कॉपर के अधिक सेवन से अल्‍जाइमर का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 31, 2013
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Quick Bites

  • मस्तिष्क को प्रोटीन को कम करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
  • डिमेंशिया का कारण बनने वाले प्रोटीन को कम करने के लिए मस्तिष्‍क का संघर्ष।
  • रेड मीट, शेल फिश और सब्ज़ियां भोजन में तांबे के प्रमुख स्रोत।
  • दिमाग़ के रक्षा करने वाले तंत्र में हस्तक्षेप करता है कॉपर। 

excessive copper intake puts one at alzheimers risk लंबे समय तक कॉपर का अधिक सेवन करने वाले अब सावधान हो जाए क्‍योंकि अमरीकी वैज्ञानिकों ने चूहों पर अपने प्रयोग के बाद ताज़ा शोध में यह जानकारी दी कि लंबे समय तक भोजन में कॉपर का अधिक सेवन अल्ज़ाइमर बीमारी की वज़ह बन सकता है।

 

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस ने कहा कि कॉपर की अधिक मात्रा के कारण मस्तिष्क को उस प्रोटीन को कम करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जिसे डिमेंशिया का प्रमुख कारण माना जाता है।

 

शोध के निष्कर्ष पर वैज्ञानिकों के बीच बहस जारी है क्योंकि कुछ अन्य शोधों का कहना है कि "कॉपर वास्तव में मस्तिष्क की सुरक्षा करता है।" रेड मीट, शेल फिश और सब्ज़ियां भोजन में तांबे के प्रमुख स्रोत हैं।

 

कॉपर के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए न्यूयॉर्क की रॉशेस्टर यूनिर्वसिटी में वैज्ञानिकों ने चूहों पर शोध किया। इस टीम ने पाया कि कॉपर दिमाग़ के रक्षा करने वाले तंत्र में हस्तक्षेप करता है। जिन चूहों को पानी में घोलकर ज़्यादा कॉपर दिया गया। उनके दिमाग़ की रक्त वाहिनियों में कॉपर की मात्रा बढ़ गई और उनके दिमाग़ की सक्रियता प्रभावित हुई।

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि दिमाग़ की झिल्ली के काम करने के तरीके पर असर पड़ा। इसके साथ-साथ चूहों के दिमाग़ का बीटा एम्लॉयड के उस प्रोटीन से छुटकारा पाना कठिन हो गया, जो डिमेंशिया का प्रमुख कारण है।

 

एल्ज़ाइमर सोसायटी के डॉक्टर डाउग ब्राउन कहते हैं, "तांबा शरीर के लिए अहम खनिज है, लोगों को इस शोध को सावधानी के साथ लेना चाहिए और अपने ख़ाने से तांबे को हटाना नहीं चाहिए।"




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