दिवाली पर पटाखों के केमिकल्स दे सकते हैं ये 10 खतरनाक रोग, हो सकता है गर्भपात

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 01, 2018
Quick Bites

  • पटाखे में मौजूद पोटैशियम क्लोरेट बन सकता है फेफड़ों के कैंसर का कारण।
  • कार्बन मोनो ऑक्साइड के कारण हो महिलाओं में हो सकता है गर्भपात।
  • बच्चों की लंबाई और सेहत पर भी पड़ता है पटाखों के गैस का असर।

दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है। हर तरफ जगमगाते दीप, झालरें, मिठाइयां और तरह-तरह के पकवान इस दिन को बेहद खास बनाते हैं। लेकिन इन्हीं सब के बीच देशभर में भारी मात्रा में पटाखों का इस्तेमाल बहुत सारे लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता है। पटाखे पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं, इससे निकलने वाली हानिकारक गैसें कई तरह के रोगों का भी कारण बनती हैं। इनमें मौजूद हानिकारक केमिकल्स के कारण कई रोगों का खतरा बढ़ जाता है। आइए आपको बताते हैं पटाखों में मौजूद कौन से तत्व होते हैं हानिकारक और क्या हैं इससे होने वाले रोग।

फेफड़ों का कैंसर

पटाखे में मौजूद पोटैशियम क्लोरेट तेज रोशनी पैदा करता है लेकिन इसके इस्तेमाल से हवा जहरीली हो जाती है। इस केमिकल से निकलने वाले धुंएं के कारण फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है। अगर कोई सांस का मरीज है या किसी को फेफड़ों से जुड़ी अन्य कोई बीमारी है, तो खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

सांस की बीमारियां

पटाखों में तेज धमाके और रोशनी के लिए गन पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके जलने पर सल्फर डाईऑक्साइड गैस बनती है। इस गैस के कारण पर्यावरण में प्रदूषण तेजी से बढ़ता है और सांस की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही ये गैस एसिड रेन (अम्लीय बारिश) का भी कारण बनती है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है। पर्यावरण में ज्यादा कार्बन डाइ आक्साइड के होने के कारण दमा रोगियों को भी परेशानी बढ़ सकती है। इन रोगियों को सांस में लेने में परेशानी होती है।

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अल्जाइमर जैसा खतरनाक रोग

पटाखे में सफेद रोशनी पैदा करने के लिए एल्युमिनियम का प्रयोग किया जाता है। ये तत्व त्वचा के लिए बहुत हानिकारक होता है। इसके इस्तेमाल से डर्मेटाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसके साथ ही इसके जलने से पैदा होने वाली गैस का बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और वो अल्जाइमर जैसे रोगों का शिकार हो सकते हैं।

गर्भपात का खतरा

दीवाली के मौके पर पटाखों से निकलने वाली हानिकारक कार्बन मोनोऑक्साइड गैस सांस के माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकती है। इससे बच्चे को सांस संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कई बार शिशु में विकार भी पैदा कर सकता है। गर्भवती महिलाओं में कई हानिकारक गैसें गर्भपात का भी कारण बन सकती हैं।

आंखों की समस्या

दीपावली में पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ जाता है। इससे टॉक्सिन भी अत्यधिक बढ़ जाते हैं। इन टॉक्सिनों की वजह से आंखों पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। आंखों में जलन और उससे पानी आने की समस्याओं में भी बढ़ोतरी होती है। इसलिए आंखों का खास ध्यान रखें। बाहर से आने के बाद अपनी आंखों को साफ पानी से अच्छी तरह छींटे मारकर धो लें।

हाई ब्लड प्रेशर

पटाखों में मौजूद मर्करी के कारण ऐसी गैसें निकलती हैं, जिससे सांस की बीमारियों और हाई ब्लड का खतरा बढ़ जाता है। अगर किसी को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो उनके लिए खतरे बढ़ सकते हैं।

शिशु के विकास में बाधा

गर्भवती महिलाओं के लिए दीवाली के पटाखों से निकलने वाली गैस कई मायनों में खतरनाक हो सकती हैं। महिला के सांस के जरिए अंदर जाने वाली ये गैसें पैदा होने वाले शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा बन सकती हैं।

दिल की बीमारियां

पटाखों से निकलने वाली हानिकारक गैसों के कारण दिल की बीमारियों की आशंका भी काफी बढ़ जाती है। जो लोग पहले से दिल के मरीज हैं, पटाखों की तेज आवाज के कारण उन्हें दिल का दौरा भी पड़ सकता है और हानिकारक गैसों के कारण सांस रुकने जैसी समस्या हो सकती है।

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बहरापन

कई लोग ऐसा सोचते हैं कि पटाखे जितनी तेज आवाज करेंगे, उन्हें उतना मजा आएगा। मगर आपको बता दें कि पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज कई बार लोगों को बहरा भी बना सकती है। पटाखों से निकलने वाली आवाज और रोशनी का कान के पर्दों और आंखों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

हार्मोनल डिस्ऑर्डर

पटाखों में नीली रोशनी पैदा करने के लिए तांबे का मिश्रण किया जाता है। इससे निकलने वाली गैसें कई तरह के कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं और हार्मोनल डिस्ऑर्डर का भी कारण बन सकती हैं। हार्मोनल डिस्ऑर्डर के कारण बच्चों की लंबाई और सेहत भी प्रभावित हो सकते हैं।

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