नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के बारे आपको जरूर पता होनी चाहिए ये 5 बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 14, 2018
Quick Bites

  • नवजात शिशु रोकर ही आपके साथ अपना संवाद स्थापित करता है।
  • जन्‍म के 10 दिन बाद बच्‍चे को हल्‍के गरम पानी से नहला सकते हैं।
  • जन्‍म के 6 महीने तक बच्‍चे को केवल स्‍तनपान कराना चाहिए।

नवजात शिशुओं की देखभाल करना आसान नहीं होता है। नवजात शिशुओं को हर समय देखभाल की जरूरत पड़ती है क्योंकि वो सभी तरह के कामों के लिए आप पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कई बार शिशु की कुछ आदतों से नई मांओं को झल्लाहट होती है और उन्हें गुस्सा आता है। लेकिन फिर भी मां पूरे समर्पण के साथ शिशु का लालन-पालन करती है। दरअसल नवजात शिशुओं की आदतों और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बातों को आपको पहले ही जान लेना चाहिए, ताकि बाद में आपको किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

शिशु की त्वचा हो जाती है जल्दी गंदी

जन्‍म के 10 दिन बाद बच्‍चे को हल्‍के गरम पानी से नहला सकते हैं। जैसे-जैसे बच्‍चा बड़ा होता जाता है वह फर्श पर चलने की प्रैक्टिस करता है ऐसे में उसकी त्‍वचा गंदी हो जाती है और ऐसे में त्‍वचा का संक्रमण फैलने की संभावना भी रहती है। इसलिए बच्‍चे को नहलायें, नहलाने से पहले शरीर की बेबी ऑयल से जरुर मालिश करें। त्‍वचा को हमेशा नमी देती रहें क्‍योंकि साबुन की वजह से बच्‍चे की त्‍वचा रूखी हो सकती है।

इसे भी पढ़ें:- शिशु के सोते वक्त जरूर गौर करें ये 3 चीजें, कभी नहीं पड़ेगा बीमार

बेवजह नहीं रोता आपका शिशु

नवजात शिशु रोकर ही आपके साथ अपना संवाद स्थापित करता है। उसमें इतनी समझ नहीं होती है कि वह अपनी ज़रूरतों की प्राथमिकता पहचान सके। इसलिए उसे जब भी कोई बात नापसंद होती है तो वह रो कर ही अपनी नाराज़गी का इज़हार करता है। शिशु का रोना नई मां के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है। आमतौर पर भूख लगने, नैपी गीली होने, कोई नया चेहरा देखने या नई आवाज़ सुनने और बड़ों द्वारा गोद में उठाए जाने का तरीका नापसंद होने पर वह रोकर अपना विरोध प्रदर्शित करता है। कभी-कभी बच्चे थकान की वजह से भी रोते हैं। अगर आपका बच्चा गहरी नींद से चौंककर जागने के बाद रोने लगे तो सबसे पहले उसकी नैपी चेक करें कि कहीं वह गीलेपन की वजह से तो नहीं रो रहा। ये कुछ ऐसे सामान्य लक्षण हैं, जिन्हें आसानी से पहचानकर आप यह अंतर समझ सकती हैं कि आपका बच्चा किस कारण से रो रहा है।

शिशु के शरीर की तापमान की जरूरतें हैं अलग

नवजात के शरीर का तापमान सामान्‍य रखने के लिए उसे कपड़े से लपेटना जरूरी है, इसके आलावा बच्‍चे को चौंका देने वाले झटके भी आते हैं इससे बचाने के लिए भी उनको लपेटें। शिशु को लपेटने से पहले यह जांच लीजिए कि शिशु कहीं भूखा या गीला तो नहीं है। यह सुनिश्चित करें कि आपने उसका चेहरा या सिर तो नहीं ढक दिया है, क्योंकि इससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है और उसके शरीर का तापमान सामान्‍य से अधिक हो सकता है। यदि आप अपने शिशु को लपेटती हैं तो सामान्यत: उसे ऊपर एक कम्बल या चादर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

इसे भी पढ़ें:- बचपन से रखें इन 3 बातों का ध्यान, तेज होगा बच्चे का आईक्यू लेवल

शिशुओं की नींद के बारे में

जन्‍म के 6 महीने तक बच्‍चे को केवल स्‍तनपान कराना चाहिए। यह बहुत ही शानदार तरीका है बच्‍चे को सुलाने का जब आपकी गोद में ही आपका लाडला छपकी ले ले। शुरूआत के 3-4 महीने तक बच्‍चा दिन और रात में फर्क नहीं कर पाता है, इसलिए बच्‍चे को इस दौरान दिन और रात दोनों समय बराबर मात्रा में स्‍तनपान करायें। जब बच्‍चा सो रहा हो तब उसे स्‍तनपान न करायें। जब बच्‍चे का पेट खाली हो जायेगा तो वह खुद नींद से जाग जायेगा ऐसे में उसे स्‍तनपान कराकर सुलाइए।

मालिश जरूर करें

बच्‍चों को मालिश बहुत जरूरी है, बच्‍चों की मालिश कीजिए। लेकिन मालिश के वक्‍त तेल का चयन करते वक्‍त ध्‍यान रखें। बहुत ज्यादा सुगंधित तेलों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि कुछ सुगंधों से त्वचा में एलर्जी या खुजली हो सकती है। 1 साल तक के बच्‍चों को सरसों के तेल से मालिश न करें।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Newborn Care In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1304 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK