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प्रीमेन्स्ट्रूअल सिंड्रोम (PMS) से छुटकारा दिलाएंगे ये 8 आयुर्वेदिक उपाय

प्रीमेन्स्ट्रूअल सिंड्रोम (PMS) से छुटकारा से छुटकारा दिलाने में कुछ आयुर्वेदिक उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं, यहां जानें ऐसे 8 आयुर्वेदिक उपाय।

Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarPublished at: Apr 18, 2022Updated at: Apr 18, 2022
प्रीमेन्स्ट्रूअल सिंड्रोम (PMS) से छुटकारा दिलाएंगे ये 8 आयुर्वेदिक उपाय

हम में से ज्यादातर महिलाएं पीरियड्स से खुछ दिन पहले चिड़चिड़ापन, ब्रेस्ट में दर्द या सूजन, पेट दर्द और कमर दर्द जैसी समस्याओं का अनुभव करती हैं। यह प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम (पीएमएस) के कारण (Premenstrual Syndrome Causes In Hindi) होता है। पीएमएस के कारण महिलाओं को हर महीने इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, ऐसे में महिलाओं के दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल आता है कि पीएमएस के लक्षणों (Premenstrual Syndrome Symptoms In Hindi) को कैमे कम करें या इससे कैसे राहत पाएं। महिलाएं पीएमएस से राहत पाने के लिए दवाओं का सहारा लेती हैं, साथ ही कई घरेलु नुस्खे आजमाती हैं लेकिन कुछ खास फायदा देखने को नहीं मिलता।

अब सवाल यह है कि ऐसे में महिलाओं के पास क्या विकल्प है? आयुर्वेदिक चिकित्सक दीक्षा भावसार सवालिया (बीएएमएस, आयुर्वेद) की मानें तो कुछ आयर्वेदिक उपाय पीएमएस से छुटकारा दिलाने के लिए (Ayurvedic Tips for Premenstrual Syndrome In Hindi) बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। इस लेख में हम आपको पीएमएस से छुटकारा दिलाने के लिए 8 आयुर्वेदिक उपाय बता रहे हैं।

प्रीमेन्स्ट्रूअल सिंड्रोम (PMS) से छुटकारा पाने के आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips For Premenstrual Syndrome In Hindi)

  1. किशमिश और बादाम का सेवन करें। रोजाना सुबह खाली पेट 5-6 भीगी हुए किशमिश और 4-5 भीगे हुए बादाम खाएं।
  2. पीरियड्स से 2 सप्ताह पहले बीज का सेवन शुरू करें। पहले सप्ताह में रोजाना 1 चम्मच अलसी के बीज और कद्दू के बीज खाएं। वहीं, दूसरे सप्ताह में 1 चम्मच सूरजमुखी के बीज और 1 चम्मच तलि के बीज का सेवन करें।
  3. मीठे फल खाएं और स्वस्थ फैट का सेवन करें, क्योंकि मीठे फलों की प्रकृति ठंडी होती है। वहीं, गाय का घी, जैतून का तेल, नट्स और बीजों से मिलने वाली स्वस्थ वसा आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करती है साथ ही हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करती है।
  4. मेडिटेशन और प्राणायाम का अभ्यास करें। प्रतिदिन अपने लिए 30 मिनट के लिए सांस संबंधी व्यायाम और मेडिटेशन करें। यह पीएमएस के लिए जिम्मेदार कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है।
  5. शारीरिक रूप से एक्टिव रहें। प्रतिदिन 40 मिनट की शरीरिक गतिविधि जरूर करें (सुबह या शाम को 6 बजे से पहले)। आप पैदल चल सकते हैं, टहल सकते हैं, दौड़ सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं, जिम जा सकते हैं, डांस कर सकते हैं जो भी आपको पसंद है आप वो काम कर सकते हैं।
  6. दिन में एक बार धनिया का पानी पिएं जरूर पिएं। धनिया प्रकृति में शांत करने वाला होता है। यह आपकी आंत को शांत करता है जिसमें लगभग 75% हार्मोन का उत्पादन होता है।
  7. सोते समय नस्य का अभ्यास करें। अपने तंत्रिका तंत्र को आराम देने के लिए यह सबसे अच्छा है। यह सुनिश्चित करता है कि आप अच्छी नींद लें और  जब उठें तो ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करें।
  8. रात में जल्दी सो जाएं। रात को 10 बजे तक सो जाना सबसे अच्छा है। हार्मोनल संतुलन, मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी को बेहतर बनाने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है। रोजाना एक ही समय पर सोने से आपके शरीर को आराम और कायाकल्प करने के लिए पर्याप्त नींद मिलती है जो निश्चित रूप से होमोस्टैसिस को बनाए रखने में मदद करता है।

पीएमएस से छुटकारा पाने के लिए इन 4 चीजों से बचना भी है जरूरी (Things To Avoid In Premenstrual Syndrome In Hindi)

  1. खट्टे, तले हुए और फर्मेंटेड फूड्स का सेवन करने से बचें। खट्टे और तले हुए फूड्स प्रकृति में गर्म होते हैं, वहीं फर्मेंटेड फूड्स सूजन को ट्रिगर करते हैं। इसलिए पीरियड्स से कम से कम 2 सप्ताह पहले इनसे बचा जाना चाहिए।
  2. मीठा भोजन करने से परहेज करें, क्योंकि ज्यादा चीनी वाले फूड्स का सेवन करने से वजन बढ़ता है और सूजन पैदा होती है। यह मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है और हमें शारीरिक रूप से आलसी भी बनाता है। मानसिक रूप से भी यह हमें अधिक मिठाई खाने का आदी बना देता है जिससे पीरियड्स से पहले वजन बढ़ जाता है और पेट में भारीपन आ जाता है। इसलिए पीरियड्स से 10 दिन पहले तक मीठे फूड्स खाने से बचें।
  3. बहुत जाता मेहनत वाला, भारी या थकाने वाले व्यायाम करने से बचें, क्योंकि ऐसा करने से शरीर में वात बढ़ जाता है। जिससे पीरियड्स से पहले अधिक दर्द होता है, साथ ही एंग्जायटी और मूड स्विंग जैसी समस्याएं होती हैं।
  4. देर रात तक न जागें, क्योंकि यह भी शरीर में अतिरिक्त वात को बढ़ावा देता है और पीएमएस के लक्षणों को गंभीर बनाता है।

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