कोरोना के कारण फेफड़ों पर हुआ कितना असर? 6 मिनट के इस वॉक टेस्ट से लगाएं पता

कोरोना वायरस ने आपके फेफड़ों को कितना संक्रमित किया है, इसका पता लगाने के लिए आप 6 मिनट का वॉक टेस्ट कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इसके बारे में

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 19, 2021
कोरोना के कारण फेफड़ों पर हुआ कितना असर? 6 मिनट के इस वॉक टेस्ट से लगाएं पता

देश में कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave of Covid in India) से लोगों को काफी परेशान किया है। भले ही कोरोना के मामलों में कमी हो रही है, लेकिन अभी भी हर रोज हजारों की संख्या में लोगों की मौत हो रही हैं। क्योंकि हालात इतने गंभीर है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन, बैड और वेंटिलर की भारी कमी हो रखी है। ऐसे में ज्यादातर लोगों का इलाज घर से ही चल रहा है। अस्पताल में गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है। कोरोना वायरस ज्यादातर फेफड़ों को संक्रमित करता है, ऐसे में होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को अपने फेफड़ों की जांच करने के लिए मेडिकल एक्सपर्ट्स ने 6 मिनट वॉक टेस्ट (6 Minute Walk Test) करने की सलाह दी है। जिससे आप अपने शरीर में घट रहे ऑक्सीजन लेवल का अंदाजा लगा सकते हैं और समय पर मेडिकल सहायता या चिकित्सक की सलाह ले सकते हैं, जिससे स्थिति को संभाला जा सके। फ्लोरेस हॉस्पिटल, गाजियाबाद के एमडी और सीनियर फिजिशियन डॉक्टर एम.के.सिंह (MD and Senior Physician Doctor MK Singh of Flores Hospital, Ghaziabad) से जानते हैं कि ये 6 मिनट की वॉक है क्या और इसे कैसे किया जाता है? (What is 6 Minute Walk Test and How to do This)

walk

डॉक्टर एम.के.सिंह बताते हैं कि होम आइसोलेशन (Covid Patients in Home Isolation) में रहने वाले मरीजों को भी समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच करने की जरूरत होती है। ताकि थोड़ी भी दिक्कत होने पर वे डॉक्टर से कंसल्ट कर सकें। अगर आप होम आइसोलेशन में हैं, तो 6 मिनट का वॉक टेस्ट आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इसकी मदद से आपको अपने ऑक्सीजन लेवल (Oxygen Level) का सही पता चल सकता है। क्योंकि इस समय कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन उनका ऑक्सीजन लेवल कम हुआ होता है। हैप्पी हाइपोक्सिया की स्थिति में अकसर ऐसा होता है। इसलिए 6 मिनट की वॉक से आपको अपना ऑक्सीजन लेवल पता चल सकेगा और आप अपने स्वास्थ्य की सही से निगरानी कर सकेंगे।   

इसे भी पढ़ें - क्या सच में फिटकरी के पानी से ठीक हो सकते हैं कोरोना के मरीज? डॉक्टर से जानें वायरल वीडियो की सच्चाई

क्या है 6 मिनट का वॉक टेस्ट (6 Minute Walk Test)

डॉक्टर एम.के.सिंह कहते हैं कि 6 मिनट का वॉक टेस्ट होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए होता है। इसमें होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना मरीजों को 6 मिनट की वॉक करके अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करना होता है। इसे दिन में कम से कम 2 बार करना होता है, जिससे मरीज को अपने स्वास्थ्य के बारे में सटीक जानकारी मिल सके। इसमें वॉक करने से पहले और बाद में ऑक्सीजन लेवल को चेक किया जाता है। अगर वॉक करने के बाद ऑक्सीजन लेवल 95 से कम होता है, तो ऐसे में डॉक्टर से कंसल्ट करने की जरूरत होती है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें की पहले और बाद की ऑक्सीजन रीडिंग 3 प्रतिशत से ज्यादा कम नहीं होनी चाहिए। 

  • - 6 मिनट का वॉक टेस्ट होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए होता है।
  • - इसे दिनभर में कम से कम दो बार किया जा सकता है।
  • - वॉक करने से पहले और बाद में दोनों बार अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करें। 
  • - जिन कोरोना मरीजों में हल्के लक्षण हैं, उन्हें भी इसे जरूर करना चाहिए। अपने ऑक्सीजन लेवल को बार-बार चेक करते रहना चाहिए।
  • - डॉक्टर कहते हैं कि अगर कोई बुजुर्ग होम आइसोलेशन में है, तो वे 6 की जगह 3 मिनट की वॉक कर सकते हैं।
  • - महाराष्ट्र के कोल्हापुर और पुणे में होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए इसे जरूरी कर दिया गया है।
pulse

कैसे किया जाता है 6 मिनट का वॉक टेस्ट (How to do 6 Minute Walk Test)

होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमितों को डॉक्टर 6 मिनट वॉक टेस्ट करने की सलाह देते हैं। इसके लिए मरीज को सबसे पहले अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करना होता है और इसे याद रखना होता है। इसके बाद अपने ही कमरे में 6 मिनट लगातार चलना होता है, फिर इसके बाद ऑक्सीजन लेवल चेक करना होता है। अगर इस वॉक के बाद आपका ऑक्सीजन लेवल 95 तक या इससे नीचे होता है, तो ऐसे में आपको तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत होती है। आपकी पहली रीडिंग और दूसरी रीडिंग में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट नहीं होनी चाहिए, अगर होती है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

  • - 6 मिनट का यह वॉक टेस्ट फेफड़ों के हाल बताने या शरीर में ऑक्सीजन लेवल को बताने में मदद करता है।
  • - वॉक करने से पहले और बाद में आपके ऑक्सीजन लेवल में जितना अंतर होता है, उसके हिसाब से आप समझ सकते हैं कि आपके फेफड़े कितने संक्रमित है। अगर दोनों रीडिंग में 3 प्रतिशत से ज्यादा का अंतर होता है, तो इसका मतलब है कि आपको फेफड़े काफी संक्रमित हो चुके हैं।
  • - पहली रीडिंग और दूसरी रीडिंग में तीन फीसदी से ज्यादा गिरावट जोखिम भरा हो सकता है।
  • - यह टेस्ट मरीज को दिन में 2-3 बार जरूर करना चाहिए।

6 मिनट वॉक टेस्ट का फायदा (Benefits of 6 Minute Walk Test)

  • - 6 मिनट वॉक टेस्ट की मदद से आप पता लगा सकते हैं कि आपके फेफड़ों पर कोरोना संक्रमण का कितना असर हुआ है।
  • - इसमें वॉक से पहले और बाद में दो बार ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाता है, ऐसे में इन दोनों के बीच का जितना ज्यादा अंतर होता है, उतने की आपके फेफड़े संक्रमित हो चुके होते हैं।
  • - इस वॉक टेस्ट से आप अपने फेफड़ों और ऑक्सीजन लेवल का सटीक पता लगा सकते हैं।

अगर आप भी कोरोना संक्रमित हैं और होम आइसोलेशन में हैं, तो आपको भी 6 मिनट का वॉक टेस्ट करके जरूर देखना चाहिए। अपने स्वास्थ्य की जानकारी अपने डॉक्टर को देते रहना चाहिए। इसके साथ ही अगर ऑक्सीजन लेवल में कमी आती है, तो भी अपने डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर की सलाह पर ही आपको अपना इलाज करवाना चाहिए।  

Read More Articles on Miscellaneous in Hindi

Disclaimer