। ऐसे में उनकी आंखों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। आंखों में ड्राईनेस और दर्द होने लगता है और सिरदर्द शुरु हो जाता है। फिर रात को उन्हें अच्छे से नींद नहीं आती है और सुबह उठने में भी परेशानी होती है। पूरी दिनचर्या प्रभावित होने के कारण उनका मन किसी काम में नहीं लगता है।

3. उदासी और अकेलापन

वीडियो गेम की लत के कारण बच्चे अकेलापन का अनुभव करने लगते है क्योंकि अपने दोस्तों और परिवार के साथ बात करने की जगह वह वीडियो गेम खेलना पसंद करते है। इससे उनके दिमाग में उदासी और अकेलेपन का अनुभव होता है। वह खुद को सबसे अलग-थलग करने से वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते है। किसी से कुछ कह नहीं पाते है। 

बच्चों पर वीडियो गेम्स का सामाजिक प्रभाव

वीडियो गेम के कारण बच्चे अपने आसपास के माहौल से दूर हो जाते है और माता-पिता से बात करने का उनके पास समय नहीं होता है। 

1. माता-पिता से दूर होना

बच्चे गेम खेलने के चक्कर में परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की जगह अपने कमरे में खाना लेना पसंद करते है। इसके अलावा वह घर के कामों में पेरेंट्स की मदद करने की जगह कोने में बैठकर अपना वीडियो गेम खेलना पसंद करते है। संवाद के अभाव में वह अपनी माता-पिता से दूर होते चले जाते है और किसी परेशानी में या अपनी मन की बात भी उनसे कह नहीं पाते है। दूसरी तरफ पेरेंट्स भी काम के चक्कर में या बात न मानने पर बच्चे को उनके मन का काम करने देते है ताकि वह घर में रहे और बाहर न जाएं। 

video-games-children

Image credit- Freepik

2. दोस्तों के साथ न खेलना

बाहर दोस्तों के साथ खेलने से बच्चे का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास होता है। इससे टीमवर्क और खेलने की भावना का विकास होता है लेकिन अगरआपका बच्चा वीडियो गेम्स में व्यस्त रहता है, तो इससे बच्चे का मन उदास रहता है और वह शारीरिक रूप से कमजोज हो जाता है। 

3. लोगों से बात न करने में झिझक

जब बच्चे अपना सामाजिक दायरा सीमित कर देते है, तो वह किसी से बात करने में हिचकते है और कोई अगर सवाल करे, तो वह ढंग से जवाब नहीं दे पाते है। स्कूल में भी वह अन्य बच्चों की तरह सवाल का जवाब नहीं दे पाते है और किसी से भी संवाद से दूर भागते है। 

इसे भी पढ़ें- लॉकडाउन में बच्चों के लिए जरूरी है शारीरिक गतिविधियां, जानें बच्चों के लिए 3 एक्सरसाइज और इसे करने का तरीका

इस तरह से बच्चों की लत छुड़ाएं

1. बच्चों से एकाएक फोन लेने की कोशिश न करें बल्कि उनका स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करें।

2. बच्चों से प्यारे से बात करें और अधिक से अधिक घर के कामों जैसे बागवानी और किचन में उनके साथ काम करें। 

3. उन्हें दोस्तों के साथ खेलने के लिए प्रोत्साहित करें और खुद भी इसका हिस्सा बनने की कोशिश करें। 

4. बच्चों के मोबाइल टाइम को पहले 3 घंटे करने का प्रयास करें। फिर दो घंटे करने का प्रयास करें। 

5. हो सके तो मोबाइल पर अच्छी चीजें और पढ़ने-लिखने के बारे में बात करें। इससे वह गेम्स की बजाय दूसरी चीजों को लेकर प्रोत्साहित होंगे। 

6. बच्चों से अधिक बात करने की कोशिश करें और घर में फोन का इस्तेमाल बेहद कम करें।

Main Image credit- Freepik

Disclaimer