World Suicide Prevention Day 2022: आत्महत्या से जुड़े 4 सवालों के जवाब जानें एक्सपर्ट से

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक डाटा के मुताबिक हर साल दुनियाभर में 8 से 9 लाख लोग अपनी जिंदगी आत्महत्या की वजह से खत्म करते हैं।

Ashu Kumar Das
Written by: Ashu Kumar DasPublished at: Sep 09, 2022Updated at: Sep 09, 2022
World Suicide Prevention Day 2022: आत्महत्या से जुड़े 4 सवालों के जवाब जानें एक्सपर्ट से

World Suicide Prevention Day 2022: दुनियाभर में बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक डाटा के मुताबिक हर साल दुनियाभर में 8 से 9 लाख लोग अपनी जिंदगी आत्महत्या की वजह से खत्म करते हैं। वैश्विक स्तर पर हर चौथे युवा की मौत का कारण भी आत्महत्या की है। आखिरकार लोग आत्महत्या क्यों करते हैं और इसके पीछे क्या कारण है वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे (विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस) के खास मौके पर हमने आत्महत्या से जुड़े 5 सवाल और उसके जवाब जानने की कोशिश की।

आत्महत्या के बारे में क्या है लोगों की सोच

जब कोई शख़्स आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो इस स्थिति को मनोचिकित्सक सुसाइडल आइडिएशन (आत्महत्या का ख्याल) कहते हैं। चाइल्ड साइकोलोजिस्ट और पेरेंटिंग कोच डॉ. रिद्धी (Dr. Riddhi D- Child Psychologist) का कहना है कि जरूरी नहीं है कि किसी एक वजह से ऐसा हो। विशेषज्ञों की राय में जब व्यक्ति को किसी मुश्किल से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता है, तो वो अपना जीवन ख़त्म करने के बारे में सोचता है। आत्महत्या का विचार प्राकृतिक नहीं होता है। मस्तिष्क में बायो न्यूरोलॉजिकल बदलावों के चलते लोगों को लगने लगता है कि जीवन किसी काम का नहीं है। इसके बाद व्यक्ति आत्महत्या करने का विचार आता है। आत्महत्या के 90 प्रतिशत मामले मानसिक विकार के चलते होते हैं।

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आत्महत्या का ख्याल दिमाग में आने के संकेत क्या है?

डिप्रेशन

मानसिक स्थिति का एकसमान नहीं रहना

बेचैनी और घबराहट का होना

जिस चीज़ में पहले खुशी मिलती थी, अब उसमें दिलचस्पी ना होना

हमेशा निगेटिव बातों का आना

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अगर आत्महत्या का ख्याल आने पर क्या करें

एक्सपर्ट का कहना है कि व्यक्ति के मन में नकारात्मक ख्यालों का आना साधारण बात है। कई बार ऐसे ख्याल कुछ ही पलों के लिए आते है लेकिन कुछ लोगों में ये धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी व्यक्ति में आत्महत्या का विचार कितना गंभीर है, इसकी जांच ज़रूरी है और इसके लिए मेंटल हेल्थ काउंसलिंग हेल्पलाइन की मदद लेनी चाहिए या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

आत्महत्या की कोशिश करने वाले लोगों के साथ क्या करना चाहिए?

मानसिक विकार और आत्महत्या के ख्याल पर किशोरों के साथ भी बातचीत करनी चाहिए। उसको लेकर किसी तरह की हिचक नहीं होनी चाहिए।

उनकी समस्या को समझें और उसे स्वीकार करें। यह न कहें कि ये तो कोई समस्या नहीं है।

उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें।

यहां ये समझना ज़रूरी है कि मानसिक विकार वाले लोगों के लिए परिवार की सहायता सबसे ज़रूरी पहलू है। पारिवार के सदस्यों को भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। 

 

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