आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए रोज करें ये 3 योगासन

Improve Eyesight : आजकल बच्चे, बड़े हो या बुजुर्ग सभी को चश्मा लगा हुआ है। ऐसे में आप चाहें तो कुछ योगासनों के मदद से अपने आंखों की रोशनी बढ़ा सकते है

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jun 17, 2021Updated at: Jun 17, 2021
आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए रोज करें ये 3 योगासन

क्या आपकी आंखें भी कमजोर हैं? आजकल मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी पर घंटों समय बिताया जाता है। इसका बुरा असर हमारी सेहत के साथ ही आंखों पर भी पड़ता है। घंटों तक इन चीजों के उपयोग से आंखें कमजोर होने लगती है। यही वजह है कि आजकल बच्चे, बड़े हो या बुजुर्ग सभी लोगों के आंखों पर चश्मा लगा रहता है। ऐसे में आंखों की रोशनी हमेशा बरकरार रहे, इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या में कुछ योगासनों को जरूर शामिल करना चाहिए।

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए योगासन (Yoga Asanas to Improve Eyesight)

  • भूमिपाद मस्तकासन
  • बद्धकोणासन
  • त्राटक योग
Yoga for improve Eyesight

1. भूमिपाद मस्तकासन (Bhumipada Mastakasana) 

भूमिपाद मस्तकासन दिखने में भले की कठिन लगता है, लेकिन इसे बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है। भूमिपाद मस्तकासन को नियमित रूप से करने पर स्वास्थ्य को कई फायदे मिलते हैं। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मददगार होता है। साथ ही यह गर्दन, पीठ, पैरों और हाथों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसे करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन या रक्त प्रवाह बेहतर होता है। इतना ही नहीं यह सुनने की शक्ति को भी बढ़ाता है। भूमिपाद मस्तकासन करने से एकाग्रता बढ़ती है और तनाव कम होता है।

भूमिपाद मस्तकासन करने का तरीका (How to DO Bhumipada Mastakasana) 

  • भूमिपाद मस्तकासन करने के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह पर एक चटाई या मैट बिछा लें।
  • इस पर आराम से बैठ जाएं और फिर मार्जरी आसन (इस स्थिति में आपके घुटने और हथेलियों जमीन पर रहती है) में आ जाएं। 
  • अब सांस छोड़ते हुए हथेलियों के बीच में अपना सिर रखें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे अपने दोनों घुटनों और नितंबों को उठाएं।
  • अपने दोनों हाथों को पीठ पर बांध लें।
  • इस दौरान आपको अपने शरीर का संतुलन बनाने की कोशिश करनी होती है।
  • इस अवस्था में कुछ देर रुकने के बाद प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • इस आसन को आप 3-5 बार कर सकते हैं।

भूमिपाद मस्तकासन करते हुए सावधानियां (Bhumipada Mastakasana Precautions)

  • भूमिपाद मस्तकासन करते हुए आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। हाथों, पैरों में दर्द होने पर इस आसन को करने से बचें।
  • सिरदर्द होने पर भी आपको इस नहीं करना चाहिए।
  • हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) वाले रोगियों को इसे नहीं करना चाहिए।
  • अगर आपको सर्वाइकल, फ्रोजन शोल्डर की समस्या है, तो भी इसे न करें।
  • गर्भवती महिलाएं (Pregnancy) भी इस आसन को न करें।
  • जिनका हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, उन्हें भी इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए।
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2. बद्धकोणासन (Baddha Konasana)

बद्धकोणासन को तितली आसन भी कहा जाता है। इसमें दोनों पैरों के तलवों को जोड़कर तितली का आकार बनाया जाता है। जब घुटनों को ऊपर-नीचे किया जाता है, तो बिल्कुल तितली सा प्रतीत होता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है। यह आसन घुटनों, हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाने में मददगार होता है। साथ ही प्रेगनेंट महिलाओं के लिए भी तितली आसन फायदेमंद हो सकता है। इसे रोजाना करने से आंखों की रोशनी तेज होती है, इससे आंखें जल्दी खराब नहीं होते हैं।

बद्धकोणासन करने का तरीका ( How to do Baddha Konasana) 

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक मैट बिछा लें।
  • इस पर अपने दोनों पैरों को एकदम सीधा करके बैठ जाएं।
  • अब अपने दोनों घुटनों को मोड़ लें। 
  • दोनों पैरों के तलवों को आपस में जोड़ें। 
  • अब दोनों हथेलियों से दोनों पैरों को पकड़ें।
  • इसके बाद अपने घुटनों को ऊपर-नीचे ले जाएं।
  • आप ऐसा कई बार सकते हैं। धीरे-धीरे अपनी क्षमतानुसार इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 
  • यह एक बेहद आसान अभ्यास है। 

बद्धकोणासन करते हुए सावधानियां (Baddha Konasana Precautions)

बद्धकोणासन पैरों का एक आसन है। इसे करते हुए आपको कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। वैसे तो इसे सभी कर सकते हैं, लेकिन कुछ संवेदनशील लोगों को इसे करने से बचना चाहिए।

  • घुटनों पर चोट लगने या दर्द होने की स्थिति में आपको इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • पीरियड्स या मासिक धर्म के दौरान इस आसन का अभ्यास न करें।
  • हृदय रोगियों को बद्धकोणासन नहीं करना चाहिए।
  • अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के रोगी हैं, तो भी इस आसन को करने से बचें।
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3. त्राटक योग (Tratak Yoga)

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, योग विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर रमेश कुमार बताते हैं कि नियमित रूप से त्राटक योग करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इससे आंखों से संबंधित सभी रोग दूर होते हैं। इससे एकाग्रता और स्मृति बढ़ती है। त्राटक योग तनाव, चिंता और थकान को भी दूर करने में मददगार होता है। इस योग को रोजाना करने से आपकी आंखें एकदम साफ रहेगी। इतना ही नहीं त्राटक योग (Tratak Yoga) दिमाग को शांत कर अनिद्रा की समस्या को भी ठीक करता है। साथ ही यह हृदय स्वास्थ्य को भी फायदा पहुंचाता है। त्राटक योग को पूरी विधि से किया जाना चाहिए, तभी इसके पूरे फायदे मिलते हैं।

त्राटक योग करने का तरीका (How to Do Tratak Yoga)

  • त्राटक योग करने के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह या कमरे में एक मैट बिछा लें।
  • इस पर आरामदायक अवस्था में बैठ जाएं।
  • अपने सिर, गर्दन, पीठ और रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें।
  • ध्यान मुद्रा में बैठकर अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें।
  • जिस वस्तु पर आपको ध्यान केंद्रित करना है, उसे अपनी आंखों के एकदम समानांतर रखें। 
  • अब धीरे-धारे आंखें खोलें और वस्तु पर ध्यान केंद्रित करें। 
  • आपको इसे तब तक देखते रहना है, जब तक आंखों से पानी न निकल जाए।
  • इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को मसलें और अपने आंखों पर लगाएं।
  • धीरे-धीरे आंखें खोलें।
  • आप इस योग को 3-4 बार कर सकते हैं। 
  • शुरुआत में इसे कम करें। धीरे-धीरे इसका समय बढ़ाना चाहिए।

त्राटक योग करते हुए सावधानियां (Tratak Yoga Precautions)

  • आंखों में किसी भी तरह की समस्या होने पर त्राटक योग बिल्कुल न करें।
  • वस्तु या ज्योति को अपने आंखों के एकदम समानांतर रखें।
  • त्राटक योग करने वालों को हमेशा सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
  • आंखों से पानी निकलने के बाद इसे बिल्कुल न करें। थोड़ी देर आराम करके इसे दोबारा किया जा सकता है।

आप भी अपनी आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए इन 3 योगासनों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। शुरुआत में आपको इन्हें कम और धीरे-धीरे करना चाहिए। फिर आप अपनी क्षमतानुसार इसका समय बढ़ा सकते हैं। ध्यान रखें कि पहले इन योगासनों को किसी योगा एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें। 

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