बच्‍चे बिस्‍तर गीला क्‍यों करते हैं? जानें कारण और उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 16, 2018
Quick Bites

  • बच्चे जान बूझकर बिस्तर गीला नहीं करते।
  • उनका अपने आप पर नियंत्रण नहीं होता।
  • उन पर गुस्सा नहीं बल्कि समझदारी से काम लें।

बिस्‍तर गीला करना शिशुओं और छोटे बच्‍चों के बीच एक बहुत ही आम समस्‍या है। यह सोते समय अनजाने में पेशाब करने की एक प्रक्रिया है। लेकिन छह साल की उम्र से ज्‍यादा उम्र के बच्‍चों का बिस्‍तर गीला करने पर निराशा होती है। बच्‍चे आलस्‍य या किसी उद्देश्‍य से ऐसा नहीं करते बल्कि अक्‍सर यह समस्‍या छोटे ब्‍लैडर, ब्‍लैडर परिपक्वता, अत्‍यधिक यूरिन उत्‍पादन, यूरीन मार्ग में संक्रमण, तनाव, पुरानी कब्‍ज और हार्मोंन असंतुलन के कारण होता है। कुछ बच्‍चे डीप स्‍लीपर होते हैं, और उनके मस्तिष्‍क को ब्‍लैडर के भरे होने का संकेत नहीं मिलता है।

इसके अलावा बहुत सारे मामलों में यह समस्‍या बच्‍चों को विरासत में मिलती है। अगर आप भी अपने बच्‍चे की इस समस्‍या परेशान हैं तो आसान और सरल प्राकृतिक उपचार बिस्तर गीला रोकने में मदद कर सकते हैं। आपको बता दें कि बच्चे जान बूझकर बिस्तर गीला नहीं करते। उनका अपने आप पर नियंत्रण नहीं होता। उनपर गुस्सा करके या डांट कर या अपनी नाराजगी जताकर उन्हें अपने आपको कसूरवार न समझने दें, बल्कि समझदारी से काम लें।

बिस्तर गीला करने के कारण

जिन बच्चों में बिस्तर गीला करने की बीमारी होती हैं, वह उसे महसूस ही नहीं कर पाते। यह कई कारणों से हो सकता है।

  • रात में न जग पाने की असमर्थता
  • मूत्राशय का जरूरत से अधिक क्रियाशील होना
  • मूत्राशय के नियंत्रण में देरी होना
  • मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण न होना
  • नाक संबंधित अवरोध अथवा गहरी नींद
  • मनोवैज्ञानिक समस्या
  • आनुवांशिकी कारण
  • कब्ज

इसे भी पढ़ें: जानिये कितनी मात्रा में फार्मूला दूध सही है आपके शिशु के लिए और कब दें ठोस आहार

आयुर्वेदिक नुस्‍खे

  • रात को सोने से पहले, गुनगुने दूध के साथ पाउडर के रूप में आयुर्वेदिक औषधि शसर्पा का सेवन करने से लाभ मिलता है।
  • यह पता करने के प्रयास करें कि आपके बच्चे को पर्याप्त नींद मिलती है कि नहीं। सोने की सही समय-सारिणी से बच्चे को उठने में आसानी होगी जब उसे मूत्रत्याग का एहसास होगा।
  • एक तवे पर धनिये के बीज को भून लें जब तक कि वह भूरे रंग के नहीं हो जाते। इनमे एक चम्मच अनार के फूल, तिल, और बबूल की गोंद मिलाकर एक मिश्रण बना लें और उनका चूरा बना लें। इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सोते समय बच्चे को दें।  
  • बच्चे को आलू, हरे चने, चॉकलेट, चाय, कॉफ़ी और मसालेदार खान पान, जिससे पेट में गैस बनता है, का सेवन न करायें। सोने से कुछ घंटे पहले तक किसी भी तरह के तरल पदार्थ का सेवन न करायें।
  • सोने से दो तीन घंटे पहले बच्चे को अपना मूत्राशय खाली करने को कहें। फिर उसके सोने के दो या तीन घंटे बाद का अलार्म लगाकर रखें ताकि उसे पेशाब करने के लिए जगाया जा सके।

इसे भी पढ़ें: बच्चों को जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें सिखाएं घर के ये छोटे-छोटे काम

  • कभी कभी परिवार के किसी सदस्य या प्रिय मित्र की मृत्यु, माता-पिता का संबंध विच्छेद वगैरह, बच्चों में उच्च तनाव की वजह बनते हैं और नींद में बिस्तर गीला करने के कारण बन सकते हैं।
  • बच्चे की भावनाओं को समझने के प्रयास करें और उनसे झूजने के लिए सकारात्मक कदम उठायें इससे पहले कि वह भावनाएं तनाव बनकर नींद में मूत्रत्याग के ज़रिये निष्काषित हों।
  • नियमित आहार में अम्लाकी,अदरक, अजवाइन, जीरा, पुदीना और तुलसी वगैरह का समावेश करें। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जतमंसी वगैरह जैसी तनाव कम करने वाली औषधियों भी काफी असरदार होती हैं।
  • सोने से पहले एक चम्मच शहद के प्रयोग से भी नींद में बिस्तर गीला करने पर नियंत्रण पाया जा सकता है। हालांकि इन औषधियों का प्रयोग करने से पहले एक बार चिकित्‍सक की सलाह जरूर ले लें।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप
Read More Articles On Parenting In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES900 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK