भारत में कैंसर का प्रकोप

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 19, 2012

Bharat me cancer ka prakop

हाल ही के अध्ययनों से पता चला है कि भारत में कैंसर  का प्रकोप दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। और इसके मुख्य कारण हैं, शहरीकरण, औद्योगीकरण, जीवनशैली में परविर्तन, आबादी का बढ़ना, जीवन अवधि में बढ़ोतरी (जिसके कारण वरिष्ठ नागरिकों की आबादी में भी बढ़ोतरी हो गई है) इत्यादि । और ऐसा माना जाता है कि वर्ष 2021 तक एक व्यक्ति की औसतन जीवन अवधि मौजूदा 62 वर्ष से बढ़कर 70 वर्ष होने वाली है। और समय के साथ रोगों का स्वरुप संक्रामक रोगों से कैंसर, उच्च रक्तचाप, और मधुमेह जैसे गैर-संक्रामक रोगों में बदलता जा रहा है।

कैंसर एक भयानक और घातक रोग माना जाता है, अगर इसका इलाज वक़्त पर नहीं किया गया। और भारत में कैंसर का प्रकोप दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। वर्ष 2005 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर की दर विश्व में सबसे अधिक बताई गई है। यह एक बहुत ही भयावह और झकझोर  देने  बात है। आखिर क्या हो गया है हमारे देश को? हमारी जीवन शैली, हमारा खान पान, सब गड़बड़ा गए हैं जिसके कारण हमें कैंसर के इस प्रकोप का सामना करना पड़ रहा है। आज हम व्यायाम नहीं करते या हमें व्यायाम करने का समय नहीं मिलता और हमें चर्बीयुक्त खान पान का सेवन करने की आदत पड़ गई है। कुछ लोग अपनी बढ़ी हुई तोंद देकर खुश होते हैं लेकिन वे यह नहीं जानते कि एक बढ़ी हुई तोंद समृद्धि की निशानी नहीं माननी चाहिए, बल्कि इसे बीमारियों का घर मानना चाहिए।

और बात सिर्फ रोगों की नहीं है, बल्कि भारत में उपलब्ध अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा की भी बात है। भारत में मध्यम वर्गीय परिवार के पास गंभीर बीमारियों के लिए चिकित्सा बीमा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते, और अधिकतर नियोक्ता अपने कर्मचारियों को सीमित चिकित्सा खर्च प्रदान करते हैं।

कैंसर एक तरह का गैर संक्रामक और घातक रोग माना जाता है। और सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों को कैंसर के प्रकोप के गति विज्ञान के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है, ताकि वे भावी कूटनीतियों की योजना बना सकें।

वर्ल्ड हेल्थ और्गनाइज़ेशन द्वारा निधिबद्ध एक परियोजना के तहत, बंगलुरु के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम ने, भारत में कैंसर के प्रकोप की व्यापकता जानने के लिए, भारत के 593 में से 82 जिलों के 105 अस्पताल और निजी चिकित्सालयों से आंकड़े जमा किये। इस सर्वेक्षण में 2 लाख से अधिक लोग कैंसर जैसे रोग से ग्रस्त पाए गए।

बंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, भोपाल और मुंबई में किये गए एक और सर्वेक्षण के अनुसार, इन पांच शहरों में कैंसर रोग के मामले 26 से अधिक प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, जबकि दिल्ली में इन मामलों के 53 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है जिसका मतलब है कि अगले 8-9 वर्षों में दिल्ली में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ने वाले हैं। मुंबई में कैंसर के रोग के कारण मरनेवालों का उम्र के हिसाब से बिश्लेषण किया गया, और इस विश्लेषण के अनुसार, मुंबई में कैंसर के रोग से मरनेवालों में 50 प्रतिशत 55 वर्ष की ऊपर की उम्र के रोगी पाए गए।    

कैंसर के कुछ प्रकार:


मूत्राशय का कैंसर, गुदा का कैंसर, स्तन कैंसर, मलाशय का कैंसर, गले और ब्रेन का कैंसर, लीवर का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, अग्न्याशय का कैंसर,प्रोस्टेट का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, उदर का कैंसर, गुर्दे का कैंसर वगैरह। 

 
स्वास्थ्यवर्धक आहारों का सेवन करने से कैंसर से बचा जा सकता है  जैसे हरी सब्जियां।


हरी पत्तेदार सब्जियां कई बीमारियों से आपको बचाती हैं जिनमें एक बीमारी कैंसर भी है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि हरी पत्तेदार सब्जियां इंसान को मधुमेह से बचाती हैं। साथ हीं साथ शोध से यह भी ज्ञात हुआ है की मधुमेह से कैंसर होने का खतरा काफी हद तक रहता है। यानि जो व्यक्ति खुद को मधुमेह से बचा लेता है समझिये  उसने काफी हद तक खुद को मधुमेह से होने वाले कैंसर से भी बचा लिया। यानि हरी सब्जियां खाने से दो दो फायदे : मधुमेह के साथ साथ आप कैंसर से भी बच गए!

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