ऐसी स्किन पर सन टैनिंग का होता है सबसे ज्यादा असर, ये है बचाव का तरीका

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 29, 2017
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Quick Bites

  • त्वचा पर आसपास के वातावरण का गहरा असर पड़ता है।
  • सनबर्न और सन टैनिंग में थोड़ा अंतर होता है।
  • चेहरे की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है।

हमारे शरीर की त्वचा इतनी संवेदनशील होती है कि हमारे आसपास के वातावरण का इसपर गहरा असर पड़ता है। प्रदूषण, धूल, बारिश, सर्दी, गर्मी, हवा और धूल सब हमारी स्किन को प्रभावित करते हैं। अगर हम लगातार देखभाल न करें तो इनकी वजह से हमें कई तरह की स्किन प्रॉब्लम्स हो जाती हैं। इसी तरह की एक समस्या है सन टैनिंग, जिसमें त्वचा धूप से जल जाती है और इस पर लाल चकत्ते बन जाते हैं। सनबर्न और सन टैनिंग लगभग एक जैसे हैं लेकिन इनमें थोड़ा अंतर होता है। सन बर्न में त्वचा झुलसती है और काली हो जाती है। इसे मिटाना आसान है क्योंकि इसका प्रभाव स्किन के ऊपरी हिस्से में ही रहता है। लेकिन सन टैनिंग में झुलसने के बाद त्वचा पर चकत्ते बन जाते हैं और ये सूरज से निकलने वाली यूवीए किरणों के कारण होता है।

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सबसे ज्यादा असर चेहरे पर

सन टैनिंग से त्वचा को काफी नुक्सान होता है और त्वचा काली भी पड़ने लगती है। चेहरे की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है इसलिए सूर्य की हानिकारक किरणों का असर इसपर सबसे ज्यादा पड़ता है। इन हानिकारक किरणों के प्रभाव से चेहरे की त्वचा रूखी और बेजान लगने लगती है। ये स्किन की नमी को भी सोख लेता है इसलिए इसकी वजह से चेहरे पर झुर्रियों का असर दिखने लगता है और चेहरे पर बुढ़ापा नजर आने लगता है।

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सनस्क्रीन का प्रयोग जरूरी है

धूप में निकलने से पहले स्किन पर सनस्क्रीन का प्रयोग न करने से टैनिंग और सनबर्न का खतरा सबसे ज्यादा होता है। मौसम कोई भी हो, धूप हल्की हो या तेज, दोपहर के समय की धूप स्किन के लिहाज से खतरनाक होती है। इसलिए घर से निकलने से 15-20 मिनट पहले चेहरे, हाथ, पांव और गले में सनस्क्रीन लगाकर ही निकलें। इसके लगाने से सूर्य की हानिकारक किरणों का असर त्वचा पर कम होगा। अच्छा सनस्क्रीन न सिर्फ बाहरी धूप और धूल से आपको बचाता है बल्कि ये आपकी त्वचा को अंदर से नम रखता है और मॉश्चराइजर का काम भी करता है।

इस तरह की त्वचा पर होता है ज्यादा असर

टैनिंग का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर होता है जिनकी रंगत हल्की या ज्यादा सांवली है। असल में ऐसे लोगों के सूरज की किरणों के सम्पर्क में आने पर त्वचा का कालापन बढ़ जाता है, जो दूर से भी साफ नजर आने लगता है इसलिए इस तरह की रंगत वाले लोगों के लिए सन टैनिंग से बचाव जरूरी है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वो सनस्क्रीन तो लगाएं ही साथ ही त्वचा को जितना संभव हो ढक कर रखें। ऐसे लोगों को कम से कम एस पी एफ 15 वाला ऐसा सनस्क्रीन इस्तेमाल करना चाहिए, जिसमें एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन बी3 हो। ये सनस्क्रीन धूप की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाने के साथ-साथ चेहरे के दाग-धब्बे भी दूर करेगा।

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