प्रेग्नेंसी में सेलेब्स लेती हैं ऐसी डाइट, मां के साथ शिशु का भी होता है बेहतर विकास

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 11, 2018
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Quick Bites

  • प्रेग्नेंसी में एक स्त्री को 1800 कैलरीज़ की आवश्यकता होती है।
  • आयरन युक्त पदार्थों के अधिक मात्रा में सेवन की ज़रूरत होती है।
  • प्रेग्नेंसी में बार-बार यूरिन पास करने जैसी परेशानी भी हो सकती है।

हर स्त्री की यही इच्छा होती है कि वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे। इस इच्छा को पूरी करने के लिए गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार लेना ज़रूरी है। गर्भस्थ शिशु का विकास मां के सही डाइट प्लैन पर ही निर्भर करता है। मशहूर आहार विशेषज्ञ सिमरन सैनी कहती हैं कि डाइट में सामान्यत: एक स्त्री को 1800 कैलरीज़ की आवश्यकता होती है लेकिन गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु के लिए 1800 से अधिक कैलरीज़ की ज़रूरत होती है। फूड एंड न्यूट्रिशन बोर्ड के अनुसार, गर्भावस्था में स्त्री को 350 अतिरिक्त कैलरी लेनी चाहिए। यानी सामान्यत: गर्भवती स्त्री को अपने आहार से लगभग 2200 से 2300 कैलरीज़ प्राप्त होनी चाहिए। गर्भवती स्त्री की थाली में पर्याप्त मात्रा में विटमिंस, मिनरल्स, फाइबर, आयरन, जिंक और कैल्शियम उचित मात्रा में होने चाहिए। आज हम आपको आहार विशेषज्ञ सिमरन सैनी से बातचीत के आधार प्रेग्नेंसी में एक महिला के लिए उचित डाइट प्लॉन बता रहे हैं।

प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनें

गर्भावस्था की पहली तिमाही में आपको फॉलिक एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही फॉलिक एसिड सप्लीमेंट्स भी लेने चाहिए। आयरन युक्त पदार्थों के अधिक मात्रा में सेवन की ज़रूरत होती है, जो आपके शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने में मदद करते हैं। इस तिमाही में महसूस होने वाली मॉर्निंग सिकनेस से निपटने के लिए विटमिन बी-6 लेने की ज़रूरत होती है। आपको कैफीन युक्त चीज़ों का सेवन कम कर देना चाहिए। पहली तिमाही में दिया गया डाइट चार्ट सभी आवश्यक पोषक तत्वों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। 

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इन चीजों से न घबराएं

इन दिनों आपको बेवजह ज्य़ादा थकान महसूस हो सकती है क्योंकि इस समय शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में, आपको आराम की ज़रूरत है। इसके अलावा, बार-बार यूरिन पास करने जैसी परेशानी भी हो सकती है, जो कि बहुत ही आम है। ज्य़ादातर गर्भवती स्त्रियों को वॉमिटिंग भी एक समस्या है।

ब्रेकफस्ट (9 बजे)

3 स्लाइस ब्राउन ब्रेड/एक बोल ओट्स/दलिया/साबुत अनाज, 30 ग्राम/पोहा/उपमा/2 स्टफ्ड चपाती के साथ टोंड मिल्क/ 1 कटोरी  दही + एक एग व्हाइट/25 ग्राम स्प्राउट्स एक कप चाय/150 मिलीलीटर दूध + 1 पीस ढोकला/भेल/30 ग्राम रोस्टेड चना/2 डायजेस्टिव बिस्किट्स

डिनर (8 बजे)

ओमेगा-3 फैटी एसिड से बने खाद्य पदार्थ शिशु के मस्तिष्क-विकास के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। कैल्शियम और विटमिन डी शिशु के दांत व हड्डियों के विकास में फायदेमंद हैं। स्वस्थ त्वचा व साफ रक्त के लिए बीटा कैरोटीन बहुत महत्वपूर्ण होता है, साथ ही आयरन की ज़रूरत आपको पूरे नौ महीने होती है। आयरन से युक्त खाद्य पदार्थों के साथ चाय या कैफीन का सेवन न करें क्योंकि उसमें मौज़ूद टैनिन आपके शरीर में आयरन के अवशोषण को कठिन बनाता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है दूसरे ट्राइमेस्टर का डाइट चार्ट।

वज़न का ध्यान

गर्भावस्था के दौरान सामान्य से लगभग दस से तेरह किलो तक वज़न बढऩा चाहिए। हर ट्राइमेस्टर के दौरान एक से दो किलो वज़न बढऩा सही माना जाता है। एक्सपर्ट के अनुसार रोज़ाना वॉक पर जाएं और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ अवश्य करें।

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किससे कितना फायदा

प्रेग्नेंसी के लिए ज़रूरत कुल 1800 कैलरीज़ + (170 एक्स्ट्रा) +15 ग्राम प्रोटीन + 1000 एमजी कैल्शियम+2 सर्विंग्स विटमिन सी रिच फूड + 400 एमजी फॉलिक एसिड + 8 ग्लास लिक्विड + 35 एमजी आयरन आपको ऊर्जा व शिशु के विकसित होने के लिए पानी के अलावा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। साबुत अनाज से बने सीरियल्स व दालें आहार में शामिल करें। फेटल टिश्यू के विकास के लिए नियमित रूप से दूध पीना ज़रूरी है, प्रतिदिन नाश्ते और डिनर के बाद दिन भर में कुल 750 मिलीलीटर दूध को डाइट में शामिल करें।

50 ग्राम पनीर और एग व्हाइट का सेवन करने से शिशु के अंदरूनी अंगों का विकास सही ढंग से होता है। खून के स्तर के लिए नॉन वेज का सेवन करें। बीन्स और दो से तीन कटोरी दाल/स्प्राउट्स/सोया के सेवन से प्लेसेंटा विकसित होने में मदद मिलती है। शिशु के मस्तिष्क को विकसित करने के लिए 20 ग्राम नट्स/5-6 भीगे हुए बादाम + 1-2 अखरोट रोज़ाना खाना ज़रूरी है। शिशु के दांत व उसके टेस्ट बड्स के लिए प्रोसेस्ड चीज़ व साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जि़यां, एग योक खाएं। शिशु के दांत व हड्डियों के विकास के लिए स्ट्रॉबेरीज़ लें। साथ ही मेटाबॉलिक प्रोसेस के लिए खरबूजा व शिमला मिर्च का सेवन करें। शिशु में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स के रिस्क को कम करने के लिए हरी सब्जि़यां, सिट्रस फूट्स, जूस, साबुत अनाज, ब्रेड्स, लीवर, ड्राइड बीन्स और मटर का सेवन अधिक करें। फेटस सेल्स को बढ़ाने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पिएं।

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