शिशुओं में इन कारणों से हो सकती है कैल्शियम की कमी, जानिए कैल्शिमय की कमी के लक्षण

कई बार शिशुओं में कैल्शियम की कमी देखी गई है। इसके कई कारण हो सकते हैं। आइए जानते हैं उन कारणों के बारे में।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Jan 09, 2021Updated at: Jan 09, 2021
शिशुओं में इन कारणों से हो सकती है कैल्शियम की कमी, जानिए कैल्शिमय की कमी के लक्षण

हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए शरीर में कैल्शियम की जरूरत होती है। इसके साथ ही शारीरिक विकास के लिए भी कैल्शियम बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। अगर बच्चों में कैल्शियम की कमी हो जाए, तो उनके शारीरिक विकास पर इसका असर पड़ता है। शिशुओं में कैल्शियम की कमी होना बहुत ही आम है, क्योंकि शिशु सिर्फ मां का दूध पीते हैं। अगर किसी कारण से स्तनपान ना कराया जाए, तो उनके शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है। कैल्शियम की कमी होने से उनका शारीरिक विकास रूप जाता है। साथ ही कई तरह की परेशानी होने लगती है। आइए जानते हैं शिशुओं के शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण और लक्षण क्या हैं? 

शिशुओं में कैल्शियम की कमी के कारण (calcium deficiency causes in Child)

कई शिशुओं में जन्म के बाद से ही कैल्शियम की कमी देखी गई है। आइए जानते हैं आखिर किन कारणों से शिशुओं मे कैल्शियम की कमी होती है-

  • जन्म के दौरान शिशुओं को अगर ऑक्सीजन की कमी होती है, तो उन्हें कैल्शियम की कमी भी हो सकती है। 
  • अगर मां को डायबिटीज की परेशानी है, तो शिशु के शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है। 
  • शिशु में विटामिन डी की कमी से भी कैल्शियम का स्तर कम हो जाता है।
  • 1 साल से कम उम्र के शिशु को गाय का दूध देने से उन्हें हाइपोकैल्सीमिया की परेशानी हो सकती है, क्योंकि गाय के दूध में फास्फोरस की अधिकता होती है। इसलिए 1 साल से कम उम्र के शिशु को गाय का दूध ना दें।

शिशुओं में कैल्शियम की कमी के लक्षण ((calcium deficiency Symptoms in Child)

कई शिशुओं के रोने से हमें समझ नहीं आता है कि आखिर वह क्यों रो रहा है और उसे क्या परेशानी हो रही है। ऐसे में हमें उनके लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत होती है कि आखिर आपका बच्चा क्यों रो रहा है। उनके शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर आपको निम्न लक्षण दिख सकते हैं। 

  • शिशु अधिक ज्यादा चिड़चिड़ा होना।
  • मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या।
  • हृदय की गति धीमी पड़ सकती है।
  • शिशु को झटके लगने के साथ-साथ बुखार आना
  • ब्लड प्रेशर धीमी होना
  • दांत आने में देरी लगना।
  • रातभर रोना और शरीर से अधिक पसीना निकलना

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