बच्चों में थायराइड के लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

थायराइड की समस्या बच्चों को भी हो सकती है। इसलिए उनके खानपान पर विशेष ध्यान दें। चलिए जानते हैं बच्चों में थायराइड के कारण, लक्षण और उपचार

 

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraUpdated at: Aug 20, 2021 16:08 IST
बच्चों में थायराइड के लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

हम में से अधिकतर लोगों को लगता है कि थायराइड बड़ों को होने वाली समस्या है। लेकिन आपको बता दें कि यह बच्चों को भी हो सकती है। हालांकि, पुरुषों और बच्चों की तुलना में महिलाओं को थायराइड की समस्या अधिक होती है। जी हां, बच्चों को भी थायराइड समस्या हो सकती है। यह समस्या जब होती है, जब आप बच्चों के खानपान की आदतों पर अच्छे से ध्यान नहीं देते हैं। ऐसा करने से उनके शरीर में कई पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, जिसके कारण बच्चों को कई गंभीर बीमारी हो जाती है। उन्हीं बीमारियों में से एक है थायराइड की समस्या। चलिए नोएडा स्थित न्यू हॉस्पिटल के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर विकास कुमार अग्रवाल (Neo Hospital Pediatrician Doctor Vikas Kumar Aggarwal) से जानते हैं बच्चों में होने वाले थायराइड के बारे में विस्तार से -

बच्चों में होने वाले थायराइड के प्रकार

गले में मौजूद तितली के आकार की ग्रंथि को थायराइड ग्लैंड कहते हैं। यह ग्रैंड हमारे शरीर में टी3 और टी4 हार्मोंस का निर्माण करता है। इन हार्मोंस की मदद से शरीर में कई तरह की गतिविधियां नियंत्रित रहती हैं। जैसे- धड़कनों का धड़ना, मेटाबॉलिज्म को बनाए रखना मूड को बेहतर करना, शरीर के तापमान को कंट्रोल करना इत्यादि। इन हार्मोंस के असंतुलन होने पर शरीर में ये सभी गतिविधियां गड़बड़ाने लग जाती हैं। बच्चे हो या बड़े दोनों ही स्थितियों में दो प्रकार के थायराइड होते हैं। 

हाइपोथायराडिज्म - इस स्थिति में थायराइड ग्रैंड हार्मोंस का निर्माण कम कर देता है। जिसकी वजह से कई स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। 

हाइपरथायराडिज्म - इस स्थिति में जरूरत से ज्यादा हार्मोंस बनने लगता है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। 

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बच्चों को कितना होना चाहिए TSH लेवल?

टीएसएच एक टेस्ट है, जिसमें पता लगाया जाता है कि थायराइड ग्लैंड कितना उत्तेजित है। यह हमारे मस्तिष्क के पिट्यूटरी ग्रंथि में मौजूद होता है। इसमें टी4 और टी3 को नियंत्रित करने की क्षमता होती है। डॉक्टर  विकास कुमार बताते है कि 0 से 2 सप्ताह के बच्चों में टीएसएच का स्तर 1.6–24.3 mU/L होना चाहिए। वहीं, 2 से 4 सप्ताह के बच्चों में टीएसएच का स्तर 0.58–5.57 mU/L और 20 सप्ताह से 18 साल के बच्चों में थायराइड का सामान्य स्तर 0.55–5.31 mU/L होना चाहिए। इससे ज्यादा या कम टीएसएच होना थायराइड की निशानी हो सकती है।

बच्चों में थायराइड होने का कारण

जन्मजात - प्रीमैच्योर बेबी जो डाउन सिंड्रोम की समस्या से पीड़ित होते हैं, उन्हें जन्मजात थायराइड की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ऑटोइम्यून थायराइड से मां के द्वारा बच्चों को थायराइड की परेशानी हो सकती है। इसके अलावा जुड़वा बच्चे, आईवीएफ की वजह से भी कुछ मामलों में बच्चों में थायराइड की समस्या देखी गई है। 

आयोडीन की कमी- अगर आप बच्चों के खानपान पर सही से ध्यान नहीं दे पाते हैं, तो उन्हें थायराइड हो सकता है। खासतौर पर आयोडीन युक्त आहार की कमी के कारण शिशुओं को थायडाइड की समस्या हो सकती है। 

ऑटोइम्यून - यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही थायराइड ग्लैंड को नुकसान पहुंचाने लगता है। 

इसके अलावा हाशिमोटो थायरोडिटिस और ग्रेव्स नामक बीमारी की वजह से बच्चों को थायराइड की समस्या हो सकती है। 

बच्चों में थायराइड के लक्षण

बच्चों में उम्र और थायराइड के प्रकार के आधार पर थायराइड के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में -

हाइपोथायराइडिज्म के लक्षण

छोटे बच्चों में दिखने वाले लक्षण

  • विकास धीमी गति से होना।
  • शरीर में उर्जा की कमी
  • कब्ज की शिकायत होना।
  • रूखी स्किन होना।
  • स्कूल में सही प्रदर्शन न करना। 
  • देर से दांत आना।
  • काम में सुस्ती

बड़े बच्चों में दिखने वाला लक्षण

  • बालों का झड़ना।
  • वजन बढ़ना।
  • आवाज में कर्कश होना।
  • याददाश्त कमजोर होना।
  • अनियमित पीरियड्स होना।
  • अवसाद होना।
  • कब्ज की समस्या।

बच्चों में हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण

छोटे बच्चों में दिखने वाले लक्षण

  • चिड़चिड़ा होना।
  • धड़नों का बढ़ना।
  • वजन काफी ज्यादा कम होना।

बड़े बच्चों में दिखने वाला लक्षण

  • सांस लेने में परेशानी
  • थकान महसूस होना।
  • वजन घटना।
  • मासिक धर्म में अनियमितता।
  • बैचेनी और घबराहट।
  • गर्मी ज्यादा लगना।
  • दस्त बने रहना।
  • आंखों के आसपास सूजन।

बच्चों में थायराइड का इलाज

थायराइड का इलाज संभव है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चों को थायराइड किन कारणों से हुआ है। अलग-अलग कारणों से हुए थायराइड का इलाज अलग-अलग तरीकों से होता है। 

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज

हार्मोंस रिप्लेसमेंट थेरेपी - थरीर में हार्मोंस की कमी के कारण इस थेरेपी को अपनाई जाती है।

थायराइड की वजह से कुछ बच्चों में मानसिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। इस स्थिति में मनोचिकित्सक का सहारा लेना जरूरी होता है। 

इसके अलावा कुछ बच्चों को दवाई देकर थायराइड का इलाज किया जाता है। 

हाइपरथायरायडिज्म

अगर बच्चों के शरीर हार्मोंस की अधिकता है, तो उन्हें कुछ दवाइयां देकर हार्मोंस को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा कुछ परिस्थिति में डॉक्टर थायराइड सर्जरी कर सकते हैं। 

बच्चों में थायराइड की समस्या के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। हल्के-फुल्के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। इससे बच्चों की समस्या बढ़ सकती है। 

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