40 की उम्र के बाद गर्दन, कमर और पीठ के दर्द से रहना है दूर तो करें मार्जरी आसन, जानें इसके फायदे और विधि

लंबे समय बैठकर ऑफिस का काम करने की वजह से गर्दन, कमर और पीठ में दर्द की समस्या से मार्जरी आसन निजात दिलाता है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Apr 12, 2021
40 की उम्र के बाद गर्दन, कमर और पीठ के दर्द से रहना है दूर तो करें मार्जरी आसन, जानें इसके फायदे और विधि

कोरोनाकाल की देन न्यू नॉर्मल में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था बढ़ गई है। इस महामारी के काल में लंबे समय बैठना पड़ रहा है, जूम मीटिंग से लेकर ऑफिस के असानइनमेंट टाइम पर खत्म करने का दबाव है। ऐसे में जाहिर सी बात है कि लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करना पड़ रहा है। जिस वजह से कमर दर्द, गर्दन दर्द, लोअर बैक पेन हो रहा है। तो वहीं, 40 की उम्र के बाद कमर की समस्याएं और बढ़ जाती हैं। ऐसे लोग जो 40 की उम्र पार कर चुके हैं अगर वे इतनी देर तक बैठकर सही पॉश्चर में बैठकर काम नहीं करते तो कमर की दिक्कत होने लगती हैं। लेकिन यहां इनोसेंस योगा की योग एक्सपर्ट भोली परिहार आपको बता रही हैं कि आप कैसे सिर्फ एक आसन करके अपनी कमर को फिट रख सकते हैं। मार्जरी आसन (Cat and Cow pose benefits) एक ऐसा आसन है जिसे 40 की उम्र पार कर चुके लोग आसानी से कर सकते हैं।

मार्जरी आसन के फायदे

इस आसन को पोज कैट यानी बिल्ली और दूसरी बार काओ यानी गाय जैसी बनती है। इसलिए इसे कैट ऐंड काओ आसन कहते हैं। हिंदी में इसे मार्जरी आसन कहते हैं। 40 की उम्र के बाद इस आसन को करने से कमर, पीठ और गर्दन में दर्द ठीक होता है। रीढ़ की हड्डी को मजबूती देता है। इसके अलावा निम्न फायदे हैं। 

रीढ़ की हड्डी में लचीलापन

रीढ़ की हड्डी आपके शरीर का आधार है। अगर यह रीढ़ की हड्डी शरीर में नहीं होती तो आप कल्पना कर सकते हैं कि आपका शरीर का कैसा बेढ़ंगा होता है। मार्जरी आसन (Cat and cow pose for spine) करने से रीढ़ की हड्डी को बल मिलता है और उसमें लचीलापन आता है। इस आसन से हमारी पूरी रीढ़ की हड़्डी को मजबूती मिलती है। तो वहीं, यह आसन हमारे बैठने की स्थिति को भी ठीक करता है। जो लोग कंप्यूटर पर काम करते समय कमर को झुकाकर रखते हैं, उसमें यह आसन सुधार करता है। 

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तनाव करे कम

इस आसन को करते हुए हमारे शरीर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है और बिना दबाव आए हम अपने पूरे शरीर की स्ट्रेंचिंग के द्वारा मसाज करते हैं। देर तक काम करने की वजह से गर्दन में दर्द होने लग जाता है जिसकी वजह से झुंझलाहट होती है और तनाव बढ़ता है, लेकिन मार्जरी आसन करने से गर्दन दर्द कम होता है और तनाव कम होता है। यह आसन हमारी बॉडी में हैप्पी हार्मोन बनाता है जिसके कारण तनाव का स्तर कम होता है।

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हिप्स की मजबूती

देर तक बैठने की वजह से हिप्स में सुन्नपन (Numbness in the hips) की परेशानी होने लगती है। इसे डेड बट सिंड्रोम भी कहते हैं। इसकी वजह से देर तक बैठने में काम करने में दिक्कत होती है। बट में दर्द या जलन होने लगती है। यह सभी परेशानियां हिप्स की एक्सरसाइज न करने की वजह से होती हैं। लेकिन मार्जरी आसन एक आसन है जो हिप्स के दर्द से भी निजात दिला सकता है। क्योंकि इस आसन को करते समय हिप्स पर भी दबाव पड़ता है। 

शरीर में लचीलापन

शरीर में लचीलेपन की कमी की वजह से मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिस वजह से दर्द होता है। 40 की उम्र के बाद शरीर की दिक्कत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, इसलिए मार्जरी आसन उनके लिए फायदेमंद है। यह आसन हमारे हिप्स व रीढ वाले हिस्से से कड़ापन को कम करता है व हमारी मांसपेशियों को गर्म कर देता है। साथ ही साथ हमारी पूरी स्पाइन के कॉलम को रिलीज करता है जिसके कारण हमारी फ्लैक्सीबिलिटी बढ़ती है। जिन पुरुषों को 40 की उम्र के बाद कमर में दर्द रहता है, व कम हो जाता है। 

फेफड़ों को खोलता है

यह आसन छाती को मजबूती और फेफड़ों को खोलता है। जब स्वांस भरते हुए अपनी रीढ़ की हड्डी को नीचे की तरफ दबाव डालते हैं तब उस स्थिति में हमारे छाती वाला हिस्सा खुलता है व उसे अच्छा खिंचाव मिलता है। जिसके कारण हमारा ब्रिदिंग पैटर्न भी मजबूत होता है। फेफड़ों के आसपास की मांसपेशियों को खिंचाव मिलता है। जिसके कारण फेफड़े अपना काम बेहतर तरीके से कर पाते हैं। 

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पाचन को मजबूती

40 की उम्र के बाद पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। मार्जरी आसन से यह परेशानी ठीक हो जाती है। योग एक्सपर्ट भोली परिहार का कहना है कि जब हम कैट ऐंड काओ पोज करते हैं तब हमारे पेट में कॉन्ट्रेक्शन व खिंचाव आता है। जिसके कारण हमारे पेट की मांसपेशियों को अच्छा खिंचाव मिलने के कराण उस एरिया में रक्त का संचार बढ़ जाता है और पाचन की समस्या खत्म होती है। जब आपको गैस बन रही हो तब इस आसन को न करें। दूसरा खाना खाने के तुरंत बाद भी इस आसन को न करें।

मार्जरी आसन को करने का तरीका

  • वज्रासन में बैठ जाएं।
  • अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों पर रखें।
  • पांच से छह बार लंबी गहरी सांस लेते हुए व छोड़ते हुए अपने शरीर को आसन के लिए तैयार करें।
  • दोनों पैरों में कंधे के बराबर दूरी कर लें। व घुटनों के बल खड़े हो जाएं।
  • अपने दोनों हाथों को आगे रखते हुए कंधे के बराबर दूरी करें।
  • इसमें आपकी स्थिति कुछ टेबल की तरह दिखेगी।
  • अपनी उंगलियों को अपनी मैट पर खोल दें।
  • पैरों के पंजों को जमीन पर समतल (flat) ही रखें।
  • सांस भरते हुए अपनी कमर को नीचे की ओर दबाव डालें। यह स्थिति अंग्रेजी के अक्षर सी की तरह होगी।
  • सांस छोड़ते हुए अपने मेरूदंड को आसमान की ओर खिंचाव दें।
  • इस प्रक्रिया को 30-35 बार करें।
  • धीरे से वापस आ जाएं और विश्राम करें।

जैसाकि हमने देखा है कि 40 की उम्र के बाद काफी लोगों को कमर में दर्द होने लगता है। नसें कमजोर होने लगती हैं। जिसके कारण काफी लोगों को सियाटिका प्रॉब्लम हो जाती हैं। यदि वो इस आसन को करते हैं तो उनके कमर दर्द में तो राहत मिलेगी साथ ही साथ उनकी सियाटिक की दिक्कत भी कम होगी। 

सावधानियां

  • 40 की उम्र के बाद हड्डी रोग बढ़ जाते हैं। उन्हीं में से एक रोग अर्थराइिस। तो जिन लोगों को अर्थराइटिस है वे मार्जरी आसन न करें।
  • जिन लोगों को गंभीर कमर दर्द है वे किसी की देखरेख में करें।  

40 की उम्र के बाद भी अगर आपको स्वस्थ रहना है तो नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली को अपना जरूरी है। आप रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करें। इससे आप लंबे समय तक स्वस्थ रहेंगे।  

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