युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले

बदलती जीवनशैली के चलते बुजुर्गों ही नहीं, बल्कि युवाओं में भी स्ट्रोक का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। मानसिक तनाव, अल्कोहल, धूम्रपान और गुस्सा इसके मुख्य कारण हैं।

Rahul Sharma
मानसिक स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Rahul SharmaPublished at: Oct 15, 2014
युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले

तेजी से बदल रही जीवनशैली के चलते अब बुजुर्गों ही नहीं, बल्कि युवाओं में भी स्ट्रोक अर्थात लकवा का जोखिम तेजी से बढ़ता दिखाई देता है। तंत्रिका विज्ञान के विशेषज्ञों के मुताबिक कम उम्र में लोगों को ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियां अब अधिक देखने को मिल रहीं हैं। यह वास्तव में एक गंभीर और चिंता का विषय है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से भी इस संबंध में एक सर्वेकक्षण किया गाया था। जिससे यह सामने आया कि स्ट्रोक के कारण मौत का शिकार बनने वाले 20 प्रतिशत लोगों की उम्र 40 वर्ष से भी कम थी। यह आंकड़े गंभीर हैं, जिनसे ये साफ है कि युवाओं में स्ट्रोक तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस सब बातों के बीच एक बड़ा सवाल यह उठता है, कि भला ऐसा क्यों हो रहा है। ते चलिये जानने की कोशिश करते हैं कि युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं स्ट्रोक के मामले।

Strokes In Hindi

 

स्ट्रोक क्या होता है

स्ट्रोक एक मस्तिष्क की बीमारी है, जो दिमाग में रक्त की नलियों में खराबी होने के कारण होती है। द रअसल दिमाग में शरीर के अन्य भागों की तरह ही दो नलियां होती है। पहली हृदय से मस्तिष्क की ओर जाती है और रक्त को लेकर आती है, वहीं दूसरी दिमाग से रक्त को दिल की तरफ लाती है। रक्त को लाने वाली नलियों को धमनी कहते हैं और लौटाकर ले जाने वाली को शिरा कहते हैं। रक्त लाने व ले जाने वाली इन नलियों में रक्त का थक्का जमने अथवा नस फट जाने के कारण रक्तस्राव होने पर में स्ट्रोक होता है।

स्ट्रोक के लक्षण

शरीर के एक ओर के हिस्से में कमजोरी या लकवा स्ट्रोक का सबसे आम लक्षण है। इसमें मरीज अपनी मर्जी से एक तरफ  के हाथ-पैर हिला नहीं पाता या उसे उनमें कोई संवेदना ही महसूस नहीं होती। स्ट्रोक से बोलने में भी समस्या हो सकती है और चेहरे की मांस पेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे लार टपकने लगती है। सुन्न पड़ना या झुरझुरी होना भी स्ट्रोक में सामान्य बात होती है। स्ट्रोक की वजह से सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है, यहां तक कि मरीज अचेत भी हो सकता है।

स्ट्रोक के कारण

मानसिक तनाव, अल्कोहल, धूम्रपान और गुस्सा आदि स्ट्रोक के कुछ सबसे बड़े कारण बनते हैं। देखा गया है कि सबसे अधिक स्ट्रोक मानसिक तनाव और अल्कोहल के अधिक सेवन की वजह से होता है। साथ ही बड़े शहरों में स्ट्रोक के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। हर साल भारत में स्ट्रोक के तकरीबन 16 लाख मामले सामने आते हैं, और दुखद है कि इनमें से लगभग एक तिहाई की मृत्यु हो जाती है।

 

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ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज का सर्वे

ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों द्वारा मार्च-2012 से जून-2013 के बीच एम्स में इलाज के लिए आए मरीजों पर एक सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण के अनुसार सबसे ज्यादा (17.6 प्रतिशत) स्ट्रोक के मामले मानसिक तनाव की वजह से हुए थे। वहीं अल्कोहल और धूम्रपान को स्ट्रोक के लिए जिम्मेवार बड़ा दूसरा कारण माना गया। 4.1 प्रतिशत मरीजों में स्ट्रोक का कारण गुस्से को बताया गया। गौरतलब है कि गुस्से के कारण महिलाओं में स्ट्रोक के मामले अधिक सामने आए।


विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि अल्कोहल व धूम्रपान के अधिक सेवन के कारण कम उम्र में भी लोग स्ट्रोक के शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश में हर साल होने वाले स्ट्रोक के तकरीबन 16 लाख लोगों में से एक तिहाई मरीज मौत का शिकार बन जाते हैं, जबकि एक तिहाई मरीज इलाज के बाद पूरी तरह से ठीक हो पाते हैं। वहीं लगभग एक तिहाई मरीज किसी न किसी प्रकार की शारीरिक अक्षमता से ग्रस्थ हो जाते हैं। लगभग 15 प्रतिशत लोगों में स्ट्रोक के संकेत पहले ही दिखाई दे जाते हैं, जिसे वार्निंग अटैक भी कहा जाता है। यदि इस अटैक को पहले ही पहचान लिया जाये तो भविष्य में स्ट्रोक से बचाना संभव हगो सकता है।  



एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के सर्वे के मुताबिक स्ट्रोक के लिए बने कारण को यदि प्रतिशत में बांटा जाए तो वह कुछ निम्न प्रकार होगा - मानसिक तनाव - 17.6 प्रतिशत, गुस्सा - 4.1 प्रतिशत, अल्कोहल का अधिक सेवन - 10.7, क्लीनिकल संक्रमण - 8.3, धूम्रपान - 4.1 प्रतिशत, सेक्सुअल एक्टिविटी - 10 प्रतिशत, ट्रॉमा - 1.7 प्रतिशत तथा सर्जरी - 1.7 प्रतिशत।




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