भारत में 27.5 मिलियन कपल को नहीं मिल पाता पेरेंट्स बनने का सुख

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 16, 2018

शादी के बाद हर कपल की पहली चाहत होती है कि वो जल्द से जल्द एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दें। एक ताजा रिसर्च में ये इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में करीब 27.5 मिलियन कपल को पेरेंट्स बनने का सुख नहीं मिल पाता है। बेंग्लुरु स्थित एक मेडिकल टेक्नॉलोजी कम्पनी 'इनीटो' ने यह शोध किया है। डाटा के मुताबिक भारत में 10 से 15 प्रतिशत लोग अपनी संतान का सुख नहीं भोग पा रहे हैं। यानि कि करीब 27.5 मिलियन लोग ऐसे हैं जो इस तरह की दिक्कत को सामना कर रहे हैं। 

गर्भधारण न हो पाने के कारण

गर्भधारण न कर पाने के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर यह समस्या पुरुष में आवश्यकता से कम शुक्राणुओं के निर्माण से जुड़ी होती है। लेकिन हमारी दिनचर्या व आदतें भी फर्टिलिटा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

सही समय है सबसे जरूरी

गर्भधारण के लिए सही समय ही सब कुछ होता है। डॉक्टर बताते हैं कि कोई व्यक्ति मध्य चक्र के दौरान सबसे अधिक फर्टाइल होते हैं और इस दौरान शुक्राणु 24 घंटे तक के लिए जीवित रहते हैं। गर्भ धारण करने के लिए मासिक चक्र का सबसे अच्छा समय मध्य चक्र की अवधि होता है (लगभग 11 दिन से 19 वें दिन तक)। 

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खराब डाइट भी है जिम्मेदार

आजकल भागदौड़ भरी जिदंगी में किसी के पास खुद के लिए वक्त नहीं रह गया है। जंक फूड का बढ़ता सेवन, एक्सरसाइज और योग का अभाव भी इन्फर्टिलिटी का कारण बनती है। आपने भी देखा होगा कि आजकल न सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाएं भी एल्कोहल और सिगरेट का काफी शौक रखती हैं। ये आदतें भयानक रूप से इन्फर्टिलिटी के लिए जिम्मेदार साबित होती हैं।

ये भी है एक वजह

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में होने वाली बहुत ही आम समस्‍या है। आमतौर पर ये समस्या 30 साल से ऊपर की महिलाओं में पाई जाती थी मगर आजकल ये कम उम्र की लड़कियों को भी परेशान कर रहा है। पीसीओएस महिला में होने वाली एक ऐसी समस्‍या हैं जिसमें अंडाशय में सिस्ट यानी गांठ आ जाती है। इसे मल्टीयसिस्टिक ओवरियन डिजीज भी कहा जाता है।

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अंडडिबों और हार्मोंस में गड़बड़ी इस बीमारी के मूल कारण होते हैं। यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है। पीसीओएस के लक्षणों पर अक्‍सर लड़कियों का ध्‍यान नहीं जाता है। चेहरे पर बाल उग आना, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं। इसके अलावा त्वचा संबंधी रोग जैसे अचानक भूरे रंग के धब्बों का उभरना या बहुत ज्यादा मुंहासे भी हो सकते हैं।

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