गर्भपात के बाद महिलाओं में दिखें ये 2 बदलाव, तो डॉक्टर से करें संपर्क

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 22, 2018
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Quick Bites

  • गर्भपात के बाद महिलाओं का व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है।
  • तनाव से बचाने के लिए महिला को अकेला न छोड़ें।
  • गर्भपात के बाद दोबारा गर्भवती होने के बीच में वक्त रखेें।

जब कोई महिला के जाने या फिर अनजाने में गर्भ में ही शिशु की मौत हो जाती है तो इस प्रकिया को गर्भपात कहा जाता है। गर्भावस्था के शुरुआती दौर यानी पहले 20 सप्ताह के अंदर किसी भी कारणवश भ्रूण का नष्ट हो जाना गर्भपात या स्वतःस्फूर्त गर्भपात (एसएबी) कहलाता है। अनजाने में हुआ गर्भपात महिला के जीवन का सबसे दुख का पल होता है। क्योंकि जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो वह उसी दिन से अपने शिशु के बारे में विचार करने लगती है। उसे सपने और हकीकत में अपने बच्चे की ही परछाई दिखती है।

यानि कि हम कह सकते हैं कि एक गर्भवती कुछ ही दिनों में अपने शिशु को लेकर सपनों की दुनिया में बहुत आगे पहुंच जाती है। क्योंकि उसे लगता है कि ये सब कुछ ही दिनों में सच होने वाला है। लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। गर्भपात, गर्भावस्था के पहले 13 सप्ताह के दौरान सबसे आम हैं। गर्भपात एक बहुत ही दर्दनाक अनुभव है। इसलिए हर महिला को इसकी जानकारी होना जरूरी है। आज हम आपको गर्भावस्था के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में बता रहे हैं।

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डॉक्टर की सलाह लें

अगर किसी स्वास्थ्य समस्या या फिर अनजाने में महिला का गर्भपात हो गया है तो बिना देरी के डॉक्टर से सलाह लें और इस समस्या का पूरा इलाज करवाएं। कई बार शारीरिक से ज्यादा महिलाएं मानसिक रूप से आहात होती है। इसलिए किसी अच्छे मानसिक डॉक्टर से संपर्क करें। अगर समस्या का इलाज नहीं कराया गया तो यह आगे की समस्या के लिए खतरनाक हो सकता है।

महिला को अकेला ना छोड़ें

गर्भपात के बाद महिलाएं अकसर अपराधबोध से ग्रस्त रहती है। उन्हें यह लगता है कि उनकी किसा गलती की वजह से ही उन्होंने अपना बच्चा खो दिया। इसलिए वो खुद को दोष देती रहती हैं। कई बार महिलाएं गम के चलते खुद को शारीरिक यातनाएं भी देती हैं। कई बार महिलाओं को गर्भपात के बाद पता लगता है कि वे गर्भवती थीं। अक्सर ऐसा गर्भवस्था के शुरुआती दौर में होता है। इसलिए ऐसी महिला को अकेले ना छोड़ें। घर का कोई न कोई सदस्य कम से कम 3 महीने तक उनके साथ जरूर रहे।

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जायज है चिड़चिड़ापन

गर्भपात के बाद महिलाएं चिड़चिड़ी हो जाती है उन्हें गुस्सा आता है, क्योंकि गुस्सा एक सामान्य प्रतिक्रिया है जो किसी भी प्रकार के दुख होने पर अपनेआप आने लगता है। यह सब इस वजह से होता है क्योंकि आप को अपने बच्चे को खोने का दुख होता है। इसलिए इस चिड़चिड़ेपन को व्यक्तिगत रूप से न लें बल्कि स्थिति को समझ कर उन्हें सपोर्ट करें।

महिलाएं खुद को दें समय

खुद को थोड़ा समय दें। समय के साथ, आप फिर भविष्य की ओर देखने के लिए तैयार हो जाएंगी। जब आप फिर से शिशु के लिए कोशिश करने के लिए तैयार हों तो यह बात से आपको आश्वासन मिल सकता है की ज्यादातर महिलाएं गर्भपात के बाद भी भविष्य में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। मदद के लिए आप अपने परिवार और सहेलियों से बात करना मददगार लग सकता है।

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