कुपोषण के कारण गरीब देशों में बढ़ रहा मोटापे और समय से पहले मौत का खतराः रिपोर्ट

द लांसेट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुपोषण बच्चों में मोटापे और समय से पहले मृत्यु का कारण बन रहा है। गरीब देशों में महिलाएं भी इसका शिकार हैं।

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Dec 17, 2019Updated at: Dec 17, 2019
कुपोषण के कारण गरीब देशों में बढ़ रहा मोटापे और समय से पहले मौत का खतराः रिपोर्ट

कई वर्षों से कम और मध्यम आय वाले देशों में बीमारियों के बढ़ते जोखिम के बारे में चेतावनियां जारी की गई है लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। द लांसेट में सोमवार को छपी एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, कम और मध्यम आय वाले देश मोटापे और अल्पपोषण की दो धारी तलवार से अपनी विकास वृद्धि को गिरते हुए देख रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों ही समस्याएं किफायती स्वस्थ भोजन तक पहुंच के कारण हो रही है। मेडिकल जर्नल में छपी रिपोर्ट कहती है कि कुपोषण के इस दोहरे वार से करीब 130 देशों का एक तिहाई हिस्सा प्रभावित है। इन 130 देशों को कम या फिर मध्यम आय वाले देशों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, इससे कहीं ज्यादा चौंका देने वाली बात ये सामने आई है कि एक ही घर में अतिरिक्त भार वाली मां और अल्पपोषण से ग्रस्त बच्चा दोनों रह रहे हैं। कुपोषण के दोनों रूप स्वास्थ्य समस्याओं और समय से पहले मृत्यु से जुड़े हुए हैं। इतना बी नहीं ये देश की स्वास्थ्य प्रणाली और श्रम उत्पादकता पर बहुत ज्यादा भार डाल रहे हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर बनाई गई इस रिपोर्ट में कहा गया अत्यधिक वजन को किसी एक अमीर देश की समस्या और या गरीबों के संरक्षण को कम करने के रूप में नहीं देखा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14.9 करोड़ से अधिक बच्चे अविकसित हैं। वहीं बचपन में अधिक वजन और मोटापा लगभग हर जगह बढ़ रहा है। इसके साथ ही पोषणयुक्त डाइट न मिलना विश्व में पांच में से एक (22 प्रतिशत) वयस्क की मौत के लिए जिम्मेदार है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, ''निष्क्रियता की आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कीमत आने वाले दशकों में लोगों और समाज के विकास और वृद्धि को बाधित करेगी।'' रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापे और अल्पपोषण की वृद्धि दर गरीब देशों में ज्यादा बढ़ रही है। इसके साथ ही जरूरत से ज्यादा वजन वाले लोगों की तादाद भी तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही लंबे समय से भूख भी चुनौती बनकर खड़ी हुई है। 

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रिपोर्ट के मुताबिक, रिपोर्ट में सस्ते, सॉल्ट, शुगर और फैट में पेट को संतुष्ट रखने वाले फूड, काम, घर और परिवहन पर शारीरिक गतिविधियों में बड़ी कमी में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट कहती है कुछ देशों में मोटापा और अल्पपोषण दोनों करीब 35 फीसदी घरों में पाया गया है। अजरबैजान, ग्वाटेमाला, मिस्र, कोमोरोस और साओ टोम और प्रिंसिपे में मोटापे और अल्पपोषण की समस्या का स्तर बहुत अधिक है।

कभी-कभार मोटापे और अल्पपोषण को एक अकेले बच्चे में मांपा गया। दरअसल ऐसा पोषण की कमी के कारण अत्यधिक वजन और बाधित विकास के संयोजन के कारण हुआ है। अल्बेनिया में यह दर सबसे अधिक 15 फीसदी दर्ज की गई। करीब सभी देशों में बच्चों के विकास में बाधा या कमी देखी गई है। इतना ही नहीं लगभग सभी देशों में अत्यधिक भार वाली महिलाएं भी वृद्धि दर्ज की गई है।

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