हृदय रोग की रोकथाम के लिए जीवनशैली में परिवर्तन जरूरी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 17, 2014
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Quick Bites

  • शारीरिक सक्रियता से हार्ट अटैक के खतरे को कम कर सकते हैं।
  • डायट चार्ट में फलों और हरी सब्जियों को जरूर शामिल कीजिए।
  • तनाव से बचें, यह दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।
  • धूम्रपान और एल्‍कोहल के कारण बढ़ती हैं दिल की बीमारियां।

हृदय रोग और कार्डियोवस्‍कुलर बीमारियां, आपके दिल को होने वाली विभिन्‍न बीमारियों को कहा जाता है। ये ऐसे रोग होते हैं, जो जिनका असर हमारे दिल और उसकी कार्यक्षमता पर पड़ता है। इसमें कोरोनरी डिजीज, दिल की धड़कन की समस्‍या, हृदय संक्रमण और हृदय को होने वाली अन्‍य परेशानियां शामिल होती हैं।

Heart Disease Prevention हृदय रोग दुनिया भर में है, लेकिन भारत में इसका असर शायद और भी ज्‍यादा है। रजिस्‍ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल कांउसिल के मुताबिक देश में 19 फीसदी यानी करीब हर पांचवा व्‍यक्ति हृदय रोग के कारण अपनी जान गंवाता है। हालांकि दिल की बीमारी अनुवांशिक भी होती हैं, लेकिन हृदय रोग के कई प्रकारों को हम अपनी जीवनशैली में सकारात्‍मक बदलाव लाकर हम कई प्रकार के हृदय रोगों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं वे तरीके जो आपके दिल को सेहतमंद बनाये रखने में मदद कर सकते हैं।


शारीरिक रूप से सक्रिय रहें

अगर आप अपने दिल को किसी प्रकार की बीमारी से बचना चाहते हैं, तो बहुत जरूरी है कि आप शारीरिक सक्रियता की अहमियत को नजरअंदाज न करें। शारीरिक गतिविधियों का अभाव हृदय रोग की एक बड़ी वजह होता है। शारीरिक सक्रियता आपके वजन को नियंत्रित रखती है और साथ ही डायबिटीज, कोलेस्‍ट्रॉल लेवल और रक्‍तचाप जैसे हृदय रोग के संभावित कारणों को भी आदर्श स्थिति में बनाये रखती है।

वर्षों से हो रहे शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि आदर्श फिटनेस के स्‍तर तक पहुंचे लोगों को हृदय रोग होने का खतरा काफी कम होता है। अगर आपको हृदय रोग है, तो किसी भी प्रकार का व्‍यायाम करने से पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श जरूर करें। अधिक व्‍यायाम हृदय रोगियों को नुकसान पहुंचा सकता है।

स्‍वस्‍थ खायें

दिल की बीमारियों को रोकने के लिए अपने आहार को नियंत्रित रखें। आपको फलों, सब्जियों और साबुत अनाजों का सेवन करना चाहिए। संतृप्‍त वसायुक्‍त आहार आपके लिए अच्‍छे नहीं होते। सही आहार आपका वजन भी आदर्श बनाये रखता है। इसके साथ रक्‍तचाप और कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को सामान्‍य बनाये रखने में भी आहार की अहम भू‍मिका होती है।

तनाव प्रबंधन सीखें

तनाव दिल के रोगों की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। अगर आप तनाव प्रबंधन की कला सीख जाते हैं, तो आपको दिल की बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है। मसल्‍स रिलैक्‍सेशन और गहरी सांस लेना आपको तनाव से फौरन राहत दिलाता है। इससे आपका तन-मन शांत हो जाता है। अगर आपको लगे कि आप अकेले इस समस्‍या से पार नहीं पा रहे हैं, तो किसी की मदद लेने से न हिचकें। अपने दोस्‍तों और परिवारजनों से पूछें कि इस परिस्थिति में आपको कैसा बर्ताव करना चाहिए। यदि इससे भी बात न बनें तो आप किसी विशेषज्ञ की मदद भी ले सकते हैं ।

धूम्रपान छोड़ें

सिगरेट का धुंआ न तो फिक्र उड़ाता है और न ही यह 'कूल' होने का अंदाज है। धूम्रपान दिल को बेहद नुकसान पहुंचाता है। तंबाकू में मौजूद निकोटिन रक्‍तवा‍हिनियों में जम जाता है, जिससे रक्‍तप्रवाह बुरी तरह प्रभावित होता है। परिणाम यह होता है कि आपके दिल को शरीर के सभी अंगों और अवयवों में रक्‍त पहुंचाने के लिए और अधिक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। धूम्रपान से रक्‍त में कार्बन मोनोऑक्‍साइड का स्‍तर बढ़ जाता है, जिससे रक्‍तवाहिनियों में ऑक्‍सीजन की कमी हो जाती है और वे क्षतिग्रस्‍त हो सकती हैं।

अल्‍कोहल का सेवन कम करें

अधिक अल्‍कोहल का सेवन उच्‍च रक्‍तचाप का कारण बन सकता है। यदि इस समस्‍या को समय रहते काबू न किया जाए, तो आगे चलकर यह हार्ट फैल्‍योर का कारण भी बन सकती है। कई शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि शराब का सेवन करने वाले लोगों में हृदय रोग का खतरा सामान्‍य लोगों की अपेक्षा अधिक होता है।

रक्‍तचाप और कोलेस्‍ट्रॉल पर रखें नजर

अपने रक्‍तचाप और कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित रखें। इन दोनों की नियमित जांच करवाते रहें। हृदय रोग के लिए ये दोनों कारण मुख्‍य रूप से उत्तरदायी होते हैं। अगर इन दोनों का स्‍तर सामान्‍य से अधिक हो, तो आपको हृदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे पहले कि ये दोनों चीजें खतरे का निशान लांघें आपको अपनी जीवनशैली में आवश्‍यक बदलाव लाने चाहिए।

फ्लू से बचें

आपको शायद यकीन न हो, लेकिन फ्लू भी हृदय को बीमार कर सकता है। समय रहते आपको फ्लू शॉट ले लेना चाहिए। इससे आप अपने हृदय रोग के खतरे को कम कर सकते हैं।



इसके साथ ही आपको नियमित जांच करवाते रहना चाहि‍ए और हृदय रोग के लक्षण नजर आते ही फौरन इलाज की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। बेहतर तो यही है कि आप रोग से बचे रहने के पूरे प्रयास करें।

 

 

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