बच्चे को पढ़ने-लिखने और नई चीजें सीखने में परेशानी का कारण हो सकता है 'डिस्लेक्सिया' रोग, जानें इसके बारे में

बच्चों में डिस्लेक्सिया की समस्या होने पर कई लक्षण नजर आ सकते हैं। ये लक्षण उम्र के हिसाब से बदल भी सकते हैं। जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Jul 29, 2021 15:40 IST
बच्चे को पढ़ने-लिखने और नई चीजें सीखने में परेशानी का कारण हो सकता है 'डिस्लेक्सिया' रोग, जानें इसके बारे में

डिसलेक्सिया समस्या एक मानसिक समस्या होती है जिसे डेवलपमेंट रीडिंग डिसऑर्डर के नाम से भी जानते हैं। यह समस्या जब होती है तो इसका प्रभाव बच्चे के सीखने और पढ़ने पर पड़ता है। बच्चों में यह समस्या होना आम बात है। ऐसे में इस समय से के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि डिसलेक्सिया के कितने प्रकार होते हैं। साथ ही लक्षण और कारण भी जानेंगे। इसके लिए हमने किडजेनिक्स चाइल्ड क्लीनिक के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर निखिल मेहरोत्रा (Kidgenix Child Clinic, Child Expert, Dr. Nikhil Mehrotra) से बात की है। पढ़ते हैं आगे...

डिसलेक्सिया की समस्या के प्रकार-

1 - बच्चों को अटेंशनल डिस्लेक्सिया की समस्या हो सकती है। यह समस्या होने पर बच्चा अक्षर व शब्द को पहचानने में दिक्कत महसूस करता है।

2 - बच्चा लेटर आइडेंटिटी डिसलेक्सिया का भी शिकार हो सकता है। इस समस्या में बच्चे को शब्दों को पहचानने के साथ-साथ उनका उच्चारण लेने में भी दिक्कत महसूस होती है।

3 - जब बच्चा लेटर पोजीशन डिस्लेक्सिया का शिकार होता है, तब वह शब्दों को पढ़ पाने में दिक्कत महसूस करता है और वह शब्द को आगे पीछे लिखना शुरु कर देता है।

4 - जब बच्चा फोनलॉजिकल डिस्लेक्सिया का शिकार होता है. तब वह एक जैसे दिखने वाले शब्दों को लिखने पढ़ने में दिक्कत महसूस करता है।

5 - जब बच्चा सीमेंटिक ऐक्सेस डिसलेक्सिया का शिकार होता है तो शब्दों को याद रखने में दिक्कत महसूस करता है। इसके अलावा ये किसी शब्द को पढ़ने में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता।

नोट - कुछ और भी टाइप होते हैं जो बच्चे का बच्चे शिकार हो जाते हैं जैसे डीप डिस्प्लेशिया या सरफेस डिस्लेक्सिया इन प्रकार में भी बच्चे को पढ़नेलिखने में परेशानी होती है।

इसे भी पढ़ें- जन्म के बाद शिशुओं में क्यों होती है रात में जागने की आदत? जानें कैसे सही करें उनका स्लीप पैटर्न

बच्चों में डिस्लेक्सिया होने के लक्षण

चूंकि ये समस्या पढ़ने और लिखने से संबंधित है। ऐसे में जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं तब इस समस्या का पता चलता है। ऐसे में कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं

1 - किसी भी चीज में ध्यान लगाने में कठिनाई महसूस करना।

2 - शब्दों को समझने में दिक्कत महसूस करना या याददाश्त का कम हो जाना

3 - नई चीज को सीखने और समझने में परेशानी महसूस करना।

4 - किसी की आवाज को ठीक से ना सुन पाना।

5 - किसी भी चीज को याद रखने में दिक्कत महसूस करना।

नोट - चूंकि ये लक्षण स्कूल जाने के बाद दिखाई देते हैं ऐसे में जब बच्चा 3 साल से बड़ा हो जाता है तो उसे पढ़ने सीखने में दिक्कत महसूस होती है। साथ ही शारीरिक समस्या जैसे- कमजोरी महसूस करना, सांस लेने में दिक्कत महसूस करना, दर्द होना और स्कूल फोबिया जैसी समस्या हो जाती है। वहीं जब बच्चे की उम्र 13 वर्ष या उससे बड़ी होती है तब लक्षणों के रूप में उसे शब्दों का गलत उच्चारण, नई भाषा सीखने में दिक्कत, अलग-अलग शब्दों को जोड़ने में दिक्कत, पढ़ने की गति धीमी, लोगों के सामने पढ़ने में दिक्कत आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

बच्चों में डिस्लेक्सिया होने के कारण

1 - दिमाग में चोट लगना

2 - स्ट्रोक के कारण

3 - किसी बात का सदमा लगने के कारण

4 - जन्म के बाद बच्चे का वजन कम होने के कारण

5 - बच्चों का देर से बोलने के कारण

6 - समय से पहले शिशु का जन्म हो जाना यानी प्रीमेच्योर डिलीवरी होने के कारण

इसे भी पढ़ें- बच्चों का आंख खोलकर सोना सही है या गलत? एक्सपर्ट से जानें इसके कारण और उपचार

बच्चों में डिस्लेक्सिया का उपचार

बच्चों को अगर लिखने में और पढ़ने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आप बच्चों कि कुछ तरीकों से मदद कर सकते हैं

1 - अगर बच्चे को किसी प्रकार का मानसिक रोग है तो सबसे पहले इस रोग की पहचान करें और डॉक्टर से उसका उचित इलाज करवाएं।

2 - परिवार में किसी को इस तरीके की समस्या है तो हो सकता है कि बच्चा भी इस समस्या का शिकार हो जाए। 

3 - इससे अलग ताली बजाकर बच्चों को अक्षर और शब्दों का उच्चारण याद करवाएं। 

4 - आप बच्चों को पढ़ाने और लिखाने के लिए चित्रों की मदद भी ले सकते हैं। 

5 - वही खेल खेल में भी आप भाषा का विकास कर सकते हैं। 

6 - आप अपने बच्चों को कविता के रूप में भी चीजों को याद करवा सकते हैं।

नोट  - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि बच्चों में डिस्लेक्सिया होना एक आम समस्या है। लेकिन इसके कारण बच्चों की पढ़ाई, सीखने की क्षमता, याद करने की क्षमता आदि पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते इलाज कराना जरूरी है। यदि माता-पिता बच्चों को डॉक्टर के पास लेकर जाते हैं तो डॉक्टर उनका मनोचिकित्सक उपचार और कुछ दवाइयां देकर उपचार करते हैं। ऐसे में सबसे पहले ऊपर बताए कारण और लक्षण को पहचानना जरूरी है। उसके बाद ही आप अपने बच्चे का उचित इलाज करवा पाएंगे। ध्यान रखें कि लक्षण बच्चे की उम्र के हिसाब से अलग-अलग नजर आ सकते हैं।

इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

Read More Articles on child health in hindi

Disclaimer