टीनएज बच्चों में मानसिक समस्याएं होने पर दिखते हैं ये संकेत, पेरेंट्स जानें कैसे करें डील

टीनएज में मानसिक बीमारी होना बेहद सामान्य है। इसलिए अगर आप टीनएज बच्चों के माता-पिता हैं, तो आपको इन फैक्ट्स के बारे में जरूर जानना चाहिए।

 
Written by: Updated at: Jan 14, 2023 14:00 IST
टीनएज बच्चों में मानसिक समस्याएं होने पर दिखते हैं ये संकेत, पेरेंट्स जानें कैसे करें डील

Mental Illness in Teens: आजकल की भागदौड़ भरी और आगे बढ़ने की चाह वाली जिंदगी में न सिर्फ वयस्क, बल्कि टीनएजर्स (युवा व किशोर) भी मानसिक बीमारी का सामना कर रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि वयस्कों की तुलना में टीनएजर्स व युवा मानसिक रूप से अधिक पीड़ित होते हैं। क्योंकि यह उनके बढ़ने की उम्र होती है, उस उम्र में उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं और उन्हें कई चीजों का सामना करना पड़ता है। मानसिक रूप से पीड़ित होने पर अक्सर युवा सही तरीके से सोच नहीं पाते हैं, अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते हैं। मानसिक रूप से पीड़ित होने पर अक्सर उनके पेरेंट्स भी उनकी आदतों व लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में समय के साथ उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है और उन्हें रोजमर्रा के कामों में दिक्कत हो सकती है। इसलिए अगर आप भी एक टीनएजर के माता-पिता हैं, तो आपको मानसिक बीमारी या मेंटल हेल्थ के बारे में कुछ फैक्ट्स जरूर मालूम होने चाहिए। चलिए, अनानके फॉउंडेशन की साइकोलोजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से जानते इस बारे में विस्तार से -

हम जो समझते हैं मानसिक बीमारी उससे काफी अलग है 

हर उम्र के लोगों के लिए मानसिक बीमारी अलग-अलग हो सकती है, खासकर युवा में मानसिक बीमारी अलग हो सकती है। दरअसल, युवा यानी किशोरों की एक अलग मानसिकता होती है। उनकी मानसिक बीमारी को स्कूल में नंबर कम आना, तुलना या फिर इंटरस्ट से जोड़ा जा सकता है। यानी टीन्स व युवा अगर मानसिक रूप से प्रभावित होते हैं, तो उनके कारण वयस्कों की तुलना में अलग हो सकते हैं। जब कोई युवा मानसिक बीमारी का सामना कर रहा होता है, तो उसे कुछ लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। 

  • भूख में कमी
  • आत्महत्या का सोचना
  • एनर्जा में कमी आना
  • नींद न आना
  • ध्यान लगाने में दिक्कत होना
  • काम करने में परेशानी    

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child mental health

युवाओं में मानसिक बीमारी का पता लगाने वाले संकेत अलग-अलग होते हैं

मानसिक बीमारी वाले अधिकतर टीन्स में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। मानसिक रूप से पीड़ित होने पर कोई टीन्स नींद संबंधी विकार का सामना कर सकता है, वहीं दूसरी टीन्स को थकान या कमजोरी का अनुभव हो सकता है। कई टीन्स मानसिक रूप से पीड़ित होने पर बेचैनी, मांसपेशियों में दर्द का अनुभव भी कर सकता है। यानी टीन्स में मानसिक बीमारी का पता लगाने के संकेत अलग-अलग होते हैं। आपको बता दें कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि टीन्स अलग-अलग कारणों की वजह से मानसिक रूप से प्रभावित हो सकता है। वहीं, उनका अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का तरीका भी अलग होता है और उससे निपटने का तरीका भी अलग होता है। 

युवाओं के व्यवहार में बदलाव आने पर फैमिली डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए 

अगर आपके टीनएज लड़का या लड़की के व्यवहार में कोई बदलाव नजर आ रहा है, तो आप खुद ही उसे मानसिक रूप से पीड़ित समझकर मनोचिकित्सक के पास न ले जाएं। बल्कि पहले आपको अपने फैमिली डॉक्टर या फिर फिजिशियन से मिलना चाहिए। क्योंकि कई बार टीन्स अंजान लोगों के सामने डरते हैं, कॉन्फिडेंट नहीं रहते हैं और बात करने में असहज रहते हैं, ऐसे में उनकी मानसिक स्थिति सही तरीके से निर्धारित नहीं हो पाती है और मनोचिकित्सक उन्हें मानसिक रूप से पीड़ित समझ लेते हैं। इसलिए माता-पिता को यह फैक्ट भी समझना चाहिए कि टीन्स को पहले जानने वाले डॉक्टर के पास ही लेकर जाना चाहिए। अगर वे मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह देते हैं, तो जब लेकर जा सकते हैं। 

युवाओं में मानसिक बीमारी होना अधिक आम  

अकसर लोगों को लगता है कि अभी तो यह बहुत छोटा है, ऐसे में यह मानसिक रूप से पीड़ित कैसे हो सकता है। या फिर यह दिमागी रूप से कमजोर कैसे हो सकता है। जब यह एक सच्चाई है कि टीनएज लड़कियां और लड़के मानसिक रूप से अधिक पीड़ित रहते हैं। क्योंकि टीनएज लोगों के मन में काफी कुछ चल रहा होता है, उन्हें पता नहीं होता है कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है। कई चीजों के बारे में सोचने और समझने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। ऐसे में जब कोई भी काम उनकी चाह के अनुसार नहीं होता है, तो वे अवसाद और चिंता के बीच घिर जाते हैं। इसलिए ऐसा बिल्कुल न सोचे कि टीनएज बच्चे मानसिक रूप से पीड़ित नहीं हो सकते हैं।  

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युवाओं को अपनी मानसिक बीमारी को छिपाने की कोशिश करते हैं 

युवा अपनी समस्याओं को बड़ी आसानी से अपने माता-पिता से छुपा लेते हैं। अगर किशोरों को कोई बात परेशान भी कर रही होती है, तो वे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य लोगों के सामने ऐसा दिखाते हैं, जैसे सब कुछ सामान्य है और उनकी जिंदगी में कोई परेशानी नहीं है। जब टीनएज लोग अपनी भावनाओं को अपने मन के अंदर ही समेट कर रखते हैं, तो समस्या समय के साथ अधिक गंभीर होने लगती है। ऐसे में पेरेंट्स को अपने टीनएज बच्चों की सभी हरकतों पर नजर रखनी चाहिए। पेरेंट्स को बच्चों की आदतों, दिनचर्या पर नजर रखना चाहिए, ताकि वे किसी मानसिक स्थिति से पीड़ित न हो। और अगर है भी तो वह आसानी से उससे बाहर निकल सके।

 

 
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