एडीएचडी सिंड्रोम का आयुर्वेद में है आसान इलाज, आजमाएं ये 4 औषधियां

एडीएचडी सिंड्रोम का शिकार आमतौर पर बच्चे होते हैं। लेकिन बड़ों में भी ये समस्या हो सकती है। इस बीमारी के होने पर आदमी का व्‍यवहार बदल जाता है और याद्दाश्‍त भी कमजोर हो जाती है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Nov 27, 2018
एडीएचडी सिंड्रोम का आयुर्वेद में है आसान इलाज, आजमाएं ये 4 औषधियां

एडीएचडी सिंड्रोम का शिकार आमतौर पर बच्चे होते हैं। लेकिन बड़ों में भी ये समस्या हो सकती है। इस बीमारी के होने पर आदमी का व्‍यवहार बदल जाता है और याद्दाश्‍त भी कमजोर हो जाती है। एडीएचडी का मतलब है डेफिसिट हायपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर। इस रोग का मुख्य लक्षण है किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का सही इस्तेमाल नहीं कर पाना। एक अनुमान के मुताबिक स्‍कूल के बच्‍चों को एडीएचडी  4% से  12% के बीच प्रभावित करता है। यह लड़कियों की तुलना में लड़कों को ज्यादा होता है। आयुर्वेद में एडीएचडी सिंड्रोम का आसान इलाज मौजूद है। आइए आपको बताते हैं कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां, जिन्हें एडीएचडी सिंड्रोम में फायदेमंद माना जाता है।

एडीएचडी रोग के लक्षण

  • बात को ध्यान से न सुनना, अधिक दिमागी काम को देर तक न कर पाना।
  • बैठने पर लगातार पैर हिलना या खुद हिलते रहना।
  • बिना रुके लगातार और जरूरत से अधिक बोलना।
  • खाना खाते समय या स्कूल में बिना हिले-डुले बैठने में समस्या होना।
  • प्रश्न से पहले उत्तर बोलना। दूसरों की बातचीत को बीच में रोकना।

एडीएचडी डिसॉर्डर में तीन लक्षण सबसे प्रमुख हैं- लापरवाही, अतिसक्रियता और आवेग। कुछ बच्चों में ये तीनों लक्षण होते हैं, तो कुछ बच्चों में अनमनापन व सावधानी की कमी होती है, पर वे अतिसक्रिय नहीं होते। कुछ अतिसक्रिय और आवेगी होते हैं, पर लापरवाह नहीं।

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शंखपुष्पी

शंखपुष्पी का प्रयोग पुराने समय से दिमागी समस्याओं के लिए किया जाता है। दिमागी कमजोरी, अनिद्रा, अपस्मार रोग, सुजाक, मानिकस रोग, भ्रम जैसी समस्‍याओं में इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह-शाम मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करने से इन सब रोगों से छुटकारा मिलता है।

ब्राह्मी

ब्राह्मी भारत के जंगलों में आसानी से उपलब्‍ध होने वाला पौधा है। इसकी पत्तियां और तना दोनों का उपयोग औषधियों के रूप में किया जाता है। इसके अलावा ब्राह्मी से बना काढ़ा मस्तिष्‍क की कार्यक्षमता बढ़ाने और सेहत सुधारने में मदद करता है। इस जड़ी-बूटी को एडीएचडी रोगियों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।

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खास हर्बल चाय

1998 में हुए एक अध्‍ययन में पाया गया कि एडीएचडी से पी‍ड़ित बच्‍चों को नींद आसानी से नहीं आती। ऐसे बच्‍चों के लिए हर्बल टी काफी फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद पुदीना, कैमोमाइल या लेमन ग्रास और अन्य ऐसी ही जड़ी-बूटियां अति सक्रिय मांसपेशियों को शांत करने में मदद करती हैं।

कच्चे ओट्स

ग्रीन ओट्स अपरिपक्व ओट्स है जो तंत्रिकाओं को शांत करने, अशांत मन और शरीर को राहत देने में मदद करता है। हाल ही में हुए अ‍ध्‍ययन के अनुसार, ग्रीन ओट्स ध्‍यान को अच्‍छी तरह बढ़ाने के साथ-साथ एकाग्रता को बढ़ाने में भी मदद करता है। इसलिए इसे एडीएचडी के रोगियों के लिए उपयोगी माना जाता है।

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