माइग्रेन रोगियों को दोगुना होता है अवसाद का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 19, 2013
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problem of depressionमाइग्रेन एक गंभीर समस्‍या है और आजकल युवाओं को यह तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। नई शोध के बाद इसके मरीजों के लिए चिंता बढ़ गई है। हाल ही में हुई शोध की मानें तो माइग्रेन के रोगियों को सामान्‍य व्‍यक्ति के मुकाबले अवसाद का खतरा दोगुना होता है।


माइग्रेन रोगियों से संबंधित शोध को यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के शोधकर्ताओं ने पूरा किया। उन्‍होंने पाया कि यदि किसी व्‍यक्ति को माइग्रेन की समस्‍या है तो उसके अवसाद ग्रस्‍त होने की आशंका भी ज्‍यादा होती है। शोध से पता चला कि पुरुषों में अवसाद के मामले 3.4 फीसदी होते हैं, जबक‌ि माइग्रेन पुरुष रोगियों में अवसाद के मरीज 8.4 प्रतिशत अधिक होते हैं।


पुरुषों की तरह अवसाद का खतरा महिलाओं को भी ज्‍यादा होता है। सामान्य महिलाओं को अवसाद की समस्या 5.7 प्रतिशत होती है जबकि माइग्रेन की मरीज महिलाओं को अवसाद के मामले 12.4 प्रतिशत तक अधिक होते हैं।


शोधकर्ता प्रोफेसर एस्मे फुलर थॉमसन ने बताया कि शोध से यह भी पता चला कि 30 साल से कम उम्र की माइग्रेन महिला रोगियों में अवसाद का खतरा छह गुना अ‌ध‌िक होता है जबक‌ि 65 साल की उम्र वाली महिलाओं में अवसाद का खतरा कम होता है।


शोध में कनाडा से 67 हजार सैंपल एकत्रित किए गए जिसमें छह हजार सैंपल माइग्रेन रोगियों के थे। पूर्व में भी माइग्रेन रोगियों हुए शोध में पता चला है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन की समस्या अधिक होती है। इस शोध के अनुसार हर 16 में से एक पुरुष को माइग्रेन होता है जबकि हर सात में से एक महिला माइग्रेन की मरीज होती है।


शोध के आंकड़ों से यह साफ हुआ कि महिला माइग्रेन रोगियों की संख्‍या ज्‍यादा होने पर महि‍लाओं में अवसाद का प्रतिशत भी अधिक होगा। शोध का विस्तृत विवरण डिप्रेशन रिसर्च एंड ट्रीटमेंट जर्नल में प्रकाशित हो चुका है।

 

 

 

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