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इन 6 तरह के लोगों को होता है क्रॉनिक माइग्रेन का ज्यादा खतरा, एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण

Who Is At Higher Risk Of Chronic Migraine:हम में से ज्यादातर लोग आए दिन सिरदर्द का सामना करते हैं, अगर ऐसा बार-बार हो रहा है तो यह माइग्रेन हो सकता है

Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarPublished at: Jun 01, 2022Updated at: Jun 01, 2022
इन 6 तरह के लोगों को होता है क्रॉनिक माइग्रेन का ज्यादा खतरा, एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण

सिरदर्द की समस्या लोगों में बहुत आम है। लेकिन अगर किसी को बार-बार सिरदर्द की समस्या हो रही है तो यह आम सिरदर्द नहीं, बल्कि माइग्रेन हो सकता है। माइग्रेन आजकल एक आम बीमारी है। माइग्रेन होने पर कई संकेत और लक्षण दिखाई देते हैं जो कि आगे चलकर भयंकर सिरदर्द में बदल जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति को महीने में 1-2 बार सिरदर्द होता है तो यह सामान्य है, और आमतौर पर इसमें ज्यादा चिंता वाली कोई बात नहीं होती है। लेकिन किसी व्यक्ति को बार-बार यह सिरदर्द की समस्या हो रही है जैसे महीने में 10 से 15 दिन, तो यह क्रोनिक माइग्रेन हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति लगातार 3 महीनों से इस तरह की स्थिति का सामना कर रहा है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि अगर इसका समय रहते उपचार नहीं किया जाता है तो इसके सेहत पर गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

क्रोनिक माइग्रेन की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। क्योंकि महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। हालांकि, यह समस्या किसी को भी हो सकती है और किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। साथ ही ऐसे कई अन्य कारक भी हैं जो माइग्रेन के जोखिम को बढ़ाते हैं। अब सवाल यह है कि किन लोगों को क्रोनिक माइग्रेन का अधिक जोखिम (Who Is At Higher Risk Of Chronic Migraine In Hindi) होता है। इसके बारे में जानने के लिए डॉ अनिल वेंकटचलम (सलाहकार - न्यूरोलॉजी एंड मूवमेंट डिसऑर्डर, नानावती मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल) से बातचीत की। इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

इन 5 लोगों को होता है क्रॉनिक माइग्रेन का अधिक जोखिम (Who Is At Higher Risk Of Chronic Migraine In Hindi)

1. मोटापे से ग्रस्त लोग

डॉ अनिल शरीर का अधिक वजन माइग्रेन को ट्रिगर करता है। मोटापा से शरीर में लगातार सूजन की स्थिति रहती है। जिससे शरीर में दर्द पैदा करने वाले हार्मोन का उत्पादन होता है। माइग्रेन अटैक के दौरान, दर्द को बढ़ावा देने वाले इन्हीं हार्मोनों का एक समान स्राव होता है। जो मोटे लोगों में माइग्रेन के जोखिम को बढ़ाता है।

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2. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया वाले लोग

नींद से जुड़े रोग भी माइग्रेन के जोखिम को बढ़ाते हैं। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सुबह के सिरदर्द के बीच मजबूत संबंध है। इससे पीड़ित व्यक्ति को सुबह सिरदर्द की समस्या रहती है। अगर यह समस्या लगतार बनी रहती है तो यह क्रॉनिक माइग्रेन का कारण बन सकती है।

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3. हाइपरटेंशन से पीड़ित लोग

माइग्रेन और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ही स्थितियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। हाई ब्लड प्रेशर माइग्रेन को ट्रिगर करता है वहीं माइग्रेन के कारण ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होता है। इसलिए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है, नहीं तो यह गंभीर सिरदर्द का कारण बन सकता है। 

4. पारिवारिक इतिहास वाले लोग

अन्य रोगों की तरह माइग्रेन में भी आपके जीन अहम भूमिका निभाता हैं। अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पहले से कोई व्यक्ति माइग्रेन से पीड़ित है या था, तो इस स्थिति में भी व्यक्ति को माइग्रेन होने की अधिक संभावना होती है।

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5. स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने वाले लोग

स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने से माइग्रेन की समस्या हो सकती है। अध्ययनों में भी यह पाया गया है कि ये गतिविधियां माइग्रेन को ट्रिगर करती हैं। इसलिए अगर आपको अक्सर ही सिरदर्द की समस्या रहती है तो स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बना लें, नहीं तो इससे समस्या बढ़ सकती है।

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6. अनिद्रा की समस्या होने पर

अनिद्रा माइग्रेन के बड़े जोखिम कारकों में से एक है। जो लोग ठीक से सो नहीं पाते हैं वे अक्सर ही सिरदर्द और चिड़चिड़ेपन का अनुभव करते हैं। अगर कोई व्यक्ति पहले से सिरदर्द से पीड़ित है तो पर्याप्त नींद न मिल पाने से माइग्रेन का जोखिम बढ़ सकता है।

All Image Source: Freepik.com

(With Inputs: Dr Anil Venkitachalam, Consultant – Neurology and Movement Disorders, Nanavati Max Super Specialty Hospital)

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