Thu Oct 15, 2026 | 01:14 AM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

प्रेग्नेंसी में UTI क्यों होता है? डॉक्टर से जानें UTI का भ्रूण पर असर और इलाज के तरीके

प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलावों और पेशाब का फ्लो धीमा होने के कारण पेशाब नली में कई बार बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिसके कारण UTI हो सकता है। इस लेख में डॉक्टर से प्रेग्नेंसी में UTI होने के कारण, लक्षण, बच्चे के लिए खतरे और इलाज के बारे में जानें।
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प्रेग्नेंसी में UTI की समस्या होना बहुत आम है। Cleveland Clinic के अनुसार, प्रेग्नेंसी में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) पेशाब की नली में होने वाला इंफेक्शन है। दरअसल, पेशाब नली के माध्यम से बिना किसी संक्रमण के बाहर निकलता है, लेकिन बाहर के बैक्टीरिया अगर यूरिनरी सिस्टम में चले जाएं, तो इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी में UTI बढ़ने के कई कारण होते हैं, जिसमें गर्भाशय बढ़ना, यूरिन ब्लैडर पर प्रेशर पड़ना और इम्यून सिस्टम का कमजोर होना शामिल है। प्रेग्नेंसी में UTI होने के कारणों और भ्रूण पर इसके असर के बारे में हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director, गायनेकोलॉजिस्ट and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

प्रेग्नेंसी में UTI कितनी तरह का होता है?

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार, प्रेग्नेंसी में UTI चार तरह का होता है, जिनकी पहचान करना महत्वपूर्ण है।

असिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियुरिया (Asymptomatic Bacteriuria)

इस कंडीशन में प्रेग्नेंट महिला को UTI के लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन यूरिन कल्चर में बैक्टीरिया मिलते हैं। यह कंडीशन करीब 2 से 10 फीसदी प्रेग्नेंट महिलाओं में देखने को मिलती है। अगर समय पर इसका इलाज हो जाए, तो किडनी इंफेक्शन का खतरा करीब 20 से 35% तक कम हो जाता है। इस बारे में डॉ. शोभा कहती हैं, "महिला जब प्रेग्नेंट होती है, तब यूरिन कल्चर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, ताकि बिना लक्षण के भी UTI की पहचान हो सके। अगर महिला में बैक्टीरिया की संख्या 100,000 CFU/mL या उससे ज्यादा होती है, तो पांच से सात दिन का एंटीबायोटिक कोर्स दिया जा सकता है।"

एक्यूट सिस्टाइटिस (Acute Cystitis)

ACOG के मुताबिक, इस स्थिति में प्रेग्नेंट महिला को पेशाब में जलन और बार-बार पेशाब आने लगता है। अगर ये लक्षण दिखाई दें, तो यूरिन कल्चर टेस्ट कराया जाता है। डॉ. शोभा गुप्ता ने कहा, "कल्चर रिपोर्ट आने के बाद ही दवा देनी चाहिए क्योंकि कई बार एमोक्सिसिलिन या एम्पिसिलिन देने के कारण ई.कोलाई बैक्टीरिया के प्रति रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। इसका इलाज भी पांच से सात दिन की एंटीबायोटिक दवा देकर किया जा सकता है।"

पायलोनेफ्राइटिस (Pyelonephritis)

प्रेग्नेंसी में UTI की यह कंडीशन काफी गंभीर होती है। इसमें महिला को अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है। ACOG की इसी रिपोर्ट में बताया गया कि अगर महिला को 100.4°F या इससे ज्यादा बुखार हो, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, मतली और उल्टी हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। डॉ. शोभा के अनुसार, "इस कंडीशन में किडनी में इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है, इसलिए फिजिकल चेकअप और यूरिन कल्चर टेस्ट किया जाता है। शुरुआत में महिला को नसों के जरिए (IV) एंटीबायोटिक दवा दी जाती है, इसके बाद ओरल दवाओं पर स्विच किया जा सकता है। इस स्थिति में महिला को 14 दिनों का एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करना जरूरी है।”

बार-बार होने वाला इंफेक्शन (Recurrent UTI)

अगर महिला को प्रेग्नेंसी में दो या इससे ज्यादा बार UTI होता है, तो इसे बार-बार होने वाला इंफेक्शन माना जाता है। ACOG की मानें तो ऐसी कंडीशन में डॉक्टर महिला को पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान रात में एक बार कम खुराक वाली एंटीबायोटिक लेने की सलाह दे सकते हैं ताकि इंफेक्शन वापस न आए।

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प्रेग्नेंसी में UTI होने के कारण

डॉ. शोभा के अनुसार, प्रेग्नेंसी में UTI बढ़ने के ये कारण हो सकते हैं।

  1. प्रोजेस्टेरोन हार्मोन पेशाब की नलियों (Ureters) को ढीला कर देता है, जिससे UTI का रिस्क बढ़ जाता है।
  2. प्रेग्नेंसी में यूटरेस बढ़ने लगता है और इसका प्रेशर यूरिन ब्लैडर पर पड़ता है। इस वजह से प्रेग्नेंसी में महिलाओं का ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता और UTI होने का कारण बन सकता है।
  3. प्रेग्नेंसी में महिलाओं को कई बार पेशाब रुकने की समस्या होती है, जिससे ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता और यूरिनरी ट्रैक्ट में इस वजह से बैक्टीरिया पनप सकते हैं। अगर समय पर इलाज न हो, तो कई बार बैक्टीरिया ऊपर किडनी तक पहुंच सकते हैं।
  4. प्रेग्नेंसी इम्यून सिस्टम को दबा देती है। इस वजह से UTI जैसे कई इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है।

प्रेग्नेंसी में UTI के लक्षण

डॉ. शोभा गुप्ता ने बताया कि महिलाओं को खासतौर पर प्रेग्नेंसी में UTI के लक्षणों की पहचान करके तुरंत इलाज कराना चाहिए।

  1. अगर पेशाब करते समय जलन महसूस हो, तो यह UTI का सबसे सामान्य लक्षण है।
  2. थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पेशाब जाना पड़ रहा है।
  3. पेशाब का रंग हल्का लाल, गहरा गुलाबी या भूरा दिख रहा है, तो पेशाब में ब्लड होने का लक्षण है।
  4. बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना, जो जल्दी खत्म न होता हो।
  5. पेल्विक एरिया में दर्द होना या भारीपन महसूस हो, तो UTI हो सकता है।

प्रेग्नेंसी में UTI किन महिलाओं को ज्यादा होने का रिस्क हो सकता है?

जर्नल ऑफ विमेंस हेल्थ (Journal of Women's Health) 2021 में प्रकाशित इस रिसर्च में 41,869 प्रेग्नेंट महिलाओं को शामिल किया गया था। इस रिसर्च का उद्देश्य प्रेग्नेंसी में होने वाले UTI इंफेक्शन के रिस्क कारकों की पहचान करना था। इस अध्ययन में पाया गया है कि करीब 18% महिलाओं ने प्रेग्नेंसी में UTI होने की सूचना दी। इस रिसर्च से यह भी पता चला कि जिन महिलाओं की इनकम कम थी, उनमें UTI की दर काफी ज्यादा थी। इसके अलावा, डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को UTI होने का खतरा सामान्य से ज्यादा था।

प्रेग्नेंसी में UTI होने पर जटिलताएं

StatPearls में प्रकाशित किताब के चैप्टर Urinary Tract Infection in Pregnancy में बताया गया है कि प्रेग्नेंसी में UTI होने पर महिलाओं को कई गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।
असिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियुरिया में महिला को लक्षणों की पहचान ही नहीं हो पाती। ऐसे में अगर समय पर इलाज न हो, तो मां और बच्चे दोनों को कई गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स हो सकते हैं।

  1. समय पर इलाज न होने पर किडनी में गंभीर इंफेक्शन हो सकता है।
  2. बच्चे का समय से पहले जन्म हो सकता है। पायलोनेफ्राइटिस के करीब 11% मामलों में समय से पहले डिलीवरी हुई है।
  3. जन्म के समय शिशु का वजन 2800 ग्राम से कम होना और यह करीब 8.2% मामलों में देखा गया है।
  4. 6.3% मामलों में डिलीवरी से पहले ही पानी की थैली फट गई थी।
  5. इंफेक्शन खून में फैलकर गंभीर बीमारियां बढ़ा सकता है। पायलोनेफ्राइटिस की स्थिति में 13.3% प्रेग्नेंट महिलाओं को सेप्सिस और 1.9% को सेप्टिक शॉक की समस्या हो सकती है।
  6. UTI से होने वाले इंफेक्शन के इलाज के दौरान लगभग 10% मरीजों में एंडोटॉक्सिन के कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसमें फेफड़ों में पानी भरना या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम) जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
  7. महिलाओं को किडनी इंफेक्शन के कारण एनीमिया की समस्या देखने को मिली है।
  8. कुछ मामलों में किडनी में मवाद पड़ना, ब्लड में थक्के जमना या गर्भाशय में संकुचन भी हो सकता है।

प्रेग्नेंसी में UTI कैसे चेक करें?

डॉ. शोभा गुप्ता के मुताबिक, “यूरिन सैंपल लेकर लैब में टेस्ट के लिए भेजा जाता है, ताकि यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया चेक किए जा सके। UTI चेक करने के लिए यूरिन कल्चर कराया जाता है। अगर महिला के लक्षण गंभीर होते हैं, तो अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है ताकि पता किया जा सके कि इंफेक्शन किडनी तक तो नहीं पहुंचा है।”

प्रेग्नेंसी में UTI का इलाज

डॉ. शोभा कहती हैं, “आमतौर पर प्रेग्नेंसी में UTI होने पर महिलाओं को एंटीबायोटिक्स का कोर्स ही कराया जाता है। मरीज की कंडीशन के अनुसार, इसे तीन से सात दिन तक दिया जा सकता है। डिलीवरी से ठीक पहले कुछ खास तरह की एंटीबायोटिक दवाओं के कारण शिशु को पीलिया का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए हम दवा देते समय महिला के प्रेग्नेंसी ट्राइमेस्टर का भी ध्यान रखते हैं। मैं महिलाओं को कहना चाहूंगी कि प्रेग्नेंसी में किसी भी तरह की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें और खासतौर पर एंटीबायोटिक्स।"

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प्रेग्नेंसी में UTI से बचाव के तरीके

StatPearls में प्रकाशित किताब के चैप्टर Urinary Tract Infection in Pregnancy में प्रेग्नेंसी में महिलाओं को UTI से बचाव की खास सलाह दी गई है।

  1. प्रेग्नेंट महिलाओं को खासतौर पर बार-बार हाथ धोना और गुप्तांगों के आसपास साफ सफाई रखना बहुत जरूरी है।
  2. प्रेग्नेंट महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है।
  3. नियमित रूप से पेशाब करने से पेशाब के जमा होने या रुकने की समस्या से बचा जा सकता है।
  4. डिलीवरी से पहले बिना लक्षणों वाले इन्फेक्शन की स्क्रीनिंग करना बहुत जरूरी है। अगर रिजल्ट पॉजिटिव आता है, तो इसका तुरंत इलाज किया जाना चाहिए ताकि यह गंभीर और लक्षण वाले इन्फेक्शन में न बदल जाए।
  5. जिन महिलाओं को बार-बार UTI होने का रिस्क होता है, उन्हें बचाव के तौर पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जा सकती हैं।

डॉक्टर से कब मिलें?

डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, जब महिला को पेशाब करते समय जलन, पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन, पेशाब पूरी तरह से न निकलना और यूरिन ब्लैडर खाली महसूस न होने पर डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी में UTI होने पर मां और भ्रूण दोनों के लिए खतरा हो सकता है, इसलिए UTI के लक्षणों की पहचान करना जरूरी है। लक्षणों की पहचान करके तुरंत इलाज कराना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर इलाज न कराने से किडनी में इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है। इसके अलावा, शिशु के जन्म के समय वजन कम होना और समय से पहले डिलीवरी हो सकती है। डॉ. शोभा कहती हैं कि महिलाओं को खुद से कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि ये दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है।

FAQ

  • क्या गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स लेना शिशु के लिए सुरक्षित है?

    प्रेग्नेंसी में डॉक्टर सिर्फ वही एंटीबायोटिक्स देते हैं, जो सुरक्षित होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवा न लें।
  • आगे से पीछे पोंछने का नियम क्या है?

    शौचालय के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर (Front to Back) सफाई करनी चाहिए। इससे एनस के पास मौजूद ई.कोलाई बैक्टीरिया को पेशाब की नली में जाने से रोका जा सकता है।
  • क्या डायबिटीज वाली गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा है?

    डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के पेशाब में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, जिस वजह से इंफेक्शन का खतरा ज्यादा हो सकता है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 01, 2026 22:23 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • May 01, 2026 22:23 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta