मानसिक आघात के इलाज में 'एक्सटसी' दवा फायदेमंद

इंपेरियल कॉलेज, लंदन के एक शोध के मुताबिक एक्सटसी या एमडीएमए नामक दवा, मानसिक आघात के उपचार में फायदेमंद साबित हो सकती है।

 अन्‍य
लेटेस्टWritten by: अन्‍य Published at: Jan 20, 2014
मानसिक आघात के इलाज में 'एक्सटसी' दवा फायदेमंद

लंदन के एक कॉलेज में हुए शोध से यह बात सामने आई है कि एमडीएमए (जो एक्सटसी नाम से मशहूर है) दवा के उपयोग से मानसिक आघात का उपचार किया जा सकता है।

Ecstasy To Treat Traumaजी हां युवाओं में लोकप्रिय रेव पार्टी में उपयोग की जाने वाली नशीली दवा 'एक्सटसी', चिंता और सदमे के बाद के तनाव विकार, अर्थात पीटीएसडी (Post-traumatic Stress Disorder) के उपचार में कारगर हो सकती है। ब्रेन इमेजिंग प्रयोगों से यह ज्ञात हुआ है कि किस प्राकर एक्सटसी या एमडीएमए, इसके इसके उपयाग करने वाले लोगों में उत्साह का भाव पैदा कर देती है।

इंपेरियल कॉलेज, लंदन के मेडिसिन विभाग के रॉबिन कारहार्ट हैरिस बताते हैं कि, "हमने पाया कि एक्सटसी या एमडीएमए, दिमाग के संवेदना और स्मृति वाले हिस्सों में ब्लड फ्लो को कम कर देती है। यह प्रभाव उत्साह के अनुभव से संबंधित हो सकता है, जैसा कि लोग नशीली दवा के सेवन के बाद अनुभव करते हैं।"

दरअसल एमडीएमए (3,4-methylenedioxy-N-methylamphetamine), फिनीथायलेमिन (phenethylamine) तथा एम्फ़ैटेमिन वर्गों वाली दवाओं कि एक इमफैथेजेनिक (empathogenic) दवा है।

शोधकर्ताओं ने इस शोध के लिए 25 लोगों को चुने। इन सभी लोगों के दिमाग को दो बार स्कैन किया गया। पहला दवा लेने के बाद और दूसरा प्रयोगिक औषधि लेने के बाद। इन लोगों को यह नहीं बताया गया था कि उन्हें कौन सी दवा दी गई है। अंततः शोध के परिणाम में देखा गया कि एमडीएमए ने भावनात्मक प्रतिक्रियाओं में शामिल संरचनाओं के एक सेट- लिंबिक सिस्टम की गतिविधि कम कर दी।

इंपेरियल कॉलेज में न्यूरोसाइकोफार्मेकोलॉजी के प्रोफेसर एडमंड जे. साफ्रा डेविड नट ने इस संदर्भ में बताया कि, "परिणाम दर्शाते हैं कि एमडीएमए के चिकित्सकीय प्रयोग से चिंता और पीटीएसडी का उपचार किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ हमें सावधान रहने की भी जरूरत हैं। क्योंकि शोध स्वस्थ लोगों पर किया गया था। रोगियों पर इसका दवा का समान प्रभाव देखने के लिए हमें रोगियों पर शोध करना होगा।"

वहीं हैरिस ने कहा कि, "स्वस्थ लोगों में एमडीएमए ने दुखद यादों को कम किया। इससे हमें यह विचार आया कि यह पीटीएसडी के रोगियों की भी मदद कर सकती है।"

 

Source: Theguardian

 

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