WORLD COPD DAY 2021: फेफड़ों की गंभीर बीमारी है सीओपीडी, जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

दुनियाभर में मौत का तीसरा प्रमुख कारण COPD है। ऐसे में बढ़ता वायु प्रदूषण इस बीमारी (Air Pollution and COPD) के खतरे को और बढ़ा रहा है। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Nov 17, 2021Updated at: Nov 17, 2021
WORLD COPD DAY 2021: फेफड़ों की गंभीर बीमारी है सीओपीडी, जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

हमारे आस-पास फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां पैदा करने वाले कारक बढ़ते जा रहे हैं। जैसे कि इस समय बढ़ता वायु प्रदूषण और कोविड-19 का खतरा। हाल के समय को देखें तो दुनिया भर में बढ़ता वायु प्रदूषण और इसके प्रदूषक कण हमारे फेफड़ों की काम करने की क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। फेफड़ों की एक ऐसी ही गंभीर बीमारी है क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)। इस बीमारी में हमारी सांस लेने की गति प्रभावित होती है। इसके कारणों पर गौर करें तो,  विकसित देशों में सीओपीडी का मुख्य कारण तंबाकू खाना या फिर धूम्रपान है। जबकि भारत जैसे विकासशील देशों में, सीओपीडी का कारण घर के बाहर या घर के अंदर का वायु प्रदूषण (Air Pollution and COPD) है। ये धुएं और हानिकारण गैस व पार्टिकुलेट मैटर (Particulate matter) के संपर्क में रहने वाले लोगों में होता है। इसके अलावा सीओपीडी के कई कारण और लक्षण हैं, पर उससे पहले हमें ये जानना चाहिए कि आखिरकार फेफड़ों से जुड़ी ये गंभीर बीमारी है क्या। इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने डॉ. मनोज गोयल (Dr.Manoj Goel), निदेशक, पल्मोनोलॉजी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट से बात की। 

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सीओपीडी क्या है- What is COPD?

डॉ मनोज गोयल (Dr.Manoj Goel) की मानें तो,  क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic obstructive pulmonary disease) एक पुरानी सूजन वाली फेफड़े की बीमारी है जो फेफड़ों में वायु प्रवाह में लगातार रुकावट का कारण बनती है। अस्थमा के अलग, यह काफी हद तक प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है, जिसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता। इसमें रोगी को अक्सर लक्षणों का एहसास नहीं होता है, जब तक कि आपको फेफड़ों से जुड़ी कोई परेशानी महसूस ना हो। जब लक्षण शुरू होते हैं तो ज्यादातर लोग कम से कम 40 साल के होते हैं। यह दुनिया में मौत का तीसरा प्रमुख कारण है। इसलिए इस बीमारी का जल्द से जल्द पता लगाना बेहद जरूरी है ताकि आप इसे बढ़ने से रोक सकें।  

सीओपीडी का कारण-Causes of COPD

डॉ. मनोज गोयल बताते हैं कि सीओपीडी के लिए तंबाकू के धुएं का एक्सपोजर सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। सीओपीडी वाले लगभग 90 प्रतिशत लोग धूम्रपान करने वाले होते हैं या जो पहले धूम्रपान कर रहे थे। 20 से 30 प्रतिशत पुराने धूम्रपान करने वालों में चिकित्सकीय रूप से स्पष्ट सीओपीडी विकसित हो सकता है। दरअसल, लंबे समय तक धूम्रपान करना इसके जोखिम को और बढ़ा देता है। अन्य जोखिम कारकों में 

  • -सेकेंडहैंड स्मोक
  • - खाना पकाने के लिए जलने वाले ईंधन से धुएं के संपर्क में आना 
  • -खराब हवादार घरों में रहना
  • -धूल और रसायनिक गैसों में सांस लेना 
  • -आनुवंशिक विकार
  • - अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन की कमी 
  • - अनियंत्रित अस्थमा शामिल हैं।

COPD में फेफड़े कैसे प्रभावित होते हैं?

सीओपीडी के कारण आपने फेफड़े कैसे प्रभावित होते हैं उसे जानने से पहले हमें ये जानना होगा कि हमारे फेफड़े काम कैसे करते हैं और सीओपीडी इनके काम में कैसे रुकावट पैदा करता है। दरअसल,  हवा आपके श्वासनली (windpipe) और आपके फेफड़ों में दो बड़ी नलियों (bronchi) के माध्यम से यात्रा करती है। आपके फेफड़ों के अंदर, ये नलिकाएं कई बार विभाजित होती हैं और एक पेड़ की शाखाओं की तरह कई छोटी नलियों (bronchioles) में बदल जाती है। ये नलियां छोटी-छोटी हवा की थैलियों (alveoli) के समूहों से भरी होती हैं। हवा की थैली में बहुत पतली दीवारें होती हैं जो छोटी रक्त वाहिकाओं से भरी होती हैं। आप जिस हवा में सांस लेते हैं, वह ऑक्सीजन इन रक्त वाहिकाओं में जाती है और आपके रक्तप्रवाह में प्रवेश करती है। उसी समय, कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालता है। 

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ध्यान देने वाली बात ये है कि आपके फेफड़े आपके शरीर से हवा को बाहर निकालने के लिए ब्रोन्कियल ट्यूबों और वायु थैली की प्राकृतिक लोच (natural elasticity) पर निर्भर करते हैं। सीओपीडी के कारण ये अपनी लोच खो देते हैं और अधिक फैल जाते हैं, जिससे सांस छोड़ते समय आपके फेफड़ों में कुछ हवा फंस जाती है। ऐसे में जब आप सांस छोड़ते हैं तो छोटे वायुमार्ग फट जाते हैं, जिससे फेफड़ों में हवा की सर्कुलेशन बाधित हो जाती है। ऐसे में कई बार क्रोनिक ब्रोंकाइटिस की स्थिति आ जाती है जिसमें आपकी ब्रोन्कियल नलियां सूज जाती हैं और संकुचित हो जाती हैं। ऐसे में आपके फेफड़े अधिक बलगम का उत्पादन करते हैं, जो संकरी नलियों को और ब्लॉक कर सकते हैं। 

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सीओपीडी के लक्षण- COPD Symptoms

सीओपीडी से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सबसे पहले, सीओपीडी के लक्षण काफी हल्के हो सकते हैं और सर्दी के रूप में नजर आती है। 

शुरुआती लक्षणों में 

  • - एक्सरसाइज के बाद कभी-कभी सांस की तकलीफ
  • - हल्की लेकिन बार-बार आने वाली खांसी 
  • -अक्सर गले को साफ करने की जरूरत महसूस करना, विशेष रूप से सुबह में या धूम्रपान करने के बाद महसूस करना। 

बाद के लक्षणों में 

बाद में ये लक्षण और बदतर हो सकते हैं और अनदेखा करना कठिन हो सकता है। जैसे-जैसे फेफड़े अधिक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं,

  • - आपको हल्की एक्सरसाइज के बाद भी सांस की तकलीफ का अनुभव हो सकता है, जैसे कि सीढ़ियों से ऊपर चलने में घरघराहट, सीने में जकड़न, पुरानी खांसी, बार-बार सर्दी, फ्लू, या अन्य श्वसन संक्रमण और ऊर्जा की कमी।
  • - ज्यादा थकान महसूस करना
  • - पैरों में सूजन और वजन कम होना।
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सीओपीडी वाले लोगों को एक्ससेर्बेशन (exacerbations)का अनुभव होने की भी संभावना रहती है, जिसमें उनके लक्षण दिन-प्रति-दिन भिन्नता के साथ बदतर हो जाते हैं और हर लक्षण कई दिनों तक बने रह सकते हैं।

सीओपीडी की जटिलताएं

सीओपीडी कई जटिलताएं पैदा कर सकता है, जिसमें सर्दी, फ्लू और निमोनिया जैसे श्वसन संक्रमण शामिल हैं जो फेफड़ों के ऊतकों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं। सीओपीडी वाले लोग सहायता के बिना स्वयं की देखभाल नहीं कर पाते हैं। उन्हें हृदय की समस्याओं और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। उन्हें अवसाद और चिंता का खतरा भी हो सकता है। इस तरह उनकी जीवन में आपातकालीन स्थितियों की संभावनाएं बनी रहती हैं। 

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सीओपीडी से बचाव के उपाय-Prevention tips for COPD

•धूम्रपान करना बंद कर दें। 

•खाना पकाने के लिए धुएं पैदा करने वाली चीजों का इस्तेमाल ना करें।  

•खाना पकाने का काम हवादार रसोई में करें।

•किसी तरह के वायु प्रदूषण से बचें।

• दवा नियमित रूप से लें जो मुख्य रूप से इनहेलर के रूप में होती हैं।

• फेफड़ों के संक्रमण से बचें और इसके लिए फ्लू के टीके और न्यूमोकोकल टीके, सीओपीडी वाले लोगों के लिए विशेष रूप से लगवा लेना चाहिए। 

• कुछ लोगों के खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर उन्हें पोर्टेबल ऑक्सीजन टैंक का उपयोग करने की जरूरत हो सकती है।

• खूब सारे तरल पदार्थ पिएं जिससे बलगम का बाहर निकलना आसान हो जाए।

• कैफीनयुक्त पेय पदार्थों को सीमित करें।

• नमक का सेवन कम करें क्योंकि इससे शरीर में पानी जमा हो जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

• वजन संतुलित रखें।

इन सबके अलावा घर के बाहर या घर के अंदर रहते हुए वायु प्रदूषण से बचने की कोशिश करें। वायु प्रदूषण को कम करने की कोशिश करें। साथ ही  पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन (Pulmonary rehabilitation), जो एक व्यक्तिगत उपचार कार्यक्रम है, उसे लेने की कोशिश करें। ये सीओपीडी के मैनेजमेंट की रणनीति सिखाता है। इनके कार्यक्रमों में ऐसी योजनाएं शामिल हो सकती हैं जो लोगों को बेहतर तरीके से सांस लेना और उनकी ऊर्जा का संरक्षण करना सिखाती हैं और साथ ही डाइट और एक्सरसाइज से जुड़े सलाह भी देती हैं।

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