शरीर के ये 5 लक्षण देते हैं गॉलब्‍लैडर में स्‍टोन होने के संकेत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 19, 2018
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इस बीमारी के बारे में जानने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि हमारे शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग काम कैसे करता है? यह पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लिवर और छोटी आंत के बीच पुल की तरह काम करता है।

अपने आसपास आपने भी लोगों से यह सुना होगा कि अमुक व्यक्ति के गॉलब्लैडर में स्टोन हो गया था। इसलिए उसे सर्जरी करानी पड़ी। इस बीमारी के बारे में जानने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि हमारे शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग काम कैसे करता है? यह पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लिवर और छोटी आंत के बीच पुल की तरह काम करता है। लिवर से बाइल (पित्त) नामक डाइजेस्टिव एंजाइम का सिक्रीशन निरंतर होता रहता है। उसके पिछले हिस्से में नीचे की ओर छोटी थैली के आकार वाला ऑर्गन, गॉलब्लैडर में यही बाइल जमा होता है।

एक स्वस्थ व्यक्ति का लिवर पूरे 24 घंटे में लगभग 800 ग्राम बाइल का निर्माण करता है। लिवर और गॉल ब्लैडर के बीच बाइल डक्ट नामक एक छोटी सी नली होती है, जिसके माध्यम से यह पित्त को गॉलब्लैडर तक पहुंचाता है। जब व्यक्ति के शरीर में भोजन जाता है तो यह ब्लैडर पित्त को पिचकारी की तरह खींच कर उसे छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में भेज देता है, जिसे डुओडेनियम कहा जाता है। इससे पाचन क्रिया की शुरुआत हो जाती है।  

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क्या है बीमारी       

पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम को सुरक्षित रखने वाले इस महत्वपूर्ण अंग से जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या यह कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती है, जिन्हें गॉलस्टोन कहा जाता है। दरअसल जब गॉलब्लैडर में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौज़ूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिन्हें गॉलस्टोन्स कहा जाता है। ये दो तरह के होते हैं-कोलेस्ट्रॉल और पिगमेंट। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं। ओबेसिटी से पीडि़त लोगों और स्त्रियों में कोलेस्ट्रॉल स्टोन्स की समस्या ज्य़ादा नज़र आती है।

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जब ब्लैडर में ब्लैक या ब्राउन कलर के स्टोन्स नज़र आते हैं तो उन्हें पिगमेंट स्टोन्स कहा जाता है। कई बार गॉल ब्लैडर में अनकॉन्जुगेटेड बिलिरुबिन नामक तत्व का संग्रह होने लगता है तो इससे पिगमेंट स्टोन्स की समस्या होती है। गॉलब्लैडर में गड़बड़ी की वजह से कई बार पित्त बाइल डक्ट में जमा होने लगता है, इससे लोगों को जॉन्डिस भी हो सकता है। अगर आंतों में जाने के बजाय बाइल पैनक्रियाज़ में चला जाए तो इससे क्रॉनिक पैनक्रिएटाइटिस नामक गंभीर समस्या हो सकती है। अगर सही समय पर उपचार न कराया जाए तो इससे गॉलब्लैडर में कैंसर भी हो सकता है।

कैसे करें पहचान

शुरुआती दौर में गॉलस्टोन के लक्षण नज़र नहीं आते। जब समस्या बढ़ जाती है तो गॉलब्लैडर में सूजन, संक्रमण या पित्त के प्रवाह में रुकावट होने लगती है। ऐसी स्थिति में लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से की दायीं तरफ दर्द, अधिक मात्रा में गैस की फर्मेशन, पेट में भारीपन, वोमिटिंग, पसीना आना जैसे लक्षण नज़र आते हैं।

क्यों होती है समस्या

शारीरिक सक्रियता और एक्सरसाइज़ की कमी, रोज़ाना के खानपान में घी-तेल और मिर्च-मसाले के अधिक इस्तेमाल को इस समस्या के लिए मुख्य रूप से जि़म्मेदार माना जाता है। लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने या हॉर्मोन रिप्लेस्मेंट थेरेपी लेने वाली स्त्रियों में भी इसकी आशंका बढ़ जाती है। मोटापा घटाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट से भी गॉलब्लैडर में स्टोन हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान हॉर्मोन संबंधी असंतुलन की वजह से भी कुछ स्त्रियों को ऐसी समस्या हो सकती है। 65 वर्ष से अधिक उम्र की स्त्रियों को भी कई बार ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उपचार क्या है

अगर शुरुआती दौर में लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो इस समस्या को केवल दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। ज्य़ादा गंभीर स्थिति में सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है। पुराने समय में इसकी ओपन सर्जरी होती थी, जिसकी प्रक्रिया ज्य़ादा तकलीफदेह थी लेकिन आजकल लेप्रोस्कोपी के ज़रिये गॉलब्लैडर को ही शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है और मरीज़ शीघ्र ही स्वस्थ हो जाता है। आमतौर पर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि पाचन तंत्र के इस हिस्से को शरीर से बाहर निकाल देना सेहत के लिए नुकसानदेह तो नहीं होता?

दरअसल गॉलब्लैडर भी अपेंडिक्स की तरह मानव शरीर का वेस्टिजिओ ऑर्गन यानी अवशेषी अंग है, अर्थात इसके न होने पर भी व्यक्ति की सामान्य सेहत और दिनचर्या पर कोई खास असर नहीं पड़ता। हां, सर्जरी के बाद शुरुआत में एक-दो महीने तक कुछ मरीज़ों को पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है क्योंकि अब व्यक्ति के शरीर में आवश्यक डाइजेस्टिव एंजाइम बाइल को स्टोर करने की कोई निश्चित जगह नहीं होती और लिवर से आंतों तक इसका सीधा प्रवाह होता रहता है। इसी वजह से सर्जरी के बाद लोगों को सादा और संतुलित खानपान अपनाने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसके बाद भी व्यक्ति सक्रिय जीवनशैली अपना सकता है।

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