कोरोना के कुछ मरीजों में 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' के लक्षण दिखने से बढ़ी डॉक्टर्स की चिंता, जानें क्या है ये

कोरोनावायरस के कई ऐसे लक्षण सामने आ रहे हैं, जो डॉक्टरों की मुश्किले बढ़ा रहे हैं। इन्हीं लक्षणों में से गुलियन बेरी सिंड्रोम भी शामिल है। 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Nov 23, 2020Updated at: Nov 23, 2020
कोरोना के कुछ मरीजों में 'गुलियन बेरी सिंड्रोम' के लक्षण दिखने से बढ़ी डॉक्टर्स की चिंता, जानें क्या है ये

पूरी दुनिया कोरोनावायरस महामारी से जूझ रही है। इस वायरस से लड़ने के लिए वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में जुटे हैं, लेकिन सभी वैक्सीन अभी ट्रायल या प्री-अप्रूवल स्टेज में हैं। पिछले एक साल से करोड़ों लोगों को कोरोना अपनी चपेट में ले चुका है। अभी भी लगातार कोरोनावायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों द्वारा अबतक कई रिसर्च किए जा चुके हैं, जिसमें कोरोना के नए-नए लक्षण सामने आए हैं। हाल ही में खबरें सामने आई हैं कि मुंबई में कोरोना से पीड़ित मरीजों में  गुलियन बेरी सिंड्रोम के लक्षण दिख रहे हैं।  गुलियन बेरी सिंड्रोम के लक्षण दिखने से डॉक्टर्स परेशान हैं। आइए आपको बताते हैं क्यों है ये सिंड्रोम चिंता का विषय और क्या हैं इसके लक्षण, कारण। 

क्या है गुलियन बेरी सिंड्रोम? (What is Guillain-Barré Syndrome)

गुलियन बेरी सिंड्रोम एक प्रकार का ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। ऑटोइम्यून डिसऑर्डर वो होते हैं, जिनमें शरीर का इम्यून सिस्टम स्वयं ही शरीर के स्वस्थ सेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। गुलियन बेरी सिंड्रोम का शिकार होने पर व्यक्ति का इम्यून सिस्टम उसके ही पेरफेरल नर्वस सिस्टम (Peripheral Nervous System) में मौजूद हेल्दी सेल्स पर अटैक करने लगता है, जिससे कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। शुरुआती तौर पर व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट और चींटी काटने जैसी चुभन महसूस हो सकती है, लेकिन लगातार नजरअंदाज करने पर स्थिति बिगड़ सकती है और व्यक्ति लकवा (Paralysis) का शिकार हो सकता है।

गुलियन बेरी सिंड्रोम के कारण

वर्तमान समय में गुलियन बेरी सिंड्रोम के कारणों का पता नहीं चल सका है। इसके लिए चिकित्सा जगत में कई शोध किए जा रहे हैं। तत्काल में प्रतिरक्षा प्रणाली का नसों पर हमला करना प्रमुख कारण माना जाता है।

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गुलियन बेरी सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Guillain-Barré Syndrome)

  • हाथ-पैरों में झुनझुनी
  • सांस लेने में परेशानी
  • बदन में तेज दर्द
  • आंखों की पुतलियों में जलन
  • सीढ़ी चढ़ने में परेशानी
  • चलने में दिक्कत
  • ब्लड प्रेशर की समस्या
  • दिल की धड़कन बढ़ना
  • शरीर लकवाग्रस्त होने का खतरा

गुलियन बेरी सिंड्रोम का इलाज (Treatment of Guillain-Barré Syndrome )

  • रक्त आधान (blood transfusion)
  • गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को मशीनरी सपोर्ट सिस्टम पर रखा जाता है, जिससे सांस संबंधी परेशानी बढ़ने पर मरीज का समय पर इलाज किया जा सके।
  • इसके अलावा डॉक्टर्स द्वारा थैरेपी दी जाती है ताकि मरीजों को होने वाली समस्याओं को कंट्रोल किया जा सके।

गुलियन बेरी सिंड्रोम का बचाव (Prevention of Guillain-Barré Syndrome )

कोरोनावायरस की तरह की गुलियन बेरी का अभी तक कोई सफल इलाज नहीं मिला है। इस सिंड्रोम से बचने के लिए परहेज करना बहुत जरूरी है। गुलियम बेरी सिंड्रोम से बचाव के टिप्स -

इस समस्या से ग्रसित मरीजों को रात में सोने से पहले अपना पल्स चेक करना चाहिए ताकि आगे होने वाली परेशानी का अंदाजा लगा सकें।

  • पल्स चेक करने के बाद इसे नोटपैड पर जरूर लिखें।
  • फेफड़ों को सुरक्षित रखें। 
  • नियिमत रूप से करें योगासन और व्यायाम
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
  • हमेशा खुली और ताजी हवा में रहने की कोशिश करें।
  • स्ट्रेस ना लें, इससे आपकी समस्या बढ़ सकती है।
  • पर्याप्त रूप से भोजन में विटामिंस शामिल करें। 
  • नसों में ताकत बनाएं रखने के लिए डॉक्टर्स कुछ दवाई लेने की सलाह देते हैं। डॉक्टर की दी दवाइयों को बीच में ना छोड़ें।

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