बच्चों को किस उम्र से भेजना चाहिए प्ले स्कूल? जानें कैसे करें बच्चे को इसके लिए पहले से तैयार

बच्चों को प्ले स्कूल भेजने से कई फायदे होते हैं। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। 

Dipti Kumari
Written by: Dipti KumariPublished at: Mar 21, 2022Updated at: Mar 21, 2022
बच्चों को किस उम्र से भेजना चाहिए प्ले स्कूल? जानें कैसे करें बच्चे को इसके लिए पहले से तैयार

जैसे-जैसे बच्चे बड़े हो रहे होते है पेरेंट्स को उन्हें प्ले स्कूल या प्री-स्कूल भेजने के बारे में सोचते है। वह उनके बेहतर भविष्य के लिए हर जरूरी निर्णय को लेकर काफी सजग रहते हैं ताकि उनके बच्चे का भविष्य अच्छा बनें और उन्हें स्कूल जाने में कोई परेशानी न हो। दरअसल ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों को प्ले स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि उनका बच्चा अन्य बच्चों के साथ घुलना-मिलना सीखें। बच्चों के भावनात्मक, सामाजिक, शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन्हें प्ले स्कूल में भेजना चाहिए। वह इससे चीजें आसानी से सीखते हैं। बच्चे को हम प्ले स्कूल में तब भेजते हैं, जब वह चलना, बात करना, दूसरों से संबंध बनाना और अन्य जरूरी बातें सीखते हैं। बच्चे के मस्तिष्क का 90 प्रतिशत विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। ऐसे में अन्य बच्चों के साथ उनका विकास तेजी से होता है। साथ ही वह सीखने को लेकर भी उत्सुक रहते हैं और आगे भी स्कूल जाने में उनका मन लगा रहता है और पढ़ाई में भी वह बेहतर कर पाते हैं। इसलिए आपको बच्चे को प्ले स्कूल भेजने के फायदे और इसके लिए क्या आपका बच्चा तैयार है या नहीं, इन बातों को भी समझ लेना चाहिए। 

बच्चों को प्ले स्कूल भेजने के फायदे (Playschool Benefits for Kids)

1. भाषा और शब्दाबली में सुधार

प्ले स्कूल जाने से बच्चों की भाषा और शब्दाबली में सुधार आता है और शब्दावली का विकास होता है क्योंकि बच्चे घर पर जितना सीख पाते हैं और उससे अधिक प्ले स्कूल में बोलना और शब्दों को पहचनना सीखते हैं। इसके अलावा अन्य बच्चों के साथ वह सामंजस्य और शेयरिंग की आदत का विकास भी कर पाते हैं। इससे वह धीरे-धीरे खुद को एक्सप्रेस करना सीखते हैं। 

2. सीखने की क्षमता का विकास

छोटे बच्चों में सीखने और किसी चीज के बारे में जानने की जिज्ञासा बहुत ज्यादा होती है। वह आमतौर पर आसपास की चीजों को छूने, खेलने और देखने के लिए उत्सुक रहते हैं। कई बार पेरेंट्स बच्चे को घर पर उस तरह से समय नहीं दे पाते हैं ताकि वह उनकी हर जिज्ञासा और एक्टिविटी पर ध्यान दें लेकिन प्ले स्कूल में उन्हें तरह-तरह के खेल और एक्टिविटी को करने और चीजों से खेलने का मौका मिलता है। इससे बच्चे की सीखने की क्षमता विकसित होती है और वह किसी चीज को करने से पीछे नहीं भागता है। 

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3. मोटर कौशल का विकास

बच्चा प्ले स्कूल में कई तरह की गतिविधियों में भाग लेता है, जिससे उनके मस्तिष्क, हाथ और आंख के समन्वय में सुधार होता है। क्रेयॉन से रंगने से लेकर खेलने और स्लाइड पर चढ़ने तक और सीढ़ी पर चढ़ना-उतरना बहुत सामान्य लगने वाली गतिविधियों की मदद से भी आपके बच्चों में मोटर कौशल का विकास होता है। प्ले स्कूल में बूच्चे मस्ती और अन्य बच्चों के साथ यह तेजी से सीखते हैं। 

4. दोस्त बनाने में मदद मिलती है

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसके लिए दोस्ती करना और लोगों से संपर्क बनाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में हमें बच्चों को छोटी उम्र से ही लोगों के साथ व्यवहार करना सीखाने की जरूरत है ताकि बड़े होकर उन्हें किसी तरह की व्यवहार संबंधित दिक्कतें न आएं। प्ले स्कूल में बच्चे कई अलग-अलग तरह के व्यवहार वाले बच्चों के साथ खेलते हैं और दोस्त बनाते हैं। इससे उनमें लोगों के साथ समन्वय बनाने की क्षमता का विकास होता है। 

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5. स्वतंत्र रहना सीखें

घर पर बच्चों को हम कई चीजों को छूनें से रोकते हैं और समय की कमी के कारण उन्हें कई तरह की एक्टिविटीज करने से रोकते हैं लेकिन प्ले स्कूल में वह अपने पसंद का खेल खेलने और गतिविधियों को चुनने के लिए स्वतंत्र रहते हैं। साथ ही वह खुद से खाना, हाथ साफ करना, अपनी चीजों को जगह पर रखना और गिरकर उठने की आदत सीखते हैं। 

बच्चे को प्ले स्कूल कब भेजना चाहिए

पेरेंट्स को अपने बच्चे को प्ले स्कूल तभी भेजना चाहिए, जब वह इसके लिए तैयार हो ताकि उन्हें वहां किसी तरह की कोई समस्या न हो और वह स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सकें। इसके लिए आप बच्चे को ढाई साल से साढ़े तीन साल की उम्र में ही प्ले स्कूल भेजें ताकि वह अपने काम खुद से कर सकें और साथ ही वह किसी से अपनी बात कह सकें। जैसे वह अपने टीचर को भूख लगने और बाथरूम जाने के बारे में बता सकें। बहुत छोटे बच्चे को प्ले स्कूल न भेजें। इससे उनके विकास पर असर पड़ सकता है। 

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क्या आपका बच्चा प्री-स्कूल जाने के लिए तैयार

1. रूटीन

इसके लिए आपको देखने की जरूरत है कि क्या आपका बच्चा इतना बड़ा है कि वह एक रूटीन को फॉलो कर सके। जैसे पढ़ाई, खेलने और लंच जैसी चीजों को लेकर उनका एक रूटीन होना चाहिए। अगर आपका बच्चे को एक रूटीन फॉलो करने में परेशानी आती है, तो प्ले स्कूल भेजने से पहले उन्हें घर पर ही एक रूटीन का पालन करना सीखाएं ताकि उनके लिए प्ले स्कूल की दिनचर्या को अपनाना आसान हो। 

2. संचार कौशल 

प्ले स्कूल भेजने से पहले आपको यह बात सुनिश्चित करनी चाहिए कि आपका बच्चा अपनी बातों को समझा पाता है या नहीं क्योंकि वहां आप उनकी बातों को समझने के लिए नहीं होगें। ऐसे में भूख लगने पर या बाथरूम के लिए उन्हें स्वयं ही कहना होगा, तो क्या वह किसी से आपकी अनुपस्थिति में सहजता से बात कर पाते हैं। 

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3. क्या पेरेंट्स से दूर रह पाता 

कई बच्चे पेरेंट्स को न देखने पर रोने लगते हैं और फिर उन्हें शांत करना बेहद मुश्किल हो जाता है। अगर आपके बच्चे के साथ भी ये चीजें हैं, तो आपको ये समझना चाहिए कि आपका बच्चा अभी प्ले स्कूल के लिए तैयार हैं और वह अकेले में रहने के लिए तैयार नहीं है इसलिए उन्हें धीरे-धीरे खुद से अलग खेलने और समय बिताने की आदत डलवाएं। 

4. अपना काम स्वयं कर सकते हैं

कई बार प्ले स्कूल में भी बच्चे को अपना काम करने में परेशानी होती है और वह स्वतंत्र रूप से खेलने और कूदने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे में वह अपना मन प्ले स्कूल में अन्य बच्चों के साथ नहीं लगा पाते हैं और रोने लगते हैं। इसलिए आपको बच्चों को प्ले स्कूल भेजने से पहले बाथरूम करना, टॉयलेट जाना और कपड़े पहनना सीखना चाहिए। साथ ही उन्हें घर पर खुद से खेलने के लिए छोड़ दें ताकि वह स्वतंत्र रूप से अपनी मनपसंद खेल या चीजों का चुनाव कर सकें।

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