5 साल से कम उम्र के बच्चों को होता है रोटावायरस संक्रमण, जानें लक्षण और इलाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 06, 2018
Quick Bites

  • रोटावायरस एक खतरनाक संक्रामक रोग है।
  • रोटावायरस का संक्रमण मल में मौजूद होता है।
  • ये वायरस शिशु के खिलौनों, बिस्तर और कपड़ों से भी फैलता है।

रोटावायरस बच्चों को होने वाली एक खतरनाक बीमारी है। ये एक ऐसा वायरस है जिसकी वजह से आंतों का इंफेक्शन यानी गैस्ट्रोएंटेराइटिस रोग हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 5 साल से कम उम्र का हर बच्चा कम से कम एक बार इस वायरस का शिकार जरूर होता है। 6 महीने से 2 साल तक के बच्चों को इस रोग का खतरा सबसे ज्यादा होता है। बच्चों में होने वाले इस रोग की अगर सही जानकारी हो, तो लक्षणों को पहचानकर इसका सही समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है और इससे होने वाले खतरों से बचा जा सकता है। आइए आपको बताते हैं रोटावायरस संक्रमण के बारे में।

क्या है रोटावायरस संक्रमण

रोटावायरस एक खतरनाक संक्रामक रोग है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। आमतौर पर रोटावायरस का संक्रमण मल में मौजूद होता है और हाथों से बार-बार मुंह को छूने या दूषित पानी को पीने से फैलता है। संक्रमण के दौरान ये वायरस बच्चों को खिलौनों, बिस्तर और कपड़ों से भी फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी ये वायरस फैल सकता है।

इसे भी पढ़ें:- आमतौर पर वयस्कों को होने वाली इन 6 बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है बच्चों में

रोटावायरस संक्रमण के लक्षण

रोटावायरस इंफेक्शन के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 18 से 36 घंटे बाद नजर आते हैं। इस बीमारी में आमतौर पर निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं।

  • बुखार
  • मितली और उल्टी
  • लगातार दस्त होना
  • डिहाइड्रेशन की समस्या होना
  • पेट में मरोड़ उठना
  • खांसी आना
  • नाक बहना

कितना खतरनाक है रोटावायरस

रोटावायरस एक खतरनाक बीमारी है क्योंकि बच्चों में इस बीमारी के कारण जल्दी-जल्दी दस्त होने लगते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाने के कारण शिशु को डिहाइड्रेशन हो जाता है। ऐसी स्थिति में आमतौर पर डॉक्टर ओ.आर.एस. का घोल देते हैं। डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए थोड़े बड़े बच्चों को नारियल पानी और दाल का पानी आदि भी दिया जा सकता है। कई बार ये बीमारी गंभीर हो जाती है, तो शिशु को हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ता है। समय पर इलाज न होने पर डिहाइड्रेशन जानलेवा भी हो सकता है।

रोटावायरस का इलाज

रोटावायरस से बचाव के लिए बच्चों को टीका लगाया जाता है। टीका लगवाने से ज्यादातर बच्चों में डायरिया और रोटावायरस का खतरा की बीमारी की आशंका बहुत कम हो जाती है। रोटावायरस के टीके देशभर के सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं और ये बच्चों को जन्म के बाद लगाए जाने वाले अनिवार्य टीकों में से एक है।

इसे भी पढ़ें:- ये खास ट्यूमर हो सकता है बच्चों में किडनी कैंसर का शुरुआती लक्षण

रोटावायरस में सावधानियां

बच्चों को या किसी वयस्क को रोटावायरस संक्रमण होने पर कुछ सावधानियां रखनी जरूरी हैं, अन्यथा इसका वायरस घर में मौजूद अन्य सदस्यों को भी प्रभावित कर सकता है।

  • शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है।
  • रोगी के कपड़ों या बिस्तर को छूने के बाद साबुन से हाथ धोएं।
  • खाना बनाने से पहले और खाना बनाने के बाद साबुन से हाथ धोएं।
  • खाना खाने से पहले और खाना खाने के बाद साबुन से हाथ धोएं।
  • शिशु को दूध पिलाने से पहले हाथ धोएं।
  • शिशु को संक्रमण होने पर उसकी नैपी बदलने के बाद भी साबुन से हाथ धोएं।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Child's Health in Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1776 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK