जानिये कितनी मात्रा में फार्मूला दूध सही है आपके शिशु के लिए और कब दें ठोस आहार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 15, 2018
Quick Bites

  • फार्मूला मिल्क से शिशु को तमाम जरूरी तत्व मिलते हैं।
  • बड़ों की तरह शिशुओं की जरूरत ज्यादातर एक सी नहीं रहती है।
  • शिशु को भूख लगेगी तो वो बार-बार अपना मुंह खोलेगा।

शिशु के विकास और उसकी अच्छी सेहत की चिंता हर मां को होती है। शिशु जब थोड़ा बड़ा हो जाए, तो मां उसे अपने दूध के साथ-साथ कुछ बाहर का खाना और फार्मूला मिल्क देना शुरू करती है। ये फार्मूला मिल्क जहां बच्चों का पेट भरते हैं वहीं उनके शरीर को तमाम जरूरी तत्व भी इनसे मिलता है। लेकिन शुरुआत से ही एक सवाल हर मां को परेशान करता है कि शिशु को कितनी मात्रा में फार्मूला मिल्क देना चाहिए। दरअसल आपकी चिंता जायज है मगर इस बात का जवाब कई बातों पर निर्भर करता है कि आपके शिशु को कितनी मात्रा में फार्मूला मिल्क देना अच्छा होगा। आपके शिशु की उम्र, उसका वजन, स्तनदूध की मात्रा और शिशु को दिया जाने वाला ठोस आहार आदि बातें तय करती हैं कि आपके शिशु को फार्मूला मिल्क की कितनी जरूरत है।

बदलती रहती हैं शिशु की जरूरतें

बड़ों की तरह शिशुओं की जरूरत ज्यादातर एक सी नहीं रहती है बल्कि थोड़े-थोड़े समय में उनकी उम्र और मौसम के हिसाब से उनकी जरूरत बदलती रहती है। शिशु बोलकर आपको अपनी जरूरत नहीं बता सकता इसलिए उसके इशारों को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है। शुरू-शुरू में मां को शिशु के इशारे समझने में गलती हो सकती है मगर बाद में हर मां इन इशारों को समझने लगती है। अगर शिशु को भूख लगेगी तो वो बार-बार अपना मुंह खोलेगा और गोद में उठाने पर मां की छाती की तरफ घूमेगा। अगर बच्चा गोद में नहीं है तो रोकर वो अपनी भूख आपको बता सकता है। इसके अलावा कई बच्चे भूख लगने पर चीजों और खुद की उंगलियों को मुंह में भरना शुरू कर देते हैं।

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ऐसे तय करें फार्मूला मिल्क की मात्रा

शिशु की परवरिश के समय कुछ बातें याद रखें। शिशु को फार्मूला मिल्क देने के लिेए पहली जरूरत तो शिशु की भूख है यानि शिशु को जितनी भूख है उतना दूध उसे पिलाना चाहिए। शिशु के वजन के अनुसार भी तय कर सकते हैं कि उसे कितनी मात्रा में फार्मूला मिल्क देने की जरूरत है। आमतौर पर एक स्वस्थ शिशु को उसके वजन के हर किलोग्राम के अनुसार 150 मिली लीटर से 200 मिलीलीटर दूध देना चाहिए। अब मान लीजिए आपका शिशु अभी तीन किलोग्राम का है, तो आप उसे एक दिन में 450 मिलीग्राम से 600 मिलीग्राम फार्मूला मिल्क दे सकती हैं। इसके अलावा शिशु की उम्र से भी ये बात तय होती है जैसे पहले हफ्ते में शिशु का पेट बहुत छोटा होता है इसलिेए उसे इतने दूध की जरूरत नहीं होती है।

शिशु का पेट भरने के इशारे

हर शिशु भूखा होने पर रोता है मगर पेट भरने पर हर शिशु की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है। बॉटल से दूध पीने पर शिशु का पेट जब भर जाता है तो वो बॉटल को छोड़ देता है या उसे दूर फेंक देता है। इसी तरह स्तन से दूध पिलाने पर शिशु जब दूध पीने की गति धीरे-धीरे कम कर दे या पीने से ज्यादा समय रुककर आराम करने लगे, तो समझिये कि शिशु का पेट बढ़ गया है। जरूरी नहीं कि आपके शिशु की जरूरत समय के साथ बढ़ती ही रहे, ये घट भी सकती है। इसलिए अगर शिशु ने कल एक बॉटल दूध पिया था और उसने आधा बॉटल दूध पिया है तो घबराएं नहीं, हो सकता है शिशु की जरूरत आज कम दूध की हो। दूध बच जाने पर शिशु पर इसे जबरदस्ती पीने का दबाव न डालें।

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कब दें शिशु को ठोस आहार

आमतौर पर 6 महीने का हो जाने के बाद ही शिशु को ठोस आहार देना ठीक रहता है। कई बार जब शिशु को ज्यादा ठोस आहार मिल जाता है तो वो दूध कम पी पाता है जिससे उसके शरीर के विकास के लिए जरूरी तत्व उसे नहीं मिल पाते हैं। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ठोस आहार के साथ शिशु को कम से कम एक साल तक फार्मूला मिल्क देते रहें। 6 महीने से ज्यादा के शिशु को विटामिन सप्लीमेंट्स दे सकते हैं।

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