अब मानव अंग भी मकड़ी के जाले की तरह बुने जा सकेंगे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 26, 2013
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • लंदन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज में शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का प्रयोग चूहों पर किया।
  • इस विधि में शुरुआत कोशिकाओं और पॉलीमर का एक शोरबा बनाने से होती है।
  • चूहे के शरीर में रक्‍त प्रवाहित करने वाली नस बनाने में मिल चुकी है कामयाबी। 
  • अभी तक कोई भी तकनीक अंग बनाने में सक्षम नहीं।
  • इलेक्‍ट्रोस्पिनिंग, तकनीक से कुछ मरीजों के लिए ब्‍लैडर बनाए गए हैं।

human organs can be woven like spider websमकड़ी के जालों के महीन धागों से प्रेरणा लेकर वैज्ञानिक शरीर के अंग बनाने की कोशिश में जुटे हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ट्रांसप्लांट के लिए अंग बनाने में दूसरी तकनीकों के मुकाबले इस तकनीक से ज़्यादा बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।

 

इससे हृदय की कोशिकाओं का एक पैच बनाने में मदद मिल सकती है जो दिल के दौरे के बाद मरीज को स्‍वस्‍थ करने के लिए महत्‍वपूर्ण हो सकता है। हालांकि शुरुआती सफलता के बावजूद अभी इस तकनीक को व्‍यावहारिक रूप से इस्‍तेमाल में लाने में समय लगेगा।

 

लंदन स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज में शोधकर्ताओं के एक दल ने जैविक अंग बनाने के लिए पॉलीमर के साथ मिली हुई कोशिकाओं के लगातार प्रवाह का इस्‍तेमाल कर नए उत्तक तैयार किए। यह तरीका वैसा ही था जैसा मकड़ी जाले बनाने के लिए अपनाती है। शोधकर्ताओं ने फिलहाल इस तकनीक का प्रयोग चूहों पर किया है। उन्‍होंने इसका इस्‍तेमाल कर चूहों में रक्‍त प्रवाहित करने वाली नसों का निर्माण किया।

 

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में प्रत्‍यारोपण के लिए अंग बनाने की कई तकनीकों का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। लेकिन उन्‍हें लगता है‍ कि प्रचलित अन्‍य तकनीकों की तुलना में मकड़ी के जाले बुनने जैसी तकनीकों की तुलना से ज्‍यादा अच्‍छे परिणाम मिल सकते हैं। उन्‍होंने इस तकनीक को इलेक्‍ट्रोस्पिनिंग नाम दिया है।

 

प्रयोगशाला में अंग बनाने के कई तरीके प्रचलित हैं। कुछ तरीकों के तहत एक बनावटी ढांचे में मरीज को कोशिकाओं को डाल  दिया जाता है। फिर उन्‍हें कलम की तरह लगा कर विकसित किया जाता है।

 

इस तकनीक से कुछ मरीजों के लिए ब्‍लैडर बनाए गए हैं। एक अन्‍य तकनीक में शव से किसी अंग को लेकर एक विशेष डिटजेंट की मदद से पुरानी कोशिकाओं को हटा दिया जाता है। इसके बाद सिर्फ प्रोटीन का एक ढांचा बाकी रह जाता है, जिसमें अंग की जरूरतवाले मरीज की कोशिकाएं लगा दी जाती हैं। इस तकनीक से श्‍वसन नलिका का निर्माण किया जा चुका है। वैसे बीबीसी ने यूनिवर्सिटी कॉलेज के डॉक्‍टर सुवान जयसिंघें के हवाले से कहा है कि अभी कोई भी तकनीक अंग बनाने में सक्षम नहीं है और शोधकर्ता एक खराब अंग की मरम्‍मत की प्रक्रिया लाने की कोशिश कर रहे हैं, न कि उसे बदलने की।



 

Read More Health News In Hindi

Write a Review Feedback
Is it Helpful Article?YES1 Vote 1026 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर