डिमेंशिया का आयुर्वेदिक इलाज: इन जड़ी बूटियों के इस्तेमाल से डिमेंशिया के लक्षणों में आएगी कमी

Herbs for Demendia : डिमेंशिया एक भूलने की समस्या है। आप इसके लक्षणाें में कमी करने के लिए कुछ हर्ब्स का सेवन कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इनके बारे मे

Anju Rawat
Written by: Anju RawatUpdated at: Jul 27, 2021 12:03 IST
डिमेंशिया का आयुर्वेदिक इलाज: इन जड़ी बूटियों के इस्तेमाल से डिमेंशिया के लक्षणों में आएगी कमी

देशभर में लाखाें लाेग डिमेंशिया की समस्या से पीड़ित हैं। इसे मनाेभ्रंश के नाम से भी जाना जाता है। डिमेंशिया काेई बीमारी नहीं है बल्कि एक लक्षणाें के समूह का नाम है। इसमें पीड़ित व्यक्ति की मस्तिष्क की काेशिकाओं काे नुकसान पहुंचने लगता है। जिससे वे अपने दैनिक कार्याें काे भी ठीक से नहीं कर पाता है। लेकिन अगर डिमेंशिया के लक्षणाें में कमी की जाए, ताे व्यक्ति की स्थिति में बदलाव देखने काे मिल सकता है। 

दरअसल, किसी भी व्यक्ति काे डिमेंशिया की बीमारी तब हाेती है, जब अल्जाइमर राेग से मस्तिष्क की काेशिकाएं क्षतिग्रस्त हाे जाती हैं। वैसे ताे अल्जाइमर राेग डिमेंशिया का एक प्रमुख कारण है, लेकिन इसके अलावा भी कई अन्य कारणाें से डिमेंशिया हाे सकता है। यह बीमारी ज्यादातर 65 साल से अधिक उम्र के लाेगाें में देखने काे मिलती है। आप इसके लक्षणाें काे कम करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाें का सहारा ले सकते हैं। इससे आपके लक्षणाें में कमी आएगी और थाेड़ा आराम मिलेगा। आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा से जानें डिमेंशिया के लक्षणाें काे कम करने वाली जड़ी-बूटियाें के बारे में (Ayurvedic Treatment to Cure Dementia) -

डिमेंशिया के लक्षण (Dementia Symptoms)

  • याद्दाश्त कमजाेर हाेना
  • दैनिक कार्याें काे करने में परेशानी
  • साेचने में कठिनाई
  • व्यक्तित्व में बदलाव
  • ध्यान केंद्रित करने में समस्या
  • बार-बार मूड स्विंग हाेना
  • किसी भी चित्र काे पहचानने में दिक्कत हाेना
Ginger

इन जड़ी-बूटियाें से कम करें डिमेंशिया के लक्षण (Herbs to Cure Dementia)

डिमेंशिया से पीड़ित हाेने पर व्यक्ति में कई लक्षण नजर आते हैं। अगर इन लक्षणाें में कमी आती है, ताे इससे पीड़ित की स्थिति में भी सुधार हाे सकता है। इसके लिए आप कुछ जड़ी-बूटियाें का सेवन कर सकते हैं। इनके सेवन से मस्तिष्क की काेशिकाएं क्षतिग्रस्त हाेने से बच सकती है और आपकी याद्दाश्त तेज हाे सकती है।

1. अदरक (Ginger)

अदरक भारतीय घराें में इस्तेमाल हाेने वाला एक सामान्य घटक है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट्स हाेते हैं, जाे कई तरह के राेगाें काे दूर करने में सहायक हाेता है। अदरक डिमेंशिया या मनाेभ्रंश के राेगियाें के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है, क्याेंकि अदरक न्यूराेडिजनरेशन से बचाता है। इसके लिए आप राेजाना अदरक का सेवन कर सकते हैं। अदरक मस्तिष्क की काेशिकाओं के पतन काे राेकने और न्यूरॉन्स बनाने में मदद करता है। इसमें एंटी कौयगुलांट गुण हाेते हैं, जाे रक्त के थक्के जमने से राेकता है। इससे मस्तिष्क की काेशिकाओं में ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है, जिससे मस्तिष्क बेहतर ढंग से काम करना शुरू करता है। अदरक जाेड़ाें के दर्द काे भी ठीक करता है। यह काेलेस्ट्रॉल लेवल और ब्लड शुगर लेवल काे भी कंट्राेल में रखता है। 

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2. वाचा (Vacha)

डिमेंशिया के लक्षणाें में कमी करने के लिए वचा जड़ी-बूटी बेहद उपयाेगी हाेती है। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र काे उत्तेजित करती है। मस्तिष्क के कार्य काे बढ़ावा देता है। वाचा मस्तिष्क काे फिर से जीवंत करता है, जाे डिमेंशिया की वजह से क्षतिग्रस्त हाे जाता है। साथ ही यह मस्तिष्क के कार्य में भी सुधार करता है। वाचा का उपयाेग आयुर्वेद में कई अन्य तरह के राेगाें काे भी दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें लिवर, श्वसन, किडनी आदि शामिल हैं।

शंकपुष्पी (Shankhpushpi)

3. शंकपुष्पी (Shankhpushpi)

याद्दाश्त कमजाेर हाेना या स्मृति हानि डिमेंशिया या मनाेभ्रंश का एक प्रमुख लक्षण हाेता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति का दैनिक कार्य प्रभावित हाेता है। डिमेंशिया मस्तिष्क की काेशिकाओं काे नुकसान पहुंचाता है,  जाे यादाें काे बनाने और पुनर्प्राप्त करने में शामिल हाेते हैं। इसके लिए शंखपुष्पी एक बेहद प्रभावी जड़ी-बूटी है। यह मस्तिष्क के उस हिस्से के कार्य में सुधार करता है, जाे चीजाें काे याद रखने में मदद करता है। शंखपुष्पी थकान और अवसाद में भी कमी करता है। यह पाचन तंत्र के लिए भी एक उपयाेगी जड़ी-बूटी है। डिमेंशिया के लक्षणाें में कमी करने के लिए इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर किया जा सकता है। शंकपुष्पी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हाेता है।

4. ब्राह्मी (Brahmi)

ब्राह्मी को बकोपा मोननेरी भी कहा जाता है। इसे आयुर्वेद में तंत्रिका टॉनिक के रूप में जाना जाता है। यह याद्दाश्त या मेमाेरी काे बढ़ावा देता है। साथ ही चिंता और तनाव भी कम करने में सहायता करता है। ब्राह्मी में चिंता-विराेधी और अवसाद-राेधी गुण हाेते हैं, जिससे डिमेंशिया के लक्षणाें में कमी आती है। ब्राह्मी जड़ी-बूटी मस्तिष्क के स्मृति केंद्र पर कार्य करके इसमें सुधार करती है। इतना ही नहीं यह नसाें की सूजन काे भी दूर करता है। इसें कैंसर विराेधी गुणाें और मिर्गी के इलाज के लिए भी जाना जाता है। ब्राह्मी से स्वास्थ काे कई लाभ मिलते हैं।

अश्वगंधा (Ashwagandha)

5. अश्वगंधा (Ashwagandha)

अश्वगंधा काे विथानिया साेम्निफेरा (Withania Somnifera) के नाम से भी जाना जाता है। यह औषधीय गुणाें से भरपूर हाेता है। आयुर्वेद में इसका उपयाेग कई तरह के राेगाें काे दूर करने के लिए किया जाता है, इसलिए इसे रसायन द्रव भी कहते हैं। अश्वगंधा मस्तिष्क की क्षतिग्रस्त काेशिकाओं की मरम्मत करता है और उन्हें जीवंत बनाता है। साथ ही तंत्रिका काेशिकाओं काे भी नुकसान हाेने से बचाता है। ऐसे में आप डिमेंशिया के लक्षणाें में कमी करने के लिए कुछ दिनाें तक इसका सेवन कर सकते हैं। अश्वगंधा में मस्तिष्क काे बढ़ावा देने वाले गुण पाए जाते हैं। यह याद्दाश्त काे बढ़ाने और व्यक्ति की स्थिति में सुधार करने में सहायक हाेता है। श्वगंधा तनाव और अवसाद में भी कमी करता है।

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6. हल्दी (Turmeric)

भारतीय घराें में हल्दी का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए मसाले के रूप में किया जाता है। हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण हाेते हैं, जाे कई तरह के राेगाें काे दूर करने में मदद करते हैं। अगर हाई ब्लड प्रेशर, काेलेस्ट्रॉल जैसे माध्यमिक विकाराें के कारण हल्दी डिमेंशिया के इलाज में भी भूमिका निभाती है। हल्दी डिमेंशिया के लक्षणाें के समूह में कमी करता है। य़ह नसाें के सूजन काे कम करने में मदद करता है।  इसके सेवन से नींद में सुधार हाेता है। हल्दी में डिमेंशिया के मरीजाें के मूड और याददाश्त को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है।

अगर आप भी डिमेंशिया के लक्षणाें से घिर हुए हैं, ताे इन्हें समय रहते कम करने की काेशिश करें। आप इन आयुर्वेदिक उपचार की मदद से इनमें कमी कर सकते हैं। लेकिन सही इलाज के लिए आपकाे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डिमेंशिया के लक्षण दिखने पर ऊपर बताए गए आयुर्वेदिक उपचार भी आपकाे डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। इससे आपकाे अधिक फायदा मिल सकता है। इस समस्या काे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें, आगे चलकर यह बढ़ सकती है और मस्तिष्क काे हानि पहुंचा सकती है।

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