बच्चो का आयुर्वेदिक तरीके से इलाज़ करने के लिए अत्यंत सावधानी रखनी पड़ती है अन्यथा बच्चो पर आयुर्वेदिक नुस्खे गलत प्रभाव भी डाल सकते है। आयुर्वेदा की 8 शाखाओ में बच्चो के लिए बाल तंत्र व् कौमारभृत्य नमक शाखा है। बाल उम्र में धातुओं के अपरिपक्व होने से हर इलाज एवं नुस्खे से पहले सावधानी बरतनी जरूरी होती है। 

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इन 5 आयुर्वेदिक तरीकों से करें बच्‍चों की देखभाल, हमेशा रहेंगे स्‍वस्‍थ और सेहतमंद

बच्चो का आयुर्वेदिक तरीके से इलाज़ करने के लिए अत्यंत सावधानी रखनी पड़ती है अन्यथा बच्चो पर आयुर्वेदिक नुस्खे गलत प्रभाव भी डाल सकते है। आयुर्वेदा की 8 शाखाओ में बच्चो के लिए बाल तंत्र व् कौमारभृत्य नमक शाखा है। बा

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Oct 11, 2018Updated at: Oct 11, 2018
इन 5 आयुर्वेदिक तरीकों से करें बच्‍चों की देखभाल, हमेशा रहेंगे स्‍वस्‍थ और सेहतमंद

आयुर्वेद के लाभों से कोन वाकिफ नहीं है? बच्चे, नौजवान, गर्भवती महिला व बुजुर्गो तक, आयुर्वेद में सबके जीवन की गुणवत्ता बढ़ने की क्षमता है। बच्चो के लिए आयुर्वेदा एक बिलकुल ही अलग चीज़ है। बच्चो का आंतरिक अंग बाकी सबसे अलग होता है जिसकी वजह से आयुर्वेदा का हर नुस्खा उनपे नहीं लगाया जा सकता। बच्चो में आगे की बढ़त को देखते हुए ही आयुर्वेद उन्हें ठीक कर सकता है। बच्चो में उनके अपने दोष होते है जिन्हे आयुर्वेद की सहायता से ठीक करा जा सकता है। वयस्‍कों ने ज्यादा तेज़ी से बच्चे संतुलित हो जाते है क्यूंकि वह वर्तमान में जीते है और इस वजह से उनका अंदरूनी शरीर अधिक तेज़ी से संतुलित हो पता है। 

बच्चो का आयुर्वेदिक तरीके से इलाज़ करने के लिए अत्यंत सावधानी रखनी पड़ती है अन्यथा बच्चो पर आयुर्वेदिक नुस्खे गलत प्रभाव भी डाल सकते है। आयुर्वेदा की 8 शाखाओ में बच्चो के लिए बाल तंत्र व् कौमारभृत्य नमक शाखा है। बाल उम्र में धातुओं के अपरिपक्व होने से हर इलाज एवं नुस्खे से पहले सावधानी बरतनी जरूरी होती है। स्‍वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्‍सालय योग अनुसंधान की डॉ. दिव्या शरद, बता रही है की कैसे बच्चो में दोष को दूर रख उनमे संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।  

1. उपकरणों से दूर रहना : 

इस प्रौद्योगिक काल में जहा हर तरफ हानिकारक किरणों वाले उपकरण मौजूद है, बच्चो को ऐसे उपकरणों से दूर रखना उनके स्वस्थ जीवन के तरफ पहले कदम होगा। इन उपकरणों पर समय व्यस्त करने की जगह, बच्चो को किसी उत्पादक काम में लगाए। 

2. पानी से दिन की शुरुआत करना : 

दिन की शुरुआत पानी पीने से करना आंतरिक सफाई की तरफ एक बेहतरीन आदत है। बच्चो में शुरुआती उम्र से ही ये आदत डालना उन्हें भविष्य में काफी लाभ पहुंचा सकता है।

  

3. चुनिंदा मसालों का सेवन : 

बच्चो के खाने में हल्दी, काली मिर्च एवं जीरा का उपयोग करना एक अत्यंत लाभदायिक नुस्खा है। आयुर्वेद में इन मसालों को पाचन क्रिया की गुणवत्ता बढ़ने के लिए उपयोगी मन जाता है।

4. आयुर्वेदिक खाने का सेवन : 

खाना हमारी अग्नि को ऊर्जा एवं पोषण प्रदान करता है। बच्चो के लिए पचने में आसान खाना ही सबसे उपयोगी है क्यूंकि उनके अंधरुनि जटिल खाद्य पदार्थो को पचा नहीं सकते। बच्चो के खाने में हर तरह का स्वाद होना जरूरी है।

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5. उत्तेजनाओं का संतुलन : 

बच्चो से ज्यादा उत्तेजना शायद ही किसी और में देखने को मिलती है पर इन उत्तेजनाओं का संतुलित रहना बहुत जरूरी है। इन उत्तेजना को संतुलित रखने के लिए, बच्चो के लिए एक दिनचर्या का होना लाभदायक रहेगा।

बच्चो को इन सब आदतों से वाकिफ करना और उनकी दिनचर्या में डालना उनके वर्तमान और भविष्य के लिए अत्यंत लाभदायी है। इन आदतों से बच्चो पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, यह देखना भी जरूरी है। एकदम से उनकी दिनचर्या में यह सब आदतें उन्हें चिड़चिड़ा बना सकती है, इसीलिए उन्हें कौन सी आदत पसंद है और कोनसी नहीं इसे ध्यान में रखकर ही कदम उठाये।

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