फिट रहने के लिए वेट ट्रेनिंग कैसे है मददगार? जानें इसके फ़ायदे और करने के नियम

वेट ट्रेनिंग के माध्यम से आसानी से वजन घटाया जा सकता है। बस आपको इसे करने के नियम पता होने चाहिए, जिससे आपको पूरा फायदा मिले।

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Dec 23, 2020
फिट रहने के लिए वेट ट्रेनिंग कैसे है मददगार? जानें इसके फ़ायदे और करने के नियम

वजन कम करने के लिए केवल खान-पान या व्यायाम ही काफी नहीं होता। आज के समय में लोग कार्डियो को भी एक आसान तरीका मानते हैं। लेकिन वे ये नहीं जानते कि वजन कम करने के लिए वेट ट्रेनिंग भी बेहद काम आ सकती है। कुछ लोगों का मानना होता है कि डंबल और मशीनों से वजन कम करने पर वह टेंपरेरी रहता है। बाद में वह वजन बढ़ सकता है पर ऐसा नहीं होता। यह सच है कि इसे करने से दर्द महसूस होता है लेकिन अगर पहले से ही वार्मअप और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइजेज की जाएं तो इस दर्द पर काबू किया जा सकता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि वेट ट्रेनिंग क्या है? और इसे करने के क्या तरीके हैं? साथ ही हम जानेंगे कि इससे सेहत को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं। पढ़ते हैं आगे...

weight training

वेट ट्रेनिंग क्या है

वेट ट्रेनिंग के अंतर्गत ट्राइसेप्स, बाइसेप्स, कंधे, कमर, चेस्ट, शरीर के ऊपर हिस्सा, सब कुछ आता है। इस ट्रेनिंग से इन हिस्सों पर प्रभाव पड़ता है। जब आप आम एक्सरसाइज से अधिक एक्सरसाइज करते हैं तो इसके माध्यम से आप न केवल मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं बल्कि कनेक्टिव टिशु भी मजबूत होते हैं। ऐसे में वे मांसपेशियां बनना शुरू हो जाती हैं, जिनमें फैट नहीं होता। इन्हें लीन मसल्स टिशु भी कहते हैं। यह मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म के रूप में अधिक एक्टिव होती हैं, जिसके कारण अगर आप एक्सरसाइज ना भी कर पाएं तब भी आप कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

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वेट ट्रेनिंग करते वक्त क्या हैं नियम

  • लीन मसल्स टिशु बनाने के लिए ओवरलोड बेहद जरूरी है। ऐसे में आप रोज के मुकाबले ज्यादा वजन उठाने की कोशिश करें। ऐसा करने से आपके शरीर को ज्यादा वजन उठाने की आदत पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर अगर आप 5 किलो के डंबल्स उठा रहे हैं तो कोशिश करें कि उसे 7 से 8 किलो तक लेकर जाएं इससे आपके शरीर को आदत होगी।
  • कुछ लोगों की आदत होती है कि वे जल्दी परिणाम पाने के चक्कर में जल्दी-जल्दी वजन उठाते हैं। ऐसी भूल आप ना करें। अपने वेट को धीरे धीरे बढ़ाएं। ऐसे में आप अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज करके, व्यायाम करके, रिपीटेशन करके या पहले से ज्यादा वेट उठाकर प्रैक्टिस कर सकते हैं। यह बदलाव धीरे धीरे करें। हफ्ते में एक रूप में अपने लक्ष्य को निश्चित करें कि आप को इस हफ्ते इतना वजन उठाना है।

  • अपनी स्ट्रैंथ को बढ़ाने के लिए उसी से संबंधित एक्सरसाइज करें। इसके लिए आप एक्सपर्ट की मदद भी ले सकते हैं। वजन कम करने के लिए सर्किट ट्रेनिंग बेहद मददगार होती है। इससे आप आसानी से वजन घटा सकते हैं।
  • जैसे वर्कआउट दिन में करना जरूरी है वैसे ही शरीर के लिए आराम भी बेहद जरूरी है। इस समय में आपके शरीर में अनेकों बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जैसे मांसपेशियां बढ़ सकती हैं या उनमें बदलाव आ सकता है। इसीलिए यह सुनिश्चित करना आपका फर्ज है कि आप वेट ट्रेनिंग को हफ्ते में दो या तीन बार ही करें। इससे शरीर में बदलाव को आप आसानी से स्वीकार कर पाएंगे।

वेट ट्रेनिंग के दौरान कुछ जरूरी बातें

  • ध्यान रखें कि अगर आप मशीन के साथ एक्सरसाइज कर रहे हैं तो आपके दोनों हाथ और दोनों पैर काम करते हैं। लेकिन डंबल्स के साथ ऐसा नहीं है डंबल्स के साथ हाथ और पैर अलग-अलग रूप में काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आप चेस्ट प्रेस मशीन पर 10 से 15 किलो वजन उठा रहे हैं तो डंबल से आप 5 किलो तक ही संभाल पाएंगे।
  • अगर आप पहली बार वेट लिफ्टिंग कर रहे हैं तो अपने वर्कआउट पर ज्यादा ध्यान दें, जिससे आपको वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज समझने में दिक्कत ना हो।
  • बता दें कि कंधे हाथ और पैर की मांसपेशियों से अधिक वजन जाग कूल्हे, चेस्ट और कमर की मांसपेशियां सह सकती हैं।
  • अपनी वेट का आंकलन करने के लिए वर्कआउट का इस्तेमाल करें।

वेट ट्रेनिंग से मिलने वाले फायदे

  • बता दें कि वेट ट्रेनिंग के माध्यम से शरीर का संतुलन सुधर सकता है।
  • इससे आपके अंदर आत्मविश्वास और आत्म सम्मान आता है।
  • इससे चोट की संभावना कम हो जाती है।
  • वेट ट्रेनिंग से ना केवल शरीर मजबूत होता है बल्कि मांसपेशियां भी मजबूत होती है।
  • वेट ट्रेनिंग से हड्डियों में मजबूती आती है।

वेट ट्रेनिंग की जरूरी एक्सरसाइज

शरीर के निचले हिस्से के लिए स्क्वाट्स, लंजेस, लेग प्रेसेस, स्टेप अप्स आदि होते हैं। वही ट्राइसेप्स के लिए सीटेड एक्सटेंशन, किकबैक, लाइंग ट्राइसेप्स एक्सटेंशन आदि होते हैं। कमर के लिए वन आर्म रो, डबल आर्म रो, बैक एक्सटेंशन आदि होते हैं। चेस्ट के लिए पुशअप्स, बेंच प्रेस, चेस्ट प्रेस, चेस्ट फ्लाई होते हैं। कंधों के लिए अपराइट रो, ओवरहेड प्रेस, लेटरल रेसेस, फ्रंट रेसेस होते हैं। बाइसेप्स के लिए हैमर कर्ल्स, डंबल बायसेप कर्ल्स, कंसंट्रेशन कर्ल्स, रेजिस्टेंस बैंड कर्ल्स होते हैं।

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