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बच्चों को टीबी और दिमागी बुखार से बचाने के लिए कब लगवाएं BCG टीका? जानें डॉक्टर की सलाह

बच्चों को टीबी और दिमाग बुखार जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए उन्हें बीसीजी का टीका जरूर लगवाना चाहिए, जानें कब लगवाएं बीसीजी का टीका।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: May 04, 2022Updated at: May 04, 2022
बच्चों को टीबी और दिमागी बुखार से बचाने के लिए कब लगवाएं BCG टीका? जानें डॉक्टर की सलाह

शिशु के जन्म के बाद माता-पिता के लिए सबसे जरूरी यह है कि उन्हें गंभीर बीमारियों और संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। दिमागी बुखार और टीबी जैसी गंभीर समस्याएं शिशुओं में कम उम्र से ही हो सकती हैं। ये बीमारियां कई बार देखरेख और इलाज के अभाव में जानलेवा हो जाती हैं। आज के समय में जब विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है, बीमारियों से बचाव के लिए कई ऐसे टीके मौजूद हैं जिन्हें बचपन में ही लगाने कई गंभीर बीमारियों से बचाव में फायदा मिलता है। जन्म के कुछ महीने बाद से ही बच्चे को कई तरह के टीके लगाए जाते हैं। शिशु के स्वास्थ्य और उन्हें बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन की डोज लेना बहुत जरूरी है। बच्चों को टीबी और दिमागी बुखार जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए उन्हें बीसीजी वैक्सीन (BCG Vaccine) की खुराक जरूर दी जानी चाहिए। बीसीजी का टीका दुनिया के कई देशों में लगाया जाता है। यह टीका बच्चों को दिमागी बुखार और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने का काम करता है और उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आइये जानते हैं इसके बारे में।

क्या है बीसीजी का टीका? (BCG Vaccine For Newborn Dosage in Hindi)

बीसीजी एक तरह की वैक्सीन है जो मुख्य रूप से शिशुओं को टीबी और दिमागी बुखार से बचाने के लिए लगाई जाती है। बीसीजी वैक्सीन को बेसिल कालमेट ग्युरिन (Bacille Calmette-Guerin) के नाम से जाना जाता है। जिला अपस्ताल गोंडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ एक के श्रीवास्तव के मुताबिक टीबी और दिमागी बुखार से बचाने के अलावा बीसीजी का टीका कैंसर जैसी घातक बीमारियों के खतरे को कम करने का काम करता है। बीसीजी टीके की डोज लेने के बाद शिशु के शरीर में दिमागी बुखार और टीबी से बचने के लिए प्रतिरक्षा तैयार होती है। इस टीके का डोज लेने के बाद शिशु के शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। कई शोष और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि बीसीजी का टीका लगवाने के बाद लगभग 15 साल की उम्र तक बच्चों में टीबी की समस्या देखने को नहीं मिली है। हमारे देश में शिशु टीकाकरण में बीसीजी के टीके का इस्तेमाल किया जाता है। वैसे तो बीसीजी वैक्सीन की एक डोज बच्चे को जन्म के बाद जितनी जल्दी हो सके लगाने की सलाह दी जाती है।

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शिशुओं को कब लगवाना चाहिए बीसीजी का टीका? (When To Give BCG Vaccine For Newborn in Hindi?)

आमतौर पर शिशुओं को टीबी और दिमागी बुखार से बचाने के लिए बीसीजी का टीका जन्म के तुरंत बाद लगाने की सलाह दी जाती है। इस वैक्सीन की पहली डोज जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाई जानी चाहिए। यह टीका 6 साल से कम उम्र वाले बच्चों को लगाया जा सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि जन्म के बाद अगर आप बच्चे को लेकर ऐसे देशों में ट्रेवल करते हैं जहां पर टीबी का प्रकोप ज्यादा है तो ऐसे बच्चे को जरूर बीसीजी का टीका लगवाना चाहिए। ऐसे बच्चे जिनके घर में टीबी की बीमारी का इतिहास रहा है उन्हें भी जन्म के बाद बीसीजी का टीका जरूर दिया जाना चाहिए। आमतौर पर बीसीजी का टीका जन्म के 6 महीने तक लगाना सही माना जाता है लेकिन अगर किसी कारण से यह टीका बच्चे को नहीं लग पाया है तो उसे 5 साल की उम्र तक यह टीका दिया जा सकता है। हालांकि इससे पहले आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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किन बच्चों को नहीं लगानी चाहिए बीसीजी वैक्सीन? (Who Should Not Have BCG Vaccine?)

वैसे तो बीसीजी की वैक्सीन जन्म के बाद से लेकर 5 साल की उम्र तक के बच्चों को लगाने की सलाह दी जाती है। लेकिन बीसीजी का डोज देने से पहले डॉक्टर्स बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करते हैं और किसी भी तरह की समस्या होने पर यह टीका नहीं दिया जाता है। ऐसे बच्चे जिनमें जन्म से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्या है या जिनका वजन बेहद कम है उन्हें बीसीजी की वैक्सीन नहीं देने की सलाह दी जाती है। इन बच्चों को बीसीजी का टीका नहीं लगवाना चाहिए।

  • जिन बच्चों का वजन जन्म के समय 2000 ग्राम से कम हो।
  • ऐसे बच्चे जिन्हें पहले या टीका देते समय टीबी की बीमारी है।
  • जन्म से रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी समस्या होने पर।
  • एचआईवी से संक्रमित बच्चे को।
  • ऐसे बच्चे जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ है।
  • किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी के शिकार बच्चों को।

बीसीजी वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (BCG Vaccine Side Effects in Hindi)

किसी भी तरह की वैक्सीन लेने के बाद आपके शरीर में कुछ साइड इफेक्ट्स जरूर देखने को मिलते हैं। इसी तरह से ही बीसीजी वैक्सीन लगाने के बाद शिशुओं के शरीर में कुछ साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं। बीसीजी वैक्सीन लगाने के बाद बच्चे को उल्टी और पेट खराब होने की समस्या हो सकती है। बीसीजी वैक्सीन की डोज देने के बाद शिशुओं में ये साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं। 

  • टीके लगाने की जगह पर रिएक्शन।
  • लसिका ग्रंथि पर सूजन।
  • बार-बार पेशाब आना।
  • पेशाब के दौरान दिक्कत होना।
  • स्किन पर रैशेज होना।
  • पेशाब करने पर दर्द होना।
  • सांस लेने में दिक्कत।

अगर शिशुओं में बीसीजी वैक्सीन लगाने के बाद ये लक्षण गंभीर रूप से दिख रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। आमतौर पर वैक्सीन लगवाने के बाद दिखने वाले लक्षण अपने आप खत्म हो जाते हैं। इंजेक्शन लगने के बाद कुछ दिनों तक आपको बच्चे की मालिश करते समय इंजेक्शन वाली जगह पर मालिश नहीं करनी चाहिए। किसी भी तरह की दिक्कत होने पर या जानकारी लेने के लिए आप डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

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