सर्दी-जुकाम झेल चुके लोगों में होती है कोरोना वायरस से लड़ने की ज्यादा क्षमता : रिसर्च

इस शोध की मानें, तो अगर किसी को सर्दी जुकाम रहा हो, तो शरीर में पहले से मौजूद मेमोरी बी कोशिकाएं COVID-19 से लड़ने में मदद कर सकती हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Oct 01, 2020Updated at: Oct 01, 2020
सर्दी-जुकाम झेल चुके लोगों में होती है कोरोना वायरस से लड़ने की ज्यादा क्षमता : रिसर्च

सर्दी-जुकाम से परेशान रहने वाले लोगों के लिए हाल ही में आए स्टडी ने एक बड़ा ही रोचक खुलासा किया है। जी हां, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस स्टडी की मानें, तो जिन लोगों को पहले सर्दी-जुकाम रहा है उन लोगों में कोरोना वायरस से लड़ने की ज्यादा क्षमता है। जर्नल 'mBio'में प्रकाशित इस अध्ययन की मानें, तो जिन लोगों को लंबे समय तक फ्लू रहा है, उनमें  COVID-19 से लड़ने की ज्यादा इम्यूनिटी होती है। वो कैसे, तो आइए जानते हैं इस शोध के बारे में।

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क्या कहता है ये शोध ?

mBio'में प्रकाशित इस अध्ययन  से पता चला है कि COVID-19 का वायरस, SARS-CoV-2,बी कोशिकाओं को प्रेरित करता है, जो कि लंबे समय तक रहने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाएं को याद रहती है। उन्हें नष्ट करने और भविष्य के लिए उन्हें याद करने के लिए एंटीबॉडी बनाते हैं। यानी कि ये एंटीबॉडी  शरीर में एक बार जाने पर, मेमोरी में सेव हो जाएगा जिसके कारण बी कोशिकाएं संक्रमण को शुरू करने से पहले ही तेजी से कार्रवाई करना शुरू कर देंगी।

बता दें कि बी कोशिकाएं दशकों तक जीवित रह सकती हैं, वे लंबे समय के बाद भी  संक्रमणों से लड़ सकती है। मेमोरी बी कोशिकाओं के क्रॉस-रिएक्टिविटी की रिपोर्ट करने वाला पहला अध्ययन भी है, जिसका अर्थ है कि बी कोशिकाएं जो एक बार सर्दी होने पर काम कर चुकी हैं, वो कोरोनावायरस पर आसानी से हमला करती है और शरीर में  SARS-CoV-2 के घुसने से पहले इसे पहचान लेती है।

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शोधकर्ताओं की मानें, तो जब उन्होंने COVID -19 से उबरने वाले लोगों के खून के नमूनों को देखा, तो ऐसा लग रहा था कि उनमें से कई में मेमोरी बी कोशिकाएं पहले से ही थीं,  जो SARS-CoV-2 को पहचान सकता है और तेजी से एंटीबॉडी का उत्पादन कर सकता है और इस पर हमला कर सकता है। शोध का निष्कर्ष 26 लोगों के रक्त के नमूनों की तुलना पर आधारित हैं, जो हल्के से मध्यम कोविद -19 के शिकार हुए और उनमें पुराने सर्दी-जुकाम या फ्लू के कारण एंटीबॉडी बनी हुई थी। इन नमूनों से, अध्ययनकर्ताओं ने मेमोरी बी कोशिकाओं और एंटीबॉडी के स्तर को मापा, जो स्पाइक प्रोटीन के विशिष्ट भागों को लक्षित करते हैं और कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी पैदा करने में मदद करते हैं।

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स्पाइक प्रोटीन प्रत्येक कोरोनावायरस में थोड़ा अलग दिखता है और कार्य करता है, लेकिन इसके घटकों में से एक, S2 सबयूनिट, सभी वायरस में बहुत समान है। वहीं मेमोरी बी कोशिकाएं अलग-अलग कोरोनवायरस के स्पाइक एस 2 सबयूनिट्स के बीच अंतर नहीं बता सकती हैं, और अंधाधुंध हमला कर सकती हैं। अध्ययन में पाया गया कि बीटा कोरोनविरोसेस के लिए सही था, एक उपवर्ग जिसमें दो ठंड पैदा करने वाले वायरस और साथ ही SARS, MERS और SARS-CoV-2 शामिल हैं।

अब हमें यह देखने की जरूरत है कि क्या शरीर में पहले से मौजूद मेमोरी बी कोशिकाएं COVID-19 से किस हद तक लड़ सकती है। हालांकि अध्ययन के लेखकों का मानना है कि इसका मतलब यह हो सकता है कि जो कोई भी सामान्य फ्लू से संक्रमित हो गया है या जिसे ये पहले हुआ हो, उसमें एक हद तक कोरोना से लड़ने की क्षमता बन गई है। हालांकि इस रिसर्च को लेकर आगे और अध्ययन करने की जरूरत है।

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