Doctor Verified

बच्चों में वायरल फीवर के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

बच्चों में वायरल फीवर की समस्या होने पर उनके शरीर का तापमान बढ़ सकता है। इसके अलावा कई अन्य लक्षण दिखते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Feb 09, 2022Updated at: Feb 09, 2022
बच्चों में वायरल फीवर के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

मौसम बदलने के साथ-साथ वायरल फीवर (Viral fever in Hindi) होने की संभावना भी बढ़ जाती है। हालांकि, हर व्यक्ति को वायरस हो यह जरूरी नहीं, वयस्कों की तुलना में बच्चों को वायरल फीवर होने की संभावना अधिक रहती है। इसका कारण उनकी कमजोर इम्यूनिटी है। बच्चों को वायरस फीवर होने पर ( Viral Fever Symptoms in Children ) सुस्ती, भूख न लगना, शरीर का तापमान बढ़ना, ठंड लगना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अधिकांश वायरल फीवर समय और कुछ सहायक इलाज जैसे कोल्ड कंप्रेस और दवाओं से ठीक हो जाता है। हालांकि, शरीर का तापमान बहुत ज्यादा होने पर चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। आइए इस लेख में जानते हैं वायरल फीवर के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में ( Viral Fever Detail in Hindi ) विस्तार से- 

बच्चों में वायरल फीवर के लक्षण ( Viral Fever Symptoms in Children )

बच्चे अपनी अंदरुनी समस्याओं को ज्यादा व्यक्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे में उनके लक्षणों के आधार पर आप उनकी समस्याओं का अंदाजा लगा सकते हैं। बच्चों में वायरस फीवर के लक्षण कई (Viral Fever Symptoms) हो सकते हैं, जिसमें शरीर का तापमान बढ़ना, चिड़चिड़े होना, सुस्त रहना जैसे लक्षण शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों में कई अन्य लक्षण दिख हैं, जैसे-

  • चिड़चिड़े होना
  • सुस्त होना
  • शांत रहना
  • शरीर का तापमान बढ़ना
  • खाना न खाना
  • काफी ज्यादा रोना
  • तेजी से सांस लेना
  • सोने या खाने की आदतों में परिवर्तन
  • उल्टी होना
  • आंखों का लाल पड़ना

बोलने वाले बच्चे आपको कुछ अन्य लक्षण बता सकते हैं। जैसे-

  • शरीर में दर्द महसूस होना
  • सिरदर्द होना
  • सोने में कठिनाई होना
  • ठंड लगना
  • भूख न लगना इत्यादि।

बच्चों को वायरल फीवर होने पर शरीर का तापमान ( Viral fever Body Temperature in children )

  • रेक्टल, कान या सिर का तापमान - 100.4°F (38.0°C) से अधिक होना।
  • मुंह के अंदर का तापमान - 100 डिग्री फारेनहाइट (37.8 डिग्री सेल्सियस) से अधिक होना
  • बाजू के अंदर का तापमान - 99 डिग्री फारेनहाइट (37.2 डिग्री सेल्सियस) से अधिक होना।

बच्चों में वायरस फीवर के कारण ( Viral Fever Causes in Children in Hindi )

वायरल फीवर ( Viral Fever Causes ) के कई संभावित कारण हैं, जिनमें सर्दी और फ्लू के वायरस शामिल हो सकते हैं। अधिकतर बच्चों में वायरल फीवर के कारण अस्पष्ट होते हैं। वायरस फीवर से पीड़ित बच्चों पर हुए अध्ययन में देखा गया है कि बुखार होने के बावजूद बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन के कोई लक्षण नहीं थे। वहीं, उनके शरीर में एक या एक से अधिक वायरस मौजूद थे। इन वायरस में सबसे आम एडेनोवायरस, मानव हर्पीसवायरस 6, एंटरोवायरस और पारेकोवायरस शामिल थे। 

इसका मतलब है कि छोटे बच्चों में वारयल फीवर का सबसे आम कारण वायरस होता है। ऐसे में बच्चों को एंटीबायोटिक्स दवाएं देना प्रभावकारी साबित नहीं हो सकता है। क्योंकि वायरल संक्रमण एंटीबायोटिक्स प्रभावी नहीं होता है।

बच्चों में वायरल फीवर का निदान ( Viral Fever Diagnosis in Children in Hindi )

बच्चों में वायरल फीवर का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री जानने की कोशिश करता है। इसके बाद उनके लक्षणों के बारे में आपसे पूछ सकता है। उदाहरण के लिए - बच्चे को कब से फीवर है, बच्चा सुस्त है या नहीं, शरीर का तापमान कितना रहता है, खाना कैसे खा रहे है इत्यादि।

इसके बाद डॉक्टर आपसे कुछ शारीरिक परीक्षण करवाने की सलाह दे सकता है। जिसमें ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और थूक का टेस्ट शामिल है।

बच्चे में वायरल फीवर कितने समय तक रह सकता है? (How long can viral fever last in child?)

बच्चों को वायरस के कारण होने वाला बुखार दो से तीन दिनों तक और कभी-कभी दो सप्ताह तक भी रह सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि अगर आपके बच्चे को बैक्टीरियल संक्रमण के कारण बुखार है, तो इस स्थिति में एंटीबायोटिक द्वारा बच्चों का इलाज किया जाता है। तभी बच्चा जल्द से जल्द ठीक हो सकता है।

इसे भी पढ़ें - वायरल बुखार और इंफेक्शन दूर करने के 7 घरेलू नुस्खे, जानें डॉक्टर से

बच्चे को बुखार होने पर क्या करें ? ( How can reduce child fever naturally? )

  •  बच्चे को हल्के कपड़े पहनाएं। अतिरिक्त कपड़े शरीर की गर्मी को रोकता है और शरीर के तापमान को बढ़ाने का कारण बन सकता है।
  • फीवर होने पर बच्चे को पानी, जूस, खिचड़ी जैसे तरल पदार्थों का सेवन कराएं।
  • फीवर होने पर बच्चे को गुनगुने पानी से नहलाएं।
  • बच्चे को नहलाते वक्त एल्कोहल युक्त चीजों का इस्तेमाल न करें। 

बच्चों में वायरल फीवर का बचाव ( Viral Fever Prevention in Children in Hindi ) 

वारयल फीवर संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, सांस लेने या संक्रमित सतहों को छूने से फैलता है। ऐसे में बच्चों को संक्रमित व्यक्ति के दूर रखें।

  • बच्चों को हमेशा अच्छे से हाथ धुलाने की आदत डलवाएं।
  • संक्रमित व्यक्ति से दूर रखें।
  • साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • तरल पदार्थों का सेवन कराएं।
  • छींकते या खांसते वक्त मुंह को ढकें, इत्यादि। 

बच्चों में वायरस फीवर की समस्या होने पर उनका विशेष ध्यान रखें। खाना न खाने पर उन्हें तरल पदार्थों का सेवन कराएं, ताकि वह शारीरिक रूप से कमजोर न हों। साथ ही उनके लक्षणों पर ध्यान दें और डॉक्टर की उचित सलाह दें। ताकि आपका बच्चा जल्द से जल्द संक्रमण से मुक्त सके।

Disclaimer