50 की उम्र के बाद महिलाओं के वजन में कमी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को 26 फीसदी तक कर देती है कमः स्टडी

अमेरिकन कैंसर सोसायटी द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि 50 के बाद महिलाओं के वजन में कमी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करती है। 

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Dec 18, 2019Updated at: Dec 18, 2019
50 की उम्र के बाद महिलाओं के वजन में कमी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को 26 फीसदी तक कर देती है कमः स्टडी

50 से ज्यादा की उम्र वाली महिलाओं का वजन अगर महीने में मात्र डेढ़ किलोग्राम भी कम होता है और लगातार इसी ढंग से वजन में कमी आती है तो उनमें स्तन कैंसर (breast cancer) का जोखिम कम हो सकता है। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 180,000 महिलाओं से प्राप्त डेटा की समीक्षा की और पाया कि महिलाएं जितना अधिक वजन कम करेंगी उनमें ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम उतना ही कम होगा।

breast cancer 

अमेरिकन कैंसर सोसायटी में एपिडेमियोलॉजी रिसर्च के साइंटीफिक डायरेक्टर और अध्ययन के मुख्य लेखक लॉरेन टेरास का कहना है, ''हम बहुत समय से इस बात को जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा वजन ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।'' उन्होंने कहा कि इस अध्ययन में हमने पाया कि 50 या उससे अधिक उम्र में वजन कम होना और लगातार ऐसा होना ब्रेस्ट कैंसर के कम जोखिम से जुड़ा हुआ है, विशेषकर उनमें, जिन्होंने हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी नहीं ली है। यह उन महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है, जिनका वजन बहुत ज्यादा है और कई देशों में दो-तिहाई तक महिलाएं मोटी हैं या मोटापे का शिकार हैं।

अध्ययन के मुताबिक, वे महिलाएं जिनका वजन नौ से अधिक किलोग्राम तक कम होता है और लगातार होता चला जाता है, उनमें 26 फीसदी तक जोखिम कम हो जाता है जबकि जिन महिलाओं का वजन स्थिर रहता है उनमें जोखिम बरकरार रहता है। इसके अलावा जिन महिलाओं का वजन डेढ़ किलो से साढ़े चार किलो तक कम होता है उनमें 13 फीसदी और साढ़े चार से 9 किलोग्राम तक वजन में कमी 16 फीसदी तक जोखिम को कम कर देती है।

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लॉरेन ने कहा, ''क्योंकि वजन कम करना बहुत जरूरी है, इसलिए अगर आपका वजन 50 की उम्र के बाद बढ़ता है तब भी बहुत देर नहीं हुई है। अगर वह तब वजन कम करने का प्रयास करती हैं तब भी उनमें जोखिम उन महिलाओं के बराबर होगा, जिनका वजन स्थिर रहता है।''

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शोधकर्ताओं ने 3 और उससे अधिक वजन वाली रिपोर्ट के साथ180,885 महिलाओं पर किए अध्ययन में ब्रेस्ट कैंसर फॉलो-अप पाया। वजन घटाने को अध्ययन के शुरुआती 5.2 साल के बाद सूची में डाला गया। उसके 4.6 साल बाद अन्य आंकडें जुटाए गए और शोधकर्ताओं ने लगातार वजन घटाने की प्रक्रिया का पता लगाया। ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए औसतन 8.3 साल तक महिलाओं पर नजर रखी गई। 

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लॉरेन को आशा है कि वजन घटाने और ब्रेस्ट कैंसर के कम जोखिम के बीच संबंध से वे महिलाएं प्रेरित होंगी मोटापे का शिकार हैं या मोटी हैं।

न्यूयॉर्क स्थित माउंट सिनाई वेस्ट में ब्रेस्ट सर्जरी की चीफ डॉ. स्टेफनी बर्निक का कहना है कि हालांकि नए अध्ययन में वजन घटने और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बीच संबंध पाया गया है लेकिन यह इसके कारण और प्रभाव को साबित नहीं करता है।

उन्होंने कहा, '' वे लोग, जिन्होंने वजन घटाया है वह आमतौर पर अन्य चीजें करते हैं। वे सामान्यतौर पर ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं और बेहतर खाना खाते हैं। यह जीवनशैली में बदलाव हो सकते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करते हैं।''

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