घुटने के बल चलने से शिशुओं की सेहत को मिलते हैं ये 7 फायदे, बेहतर होता है शारीरिक-मानसिक विकास

घुटनों के बल चलने से शिशुओं को कई फायदे होते हैं। इससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर तरीके से होता है।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Jul 20, 2021Updated at: Jul 20, 2021
घुटने के बल चलने से शिशुओं की सेहत को मिलते हैं ये 7 फायदे, बेहतर होता है शारीरिक-मानसिक विकास

जन्म के बाद हर दिन शिशु में कुछ न कुछ परिवर्तन देखने को मिलता है। शिशुओं की एक्टिविटी में परिवर्तन देखकर माता-पिता को काफी खुशी होती है। शिशु की पहली हंसी से लेकर पहला कदम मां-बाप नहीं भूलते हैं। इस खुशी का एहसास उन्हें एक बेहतरीन अनुभव देता है। ऐसे में अगर शिशु अपने आप चले, तो मां-बाप के खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। लेकिन पैरों में चलने से पहले शिशु घुटनों के बल चलना सीखते हैं। यही प्राकृतिक नियम है। क्योंकि इसी से उनके सीखने की शुरुआत तेज होती है। जी हां, घुटनों के बल चलने से शिशु के शरीर को कई फायदे होते हैं, जिससे शायद आप अनजान हों। इससे न सिर्फ शिशु का शारीरिक विकास बेहतर होता है, बल्कि मानसिक विकास में भी असरदार है। चलिए आज इस लेख से जानते हैं घुटनों के बल चलने से शिशु को होने वाले फायदे- 

1. दिमाग और शरीर होता है फुर्तीला

जब आपका शिशु अपने घुटनों के बल चलना शुरू करता है, तो उनके अंदर चीजों को जानने की इच्छा काफी ज्यादा बढ़ती है। क्योंकि जब वे चलते हैं, तो उन्हें बिस्तर के अलावा घर की कई और चीजें दिखती हैं। इससे वे हर चीज को समझने की कोशिश करने लगते हैं। उनके अंदर हर चीज को जानने की इच्छा बढ़ती है। साथ ही वे हर चीज को छूने की कोशिश करते हैं। इससे उनका शरीर और दिमाग दोनों ही फुर्तीला बनता है।

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2. शारीरिक विकास होता है बेहतर

जब शिशु घुटनों के बल चलना शुरू करता है, तो वह अपने हाथ और पैर दोनों का इस्तेमाल करता है। इससे उनके हाथ और पैरों की हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही बार-बार चलने से उनका शरीर लचीला बनता है। क्योंकि घुटनों के बल चलने के दौरान शिशुओं को अपना शरीर मोड़ना पड़ता है। लेकिन ध्यान रखें कि जब आपका शिशु घटनों के बल चले, तो उन्हें भरपूर रूप से कैल्शियम और प्रोटीन युक्त आहार दें। ताकि उनकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत हो सके। अगर आप उन्हें इस दौरान भरपूर कैल्शियम नहीं देती हैं, तो उन्हें कई तरह की समस्या हो सकती है।

3. शरीर को बैंलेस करने की बढ़ती है क्षमता

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी होता है कि शिशु कुछ चीजें खुद-ब-खुद सीखे। जब शिशु घुटनों के बल चलता है, तो वह बार-बार इधर-उधर गिरता रहता है और खुद ही संभलने की कोशिश भी करता है। ऐसे वे वह खुद प्रकृति रूप से शरीर को बैंलेस करना सीखता है। लेकिन ध्यान रखें कि जब आपका बच्चा घुटनों के बल चले, तो उसके आसपास ही रहें। क्योंकि इस दौरान चोट लगने की भी संभावना ज्यादा होती है। 

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4. दृष्टि की बढ़ती है क्षमता

जब आपका शिशु घुटनों के बल चलना शुरू करता है, तो वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है और कई नई-नई चीजों को देखता है। इससे उनके आंखों की दृष्टि नियम को समझने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही इससे देखने की क्षमता का धीरे-धीरे विकास होता है। जब बच्चा आपकी गोद में रहता है, तो उसे आसपास की चीजें और दूर रखी चीजें कम समझ आती हैं। लेकिन घुटनों के बल चलने के दौरान उसे आसपास की चीजें और दूर रखी चीजों की समझ बढ़ती है।

5. समझने की बढ़ती है क्षमता

घुटनों के दौरान बच्चा कई बार गिरता और संभलता है। ऐसे में उसे कई बार चोट भी लग जाती है। इसी दौरान वह अपनी जिंदगी में छोटे-छोटे रिस्क लेने की शुरुआत करता है। क्योंकि चोट लगने के बावजूद बच्चा फिर उठता है और आगे बढ़ने की कोशिश करता है। इस दौरान उसके पुन: प्रयास करने की समझ बढ़ती है।  

6. आत्म-विश्वास को मिलता है बढ़ावा

घुटनों के बल चलने से शिशु का आत्म विश्वास बढ़ता है। आप सोच रहे होंगे, यह कैसे हो सकता है, तो उदाहरण के तौर पर समझें। जब आपका बच्चा घुटनों के बल चलना शुरू करता है, तो वह इस दौरान दूरी और गहराई के आधार पर निर्णय लेता है कि उसे वहां तक जाना है। जब वह घुटनों के बल चलकर अपना टारगेट पूरा करता है, तो उसे काफी खुशी मिलती है और उसका खुद पर विश्वास बढ़ता है। घुटनों को बल चलने से बच्चे का संपूर्ण विकास होता है।

7. दिमाग का होता है विकास

जब बच्चा घुटनों के बल चलना शुरू करता है, तो उसके रास्ते में कई तरह की चीजें आती हैं। कभी-कभी कीड़े मकौड़े या फिर कोई अन्य चीज सामने आती है, तो बच्चा अपना दिशा बदल देता है। या फिर वह उस चीज को अपने रास्तों से हटा देता है। इससे उनके अंदर समझ बढ़ती है कि किस वक्त में क्या करना चाहिए। ऐसे में उनका मानसिक विकास होता है।

घुटनों के बल चलने से शिशु को कई फायदे होते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि जब आपका बच्चा घुटनों के बल चलना शुरू कर दे, तो उसके आसपास रहें। इस दौरान शरीर का विकास काफी तेजी से होता है। इसलिए उनके आहार में कैल्शियम और प्रोटीन को भरपूर रूप से शामिल करें। डॉक्टर की सलाह पर शिशु के आहार में बदलाव करें और उन्हें सही डाइट दें।

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