Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

PCOS और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट में क्‍या अंतर है?

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट या गांठ दोनों ही मह‍िलाओं में ओवरीज से संबंधि‍त समस्‍याएं हैं, लेक‍िन इनके कारण, लक्षण और इलाज में अंतर होता है। अक्‍सर इन दोनों को एक समझ ल‍िया जाता है। डॉक्‍टर से आगे समझेंगे इनके बीच का अंतर।

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आजकल मह‍िलाओं में PCOS के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मह‍िलाएं PCOS को ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट समझ लेती हैं, लेक‍िन दोनों में काफी अंतर है। PCOS में हार्मोन्‍स असंतुल‍ित हो जाते हैं जबक‍ि ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट तरल से भरी छोटी थैली होती है। यह स‍िस्‍ट कई बार इलाज के बगैर भी ठीक हो जाती है, लेक‍िन PCOS का इलाज लंबे समय तक चल सकता है। अगर क‍िसी मह‍िला को PCOS है और वह उसे साधारण स‍िस्‍ट समझकर नजरअंदाज कर देती है, तो आगे चलकर गर्भधारण में द‍िक्‍कत हो सकती है। इसके अलावा पीर‍ियड्स में अन‍ियम‍ितता, वजन बढ़ना, त्‍वचा और बालों की समस्‍याएं भी हो सकती हैं। दोनों के बीच के अंतर को समझकर समय पर इलाज हो जाता है और लक्षणों को समय पर कंट्रोल क‍िया जा सकता है। PCOS और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट के बीच का अंतर समझने के ल‍िए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow) से बात की।

PCOS क्‍या है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) में मास‍िक चक्र के दौरान होने वाली ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया (एग र‍िलीज की प्रक्र‍िया) ठीक से नहीं हो पाती है। इस स्थिति में ओवरी के अंदर बनने वाले फॉल‍िकल्‍स (छोटी थैलियां जिनमें अव‍िकस‍ित एग होता है) पूरी तरह मैच्‍योर नहीं हो पाते और एग रिलीज नहीं हो पाते हैं। इसके कारण ये फॉल‍िकल्‍स ओवरीज में ही जमा रह जाते हैं और अल्ट्रासाउंड में छोटे-छोटे मोती जैसे दिखाई देते हैं।

ओवरी क्‍या है?

ओवरी पेल्‍व‍िस में होती हैं और यह मह‍िलाओं का एक प्रकार का प्रजनन अंग है, ज‍िसका काम है एग बनाना। साथ ही ओवरी का काम है एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्‍स को बनाना।

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ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट क्‍या होती है?

ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट एक छोटे पानी के गुब्‍बारे जैसे आकार की द‍ि‍खती है ज‍िसमें द्रव भरा होता है। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट, ओवरी के अंदर फॉर्म हो सकती है, दोनों तरफ या एक तरफ हो सकती है। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट दोनों ओवरी में एक साथ भी हो सकती है। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट के लक्षण कई बार नजर नहीं आते। इसे अल्‍ट्रासाउंड की मदद से देखा जा सकता है और कुछ मामलों में इसका पता अल्‍ट्रासाउंड से भी नहीं चल पाता है।

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PCOS में सिस्ट और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट में अंतर

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में जो स‍िस्‍ट द‍िखती है, वो असल में छोटे-छोटे फॉल‍िकल्‍स यानी अधूरे अंडे होते हैं। ये तरल से भरी गांठ नहीं होती है। ये इसल‍िए बनते हैं क्‍योंक‍ि ओव्‍यूलेशन यानी एग र‍िलीज होने की प्रक्र‍िया ठीक से नहीं हो पाती है। यह ओवरी में छोटे-छोटे मोती की तरह द‍िखते हैं। यह असली स‍िस्‍ट नहीं होती बल्‍क‍ि अधूरे एग जमा होने के कारण बनती है। वहीं दूसरी ओर ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट वास्तव‍िक स‍िस्‍ट या गांठ होती है। इसमें द्रव या तरल भरा होता है। ये एक या एक से ज्‍यादा संख्‍या में हो सकती हैं।

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PCOS और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट में अंंतर

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PCOS ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट
सह एक हार्मोनल ड‍िसआर्डर है। एक या एक से ज्‍यादा द्रव से भरी थैली या स‍िस्‍ट।
अनियमित पीरियड, वजन बढ़ना, पिंपल्स, चेहरे पर बाल नजर आ सकते हैं। पेट दर्द, सूजन, कभी-कभी कोई लक्षण नहीं नजर आता।
PCOS का कारण हार्मोन असंतुलन हो सकता है। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट ओव्‍यूलेशन के दौरान बन सकती है।
PCOS का इलाज हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल और दवाओं की मदद से हो सकता है। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का इलाज दवा और सर्जरी से क‍िया जा सकता है, यह कुछ मामलों में खुद ठीक हो सकती है।

कारण

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS एक हार्मोनल समस्‍या है ज‍िसमें मह‍िला के शरीर में हार्मोन्‍स असंतुल‍ित हो जाते हैं। इसमें ओवरी में छोटे-छोटे फॉल‍िकल्‍स बन जाते हैं और ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित हो सकती है। वहीं ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट में एक या एक से अध‍िक द्रव से भरी स‍िस्‍ट बन जाती है। PCOS का कारण हार्मोनल असंतुलन, इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस और जेनेटि‍क फैक्‍टर्स हो सकते हैं। वहीं ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट ओव्‍यूलेशन के दौरान बन सकती है।

लक्षणों में अंतर

PCOS में अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स, वजन बढ़ना, मुंहासे, बाल झड़ना या चेहरे पर बाल आना (हिर्सुटिज्म) जैसे लक्षण दिखते हैं। वहीं ओवेरियन सिस्ट में अक्सर कोई लक्षण नहीं आते, लेकिन सिस्ट का साइज बड़ा होने पर पेट दर्द, सूजन या भारीपन जैसी समस्‍याएं महसूस हो सकती हैं। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट में असामान्‍य ब्‍लीड‍िंग भी हो सकती है।

इलाज

PCOS के इलाज के ल‍िए गर्भन‍िरोधक दवाएं, हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल की आदतों की मदद ली जाती है। गर्भधारण के मामलों में ओव्‍यूलेशन इंडक्‍शन की मदद ली जाती है। वहीं अगर ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट है, तो जांच की जाती है। कई बार स‍िस्‍ट दवा से ठीक हो जाती है। अगर गांठ का साइज बड़ा है, तो लैप्रोस्‍कोपि‍क सर्जरी की जाती है।

गंभीरता

PCOS एक लंबे समय तक रहने वाली (क्रॉनिक) समस्या है, जिसका असर फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता), मेटाबॉलिज्म और हार्ट हेल्थ पर भी पड़ सकता है। ओवेरियन सिस्ट आमतौर पर अस्थायी होती है और कई बार बिना इलाज के ठीक हो जाती है, हालांकि कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।

हार्मोन्‍स पर असर

PCOS

  • PCOS के कारण एड्रोजन (Androgen) हार्मोन जैसे टेस्‍टोस्‍टोरोन (Testosterone) प्रभाव‍ित हो सकते हैं ज‍िसके कारण चेहरे पर अनचाहे बाल या एक्‍ने की समस्‍या हो सकती है।
  • PCOS में इंसुल‍िन हार्मोन का स्‍तर बढ़ सकता है ज‍िसके कारण इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस, वजन बढ़ना, डायब‍िटीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • PCOS में एलएच LH (Luteinizing Hormone) बढ़ सकता है जो ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया में रुकावट बनता है।
  • एफएसएच (FSH or Follicle Stimulating) हार्मोन असंतुल‍ित हो सकता है ज‍िसके कारण एग मैच्‍योर नहीं हो पाता है।
  • इसके अलावा एस्ट्रोजन (Estrogen) का स्‍तर घट सकता है और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) का स्‍तर भी असंतुल‍ित होने के कारण ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया में रुकावट आ सकती है।

Ovarian Cyst

फंक्‍शनल स‍िस्‍ट होने पर एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) जैसे सेक्‍स हार्मोन्‍स प्रभावि‍त हो सकते हैं। एस्ट्रोजन शरीर में प‍ीर‍ियड्स को कंट्रोल करता है और प्रोजेस्टेरोन गर्भाशय को प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करता है।

फर्टि‍ल‍िटी पर असर

PCOS होने पर ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित होती है और इंफर्ट‍िल‍िटी का खतरा बढ़ सकता है। वहीं दूसरी ओर कुछ ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट इंफर्ट‍िल‍िटी का कारण बन सकती हैं। Mayo Clinic के मुताब‍िक, ओवरी के अंदर या उसकी सतह पर बनने वाली कुछ स‍िस्‍ट फर्ट‍िल‍िटी को प्रभाव‍ित कर सकती हैं। एंडोमेट्रियोमा (Endometrioma) और PCOS में होने वाली स‍िस्‍ट के कारण फर्ट‍िल‍िटी प्रभाव‍ित हो सकती है। कुछ ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट ऐसी भी हैं ज‍िनसे फर्ट‍िल‍िटी प्रभाव‍ित होने की संभावना कम होती है। जैसे- फंक्‍शनल स‍िस्‍ट, सिस्टेडेनोमा (Cystadenoma) और डर्मोइड सिस्ट (Dermoid Cyst)। 

जांच

PCOS की जांच के ल‍िए ब्‍लड टेस्‍ट क‍िया जाता है और कई हार्मोन्‍स का स्‍तर चेक क‍िया जाता है जैसे LH, FSH, TSH, टेस्‍टोस्‍टेरोन, इंसुल‍िन वगैरह। ओवरी की जांच के ल‍िए अल्‍ट्रासाउंड भी क‍िया जाता है। ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट की जांच के ल‍िए अल्‍ट्रासाउंड क‍िया जाता है। इससे स‍िस्‍ट का साइज और प्रकार का पता चलता है। साथ ही यह भी पता चलता है क‍ि स‍िस्‍ट कौन सी ओवरी में है?

लंबे प्रभाव

PCOS

  • मेटाबॉलिक समस्याएं जैसे मोटापा, डायब‍िटीज, इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस हो सकता है।
  • हार्ट ड‍िजीज
  • इंफर्टि‍ल‍िटी
  • स्‍ट्रेस, एंग्‍जायटी, ड‍िप्रेशन

Ovarian Cyst

  • बार-बार स‍िस्‍ट बनना
  • फर्टि‍ल‍िटी पर असर
  • एग काउंट कम होना

यह भी पढ़ें: PCOS का इलाज कैसे किया जाता है? जानें डॉक्टर से

PCOS और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का इलाज न होने पर क्‍या होगा?

PCOS

Healthdirect के मुताब‍िक, PCOS का इलाज समय पर कराना जरूरी है। ऐसा न करने पर यह सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इलाज न कराने से इन बीमार‍ियों का खतरा बढ़ सकता है-

  • टाइप 2 डायबिटीज
  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • हार्ट ड‍िजीज
  • स्लीप एपनिया
  • बांझपन
  • गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं, जैसे कि जेस्टेशनल डायबिटीज, प्रीक्लेम्पसिया
  • गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं जैसे कि एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया (गर्भाशय की परत का मोटा होना)

Ovarian Cyst

इसी तरह अगर ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का इलाज नहीं कराएंगे, तो ये समस्‍याएं हो सकती हैं-

  • इलाज न कराने पर स‍िस्‍ट धीरे-धीरे बड़ी हो सकती है ज‍िससे पेट में सूजन और भारीपन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • बड़ी सिस्ट या गांठ आस-पास के अंगों पर दबाव डाल सकती है।
  • सिस्ट फट (Rupture) सकती है ज‍िससे इंटरनल ब्‍लीड‍िंग और तेज दर्द हो सकता है।
  • स‍िस्‍ट ओव्‍यूलेशन को प्रभाव‍ित करती है ज‍िससे गर्भावस्‍था में समस्‍या हो सकती है।

यह भी पढ़ें: PCOS के लक्षण क्या हैं? डॉक्टर से जानें

ओवेर‍ियन स‍ि‍स्‍ट का साइज ज्‍यादा होने के संकेत

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि कई बार पता नहीं चलता और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का साइज बड़ा हो जाता है, ऐसे में इन संकेतों पर गौर करें-

  • अगर ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का साइज ज्‍यादा है, तो नाभ‍ि के नीचे एब्‍डोम‍िनल फुलनेस का एहसास हो सकता है।
  • ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का साइज ज्‍यादा होने पर कभी-कभी मतली या उल्‍टी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।
  • ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का साइज बड़ा होने पर यूर‍िनरी ब्‍लैडर पर प्रेशर आ सकता है और यूर‍िन करने में समस्‍या हो सकती है।

यह भी पढ़ें: PCOS का खतरा किन महिलाओं को ज्यादा होता है? डॉक्‍टर से जानें

ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट के र‍िस्‍क फैक्‍टर्स क्‍या हैं?

  • पहले कभी ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट हुई है, तो दो भविष्य में दोबारा बनने की संभावना हो सकती है।
  • अगर पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हैं, तो ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट होने की आशंका बढ़ सकती है।
  • इंफर्टि‍ल‍िटी के केस में भी ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट हो सकती है।
  • पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम है, तो ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट हो सकती है।
  • मोटापा या हाइपरथायरायडिज्म का श‍िकार हैं, तो भी ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का खतरा हो सकता है।

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ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट खुद ही ठीक हो जाती है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि ज्‍यादातर मामलों में यह देखने को मि‍लता है क‍ि ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट खुद ही ठीक हो जाती है। हालांक‍ि इसका यह मतलब नहीं है क‍ि ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट को हल्‍के में लेना चाह‍िए। इसका सही इलाज होना जरूरी है वरना यह शरीर में बड़ी समस्‍या का कारण बन सकती है। National Health Service, UK के मुताब‍िक, ज्‍यादातर मामलों में ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट कुछ ही महीनों में ठीक हो जाती है। इलाज की जरूरत होगी या नहीं, यह इन बातों पर निर्भर करेगा-

  • स‍िस्‍ट या गांठ का आकार और बनावट।
  • स‍िस्‍ट के साथ अन्‍य लक्षण।
  • अगर आप मेनोपॉज के बाद की अवस्था में हैं, तो ओवेरियन कैंसर का खतरा थोड़ा ज्‍यादा होता है।

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ओवेरेय‍िन स‍िस्‍ट से कैसे बचें?

Mayo Clinic के मुताब‍िक, ज्‍यादातर ओवेरियन सिस्ट से बचने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन, नियमित पेल्विक जांच से यह पक्का करने में मदद मिलती है कि ओवरीज हेल्‍दी हैं या नहीं? Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि अपने मासिक चक्र में होने वाले बदलावों पर नजर रखें। मासिक धर्म के असामान्य लक्षणों को नोट करें, खासकर उन लक्षणों को जो कुछ चक्रों से ज्‍यादा समय तक बने रहते हैं। जिन बदलावों को लेकर आपको चिंता है, उनके बारे में डॉक्‍टर से बात करें।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

कुछ लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए जैसे-

  • अगर बहुत ज्‍यादा दर्द हो और बर्दाश्त न हो, तो डॉक्‍टर से तुरंत सलाह लें।
  • पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होना
  • पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होना
  • वजन अचानक बढ़ना
  • चेहरे पर ज्‍यादा बाल या एक्‍ने होना
  • अचानक पेट में दर्द या सूजन

निष्कर्ष:

Dr. Smriti Agrawal से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है क‍ि PCOS और ओवेरियन सिस्ट दोनों अलग स्थितियां हैं। PCOS एक कॉम्‍प्‍लेक्‍स हार्मोनल समस्या है ज‍िसका इलाज लाइफस्‍टाइल में बदलाव और दवाओं के साथ क‍िया जाता है। इसे पूरी तरह से खत्‍म नहीं क‍िया जा सकता है, लेक‍िन लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं। दूसरी ओर ओवेरियन सिस्ट एक सामान्य और अक्सर अस्थायी स्थिति होती है और इसे दवा या सर्जरी के साथ ठीक‍ क‍िया जा सकता है। सही पहचान और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है, ताकि सही इलाज मिल सके और भविष्य में गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य स्‍थ‍िति‍ से बचा जा सके। 

Image credit: prismic.io

FAQ

  • क्‍या प्रेग्नेंसी में ओवेर‍ियन स‍ि‍स्‍ट हो सकती है?

    प्रेग्नेंसी में फंक्‍शनल ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट हो सकती है। स‍िस्‍ट ज्‍यादातर मह‍िलाओं में पहली ति‍माही में हो सकती है। स‍िस्‍ट डि‍लीवरी के समय तक ठीक हो सकती है। 
  • एंडोमेट्रियोसिस और PCOS में क्‍या अंतर है?

    एंडोमेट्र‍ियो‍स‍िस में यूट्रस या गर्भाशय के अंदर की परत बाहर ओवरी या पेट में बढ़ने लगती है। इससे सूजन और दर्द होता है। वहीं दूसरी ओर PCOS की समस्‍या ओवरी से संबंधि‍त है ज‍िसमें एग सही ढंग से नहीं बन पाता है।
  • PCOS और ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट का पीर‍ियड्स पर क्‍या असर होता है?

    PCOS में पीरि‍यड्स अन‍ियम‍ित हो जाते हैं, वहीं ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट में प‍ीर‍ियड्स पर असर देर से नजर आता है। अक्‍सर जब गांठ का साइज ज्‍यादा बड़ा होता है, तब पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं या हैवी ब्‍लीड‍िंग होती है।
  • ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट कैंसर बन सकती है?

    ज्‍यादातर मामलों में ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट कैंसर रह‍ित होती है, लेक‍िन कुछ रेयर केस में ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट सामान्‍य नहीं बल्‍क‍ि कैंसर वाली गांठ होती है इसल‍िए समय पर इलाज और जांच कराना जरूरी है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 14, 2026 12:40 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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    Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal

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