क्या आपको सामान्य से अधिक पसीना आता है?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 18, 2014
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Quick Bites

  • शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए आता है पसीना।
  • हाइपरहाइड्रोसिस के कारण के कारण भी ऐसे हो सकता है।
  • अधिक पसीना हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
  • इस समस्या से निपटने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें।

गर्मियों के मौसम में पसीना आना स्वाभाविक है। और पसीना आना शरीर के लिए सेहतमंद भी है। लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक पसीना आता है उन्हें डीहाइड्रेशन या नमक की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती है। जी हां बहुत ज्यादा पसीना आना वैसे तो कोई बीमारी नहीं, लेकिन कभी-कभी इसके पीछे स्वेट ग्लैंड में गड़बड़ी, स्ट्रेस, हार्मोनल बदलाव, मसालेदार डाइट, अधिक दवाएं, मौसम और मोटापे जैसे कारण हो सकते हैं। बहुत अधिक पसीना आने की स्थिति को हाइपरहाइड्रोसिस भी कहा जाता है।

क्यों आता है पसीना

हमें पसीना इसलिए आता है ताकि हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। क्योंकि हमारे शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फैरनहाइट के आसपास ही रहना चाहिए। इसे नियंत्रण में रखने के लिए हमारे शरीर में कोई 25 लाख पसीने की ग्रंथियां हैं। ये ग्रंथियां एयर कंडीशनिंग का काम करती हैं। जब गर्मी बहुत बढ़ जाती है (चाहे वह बाहरी कारणों से हो या खान-पान की वजह से), तो शरीर को ठंडा करने के लिए इन ग्रंथियों से पसीने की बूंदें निकलना शुरू हो जाती हैं। जब पसीना हवा में सूखता है तो ठंडक पैदा होती है और हमारे शरीर का तापमान कम हो जाता है।

क्यों जरूरी है पसीना आना  

अलग-अलग लोगों की पसीने संबंधी जरूरत अलग-अलग होती है। किसी को कम पसीना आता है तो किसी को ज्यादा। इसलिये विशेषज्ञ बताते हैं कि पसीने की कोई एक निश्चित मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती। पसीना शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों जैसे एल्कोहल, कोलेस्ट्रॉल और नमक की अतिरिक्त मात्रा को बाहर करता है। पसीने में प्राकृतिक रूप से एंटी-माइक्रोबियल पेप्टाथाइड होता है, जो टीबी और दूसरे हानिकर रोगाणुओं से रक्षा करता है।

 

Sweating In Hindi

 

पसीना आने की प्रक्रिया का संबंध केवल बाहरी नहीं, आंतरिक कारकों से भी होता है। चिंता, डर व तनाव आदि में भी त्वचा से पसीना निकलता है। इसके अलावा यौवनावस्था आरंभ होने पर शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में करीब 30 लाख पसीने वाली ग्रंथियां कसक्रीय हो जाती हैं। ऐसा सभी के साथ होता है। लेकिन हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों में सामान्य लोगों से अधिक पसीना आता है। उन पर मूड और मौसम का फर्क नहीं पड़ता। और जब शरीर से निकलने वाला पसीना जब बैक्टीरिया के संपर्क में आता है तो शरीर से दुर्गंध आती है।

हाइपरहाइड्रोसिस के कारण

हाइपरहाइड्रोसिस नर्वस सिस्टम से जुड़ा यह एक सामान्य डिसॉर्डर है। इसे तीन भागों में बांटा जा सकता है - नर्वस सिस्टम, इमोशनल व हार्मोनल बदलाव व बाहरी पर्यावरण। जो लोग हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित होते हैं, उनमें पसीने की ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इसके कारण ज्यादा पसीना आने लगता है। तकरीबन 7 से 8 प्रतिशत भारतीय अधिक पसीना आने की समस्या से पीड़ित हैं। हथेलियों और तलवों में अधिक पसीना आने को पालमोप्लोंटर हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। इसके लक्षण बचपन में ही दिखई देने लगते हैं। हाइपरहाइड्रोसिस में शरीर को ठंडक देने की प्रक्रिया अति सक्रिय हो जाती है। इस कारण सामान्य से चार से पांच गुना अधिक पसीना आता है। गर्म मौसम, अधिक शारीरिक श्रम, भावनात्मक समस्याओं, हार्मोनल बदलाव, मेनोपॉज, डायबिटीज, हाइपरथायरॉइड, मोटापा, निकोटीन, कैफीन व तले और मसालेदार भोजन का सेवन करना हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या को और बढ़ावा देता है।   


विशेषज्ञ और डॉक्टर्स बताते हैं कि एमबीबीएस कोर्स की ज्यादातर पुस्तकों में इस बीमारी के बारे में एक पैराग्राफ से अधिक का जिक्र नहीं मिलता। इसलिए ज्यादातर डॉक्टर इस बीमारी और इससे मरीजों को होने वाली मानसिक पीड़ा से ठीक तरह से वाकिफ नहीं होते। लोग इसके मरीजों को अकसर सायकायट्रिस्ट के पास ले जाते हैं। आसपास के लोग भी मरीज के प्रति सहानुभूति दिखाने की बजाय उसका मजाक उड़ाते हैं। इससे मरीज आत्मविश्वास खो देता है और उसे भारी मानसिक त्रासदी झेलता है।

 

Sweating In Hindi

 

हृदय संबंधी समस्या का संकेत

बिना किसी काम और एक्‍सरसाइज के सामान्‍य से अधिक पसीना आना हृदय की समस्याओं की पूर्व चेतावनी संकेत हो सकते हैं। दरअसल अवरुद्ध धमनियों के माध्यम से खून को दिल तक पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जिससे शरीर को अतिरिक्त तनाव में शरीर के तापमान को सामान्‍य बनाए रखने के लिए अधिक पसीना आता है। अगर आपको बहुत अधिक पसीना आता है और चिपचिपी त्वचा का अनुभव होता है तो तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

साफ-सफाई का ध्यान रखें

पसीना अधिक आने की समस्या होने पर साफ सफाई का खास खयाल रखें। इससे पसीने को रोकने में बहुत मदद मिलती है। इससे पर्सनल हाइजीन होती है और आपकी त्‍वचा भी संक्रमण और बीमारी से बचती है। जब भी कोई कपड़ा पहने तो उससे पहले अपने अंडरआर्म को सुखा लें। इससे कम पसीना आएगा। ठीक प्रकार से नहाएं और गर्मियों के मौसम में रोजाना दो बार नहाएं।

डाइट का खयाल रखें

टमाटर का जूस लें। प्रतिदिन एक बार एक कप टमाटर का जूस लेने से अधिक पसीने आने की समस्या से राहत मिलती है। इसके अलावा ग्रीन टी पियें, इससे न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर रहहती है बल्कि यह पसीने को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है। हां पानी अधिक से अधिक पिएं। ताकि पसीने की दुर्गंध से आपको छुटकारा मिल सके और शरीर भी हाइड्रेट रहे। ध्यार रहे कि स्ट्राबेरी, अंगूर और बादाम आदि में सिलिकॉन अधिक मात्रा में होता है जिससे पसीना अधिक बनता है। कोशिश करें कि डाइट में इन्हें कम ही लें।

 

इन सब उपायों को अपनाकर आप अधिक पसीना आने की समस्‍या का सामना कर सकते हैं। लेकिन, इसके बावजूद अगर आपकी समस्‍या कम न हो, तो आपको एक बार अपने डॉक्‍टर से जरूर संपर्क करना चाहिये।

 

 

 


गर्मियों के मौसम में पसीना आना स्वभाविक है और शरीर के लिए सेहतमंद भी, लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक पसीना आता है

उन्हें डीहाइड्रेशन या नमक की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती है। जी हां बहुत ज्यादा पसीना आना वैसे तो कोई बीमारी नहीं, लेकिन

कभी-कभी इसके पीछे स्वेट ग्लैंड में गड़बड़ी, स्ट्रेस, हार्मोनल बदलाव, मसालेदार डाइट, अधिक दवाएं, मौसम और मोटापे जैसे कारण हो

सकते हैं। बहुत अधिक पसीना आने की स्थिति को हाइपरहाइड्रोसिस भी कहा जाता है।


क्यों आता है पसीना
हमें पसीना इसलिए आता है ताकि हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। क्योंकि हमारे शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फैरनहाइट के

आस-पास ही रहना चाहिए, इसे नियंत्रण में रखने के लिए हमारे शरीर में कोई 25 लाख पसीने की ग्रंथियां हैं। ये ग्रंथियां एयर कंडीशनिंग

का काम करती हैं। जब गर्मी बहुत बढ़ जाती है (चाहे वह बाहरी कारणों से हो या खान-पान की वजह से), तो शरीर को ठंडा करने के

लिए इन ग्रंथियों से पसीने की बूंदें निकलना शुरू हो जाती हैं। जब पसीना हवा में सूखता है तो ठंडक पैदा होती है और हमारे शरीर का

तापमान कम हो जाता है।


क्यों जरूरी है पसीना आना   
अलग-अलग लोगों की पसीने संबंधी जरूरत अलग-अलग होती है (किसी को कम आता है तो किसी को ज्यादा), इसलिये विशेषज्ञों बताते

हैं कि पसीने की कोई एक निश्चित मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती। पसीना शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों जैसे एल्कोहल,

कोलेस्ट्रॉल और नमक की अतिरिक्त मात्रा को बाहर करता है। पसीने में प्राकृतिक रूप से एंटी-माइक्रोबियल पेप्टाथाइड होता है, जो टीबी

और दूसरे हानिकर रोगाणुओं से रक्षा करता है।


पसीना आने की प्रक्रिया का संबंध केवल बाहरी नहीं, आंतरिक कारकों से भी होता है। चिंता, डर व तनाव आदि में भी त्वचा से पसीना

निकलता है। इसके अलावा यौवनावस्था आरंभ होने पर शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में करीब 30 लाख पसीने

वाली ग्रंथियां कसक्रीय हो जाती हैं। ऐसा सभी के साथ होता है, हां बस हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों में सामान्य लोगों से अधिक

पसीना आता है। उन पर मूड और मौसम का फर्क नहीं पड़ता। और जब शरीर से निकलने वाला पसीना जब बैक्टीरिया के संपर्क में आता

है तो शरीर से दुर्गंध आती है।     


हाइपरहाइड्रोसिस के कारण
हाइपरहाइड्रोसिस एक प्रकार की नर्वस सिस्टम से जुड़ा यह एक सामान्य डिसॉर्डर है। इसे तीन भागों में बांटा जा सकता है - नर्वस

सिस्टम, इमोशनल व हार्मोनल बदलाव व बाहरी पर्यावरण। जो लोग हाइपरहाइड्रोसिस से पीड़ित होते हैं, उनमें पसीने की ग्रंथियां अधिक

सक्रिय हो जाती हैं, जिसके कारण ज्यादा पसीना आता है। तकरीबन 7 से 8 प्रतिशत भारतीय अधिक पसीना आने की समस्या से पीड़ित

हैं। हथेलियों और तलवों में अधिक पसीना आने को पालमोप्लोंटर हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। इसके लक्षण बचपन में ही दिखई देने

लगते हैं। हाइपरहाइड्रोसिस में शरीर को ठंडक देने की प्रक्रिया अति सक्रिय हो जाती है, जिस कारण सामान्य से चार से पांच गुना

अधिक पसीना आता है। गर्म मौसम, अधिक शारीरिक श्रम, भावनात्मक समस्याओं, हार्मोनल बदलाव, मेनोपॉज, डायबिटीज,

हाइपरथायरॉइड, मोटापा, निकोटीन, कैफीन व तले और मसालेदार भोजन का सेवन करना हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या को और बढ़ावा

देता है।    


विशेषज्ञ और डॉक्टर्स बताते हैं कि एमबीबीएस कोर्स की ज्यादातर पुस्तकों में इस बीमारी के बारे में एक पैराग्राफ से अधिक का जिक्र

नहीं मिलता। इसलिए ज्यादातर डॉक्टर इस बीमारी और इससे मरीजों को होने वाली मानसिक पीड़ा से ठीक तरह से वाकिफ नहीं होते।

लोग इसके मरीजों को अकसर सायकायट्रिस्ट के पास ले जाते हैं। आस-पास के लोग भी मरीज के प्रति सहानुभूति दिखाने की बजाय

उसका मजाक उड़ाते हैं। इससे मरीज आत्मविश्वास खो देता है और उसे भारी मानसिक त्रासदी झेलता है।


हृदय संबंधी समस्या का संकेत
बिना किसी काम और एक्‍सरसाइज के सामान्‍य से अधिक पसीना आना हृदय की समस्याओं की पूर्व चेतावनी संकेत हो सकते हैं।

दरअसल अवरुद्ध धमनियों के माध्यम से खून को दिल तक पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जिससे शरीर को

अतिरिक्त तनाव में शरीर के तापमान को नीचा बनाए रखने के लिए अधिक पसीना आता है। अगर आपको बहुत अधिक पसीना आता है

और चिपचिपी त्वचा का अनुभव होता है तो तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।   


साफ-सफाई का ध्यान रखें
पसीना अधिक आने की समस्या होने पर साफ सफाई का खास खयाल रखें। इससे पसीने को रोकने में बहुत मदद मिलती है। इससे

पर्सनल हाइजीन होती है और आपकी त्‍वचा भी संक्रमण और बीमारी से बचती है। जब भी कोई कपड़ा पहने तो उससे पहले अपने

अंडरआर्म को सुखा लें। इससे कम पसीना आएगा। ठीक प्रकार से नहाएं और गर्मियों के मौसम में दो बार नहाएं।


डाइट का खयाल रखें
टमाटर का जूस लें। प्रतिदिन एक बार एक कप टमाटर का जूस लेने से अधिक पसीने आने की समस्या से राहत मिलती है। इसके

अलावा ग्रीन टी पियें, इससे न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर रहहती है बल्कि यह पसीने को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है।
हां पानी अधिक से अधिक पिएं। ताकि पसीने की दुर्गंध से आपको छुटकारा मिल सके और शरीर भी हाइड्रेट रहे। ध्यार रहे कि स्ट्राबेरी,

अंगूर और बादाम आदि में सिलिकॉन अधिक मात्रा में होता है जिससे पसीना अधिक बनता है। कोशिश करें कि डाइट में इन्हें कम ही

लें।
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