रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (आरएलएस) तंत्रिका तंत्र के हिस्से का एक विकार है जिसके कारण पैरों को हिलाने की तीव्र इच्‍छा होती है, यह आमतौर पर नींद में हस्तक्षेप करता है, इसलिए इसे स्‍लीप डिसऑर्डर भी माना जाता है। रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम (आरएलएस) के लक्षण आमतौर पर तब होते हैं जब व्यक्ति बैठा, आराम कर रहा होता है, या सो रहा होता है, और अक्सर रात में होता है।

"/>

सोते समय पैरों में ऐंठन और दर्द रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम के हैं लक्षण, जानें क्‍या है ये बीमारी और बचाव

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (आरएलएस) तंत्रिका तंत्र के हिस्से का एक विकार है जिसके कारण पैरों को हिलाने की तीव्र इच्‍छा होती है, यह आमतौर पर नींद में हस्तक्षेप करता है, इसलिए इसे स्‍लीप डिसऑर्डर भी माना जाता

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jan 11, 2019Updated at: Jan 11, 2019
सोते समय पैरों में ऐंठन और दर्द रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम के हैं लक्षण, जानें क्‍या है ये बीमारी और बचाव

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (आरएलएस) तंत्रिका तंत्र के हिस्से का एक विकार है जिसके कारण पैरों को हिलाने की तीव्र इच्‍छा होती है, यह आमतौर पर नींद में हस्तक्षेप करता है, इसलिए इसे स्‍लीप डिसऑर्डर भी माना जाता है। रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम (आरएलएस) के लक्षण आमतौर पर तब होते हैं जब व्यक्ति बैठा, आराम कर रहा होता है, या सो रहा होता है, और अक्सर रात में होता है।

आरएलएस के कारण होने वाले मूवमेंट को पीरियॉडिक लिंब मूवमेंट (PLMS) कहा जाता है। यह मूवमेंट नींद की गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। कुछ लोगों के प्राइमरी पीरियॉडिक लिंब मूवमेंट की समस्‍या होती है जबकि कुछ में इसका लेवल सेकेंड्री होता है, जो आम तौर पर तंत्रिका समस्याओं, गर्भावस्था, आयरन की कमी किडनी की विफलता से जुड़ा होता है, हालांकि इसका कोई ज्ञात कारण नहीं है। 

 

रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम के लक्षण

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम से पीड़ित लोगों के पैरों में असुविधाजनक संवेदना होती है (और कभी-कभी हाथ या शरीर के अन्य हिस्से) और संवेदनाओं को दूर करने के लिए अपने पैरों को हिलाने की इच्‍छा होती है। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं जब आपके पैरों में खुजली, सुइयों की चुभन या ऐसा लगता है जैसे पैरों के अंदर कोई जीव रेंग रहा है। संवेदनाएं आमतौर पर आराम से बदतर होती हैं, खासकर जब व्‍यक्तिा लेटा या बैठा होता है। यह कई बार असहनीय हो जाते हैं। आमतौर पर इसके लक्षण शाम या रात को दिखाई देते हैं। यह रात में सोते समय नींद में खलल डालते हैं। कई बार दर्द इतना असहनीय होता है कि लोग सोते-सोते उठकर बैठ जाते हैं। दर्द से पैरों को पटकने लगते हैं। ये दर्द अक्‍सर घुटनों से पैरों तक के बीच में होता है। 

किन्‍हें हो सकता है रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम 

यह रोग महिला और पुरुष दोनों को हो सकता है। महिलाओं में यह रोग ज्‍यादा देखने को मिलते हैं जबकि युवा पुरुषों में भी इस प्रकार की समस्‍या देखने को मिलती है। मध्‍यम आयु के लोगो में ये रोग बहुत ही सामान्‍य है। 

इसे भी पढ़ें: मोबाइल फोन साथ लेकर सोना आपको बना सकता है नपुंसक, जानें क्‍यों

रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम के कारण 

ज्यादातर मामलों में, डॉक्टर रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम के कारणों के बारे में नहीं जानते हैं; हालाँकि, उन्हें संदेह है कि जीन इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस रोग के विकास के अन्य कारक भी हैं। आयरन की कमी, पार्किंसंस रोग, गुर्दे की विफलता, मधुमेह और परिधीय न्यूरोपैथी सहित कुछ पुरानी बीमारियों और चिकित्सा स्थितियों में अक्सर आरएलएस के लक्षण में शामिल होते हैं। इन स्थितियों का इलाज अक्सर आरएलएस के लक्षणों से कुछ राहत देता है।

इसे भी पढ़ें:  मांसपेशियों और हड्डियों में असहनीय दर्द का कारण है फाइब्रोमायल्जिया रोग, प्राकृतिक तरीकों से करें इलाज

रेस्‍टलेस लेग सिंड्रोम बचाव

इस प्रकार के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्‍टर की सलाह लें। जिनमें ये समस्‍या अत्‍यधिक नहीं है उन्‍हें जीवनशैली में बदलाव करने की जरूरत है, जैसे कि एक नियमित व्यायाम की शुरुआत करना, नियमित नींद पैटर्न सही रखना, कैफीन, शराब और तंबाकू के उपयोग को कम करना इसमें मददगार साबित हो सकता है। आरएलएस से जुड़ी स्थिति के कुछ अन्‍य उपचार भी हैं:

  • पैर की मालिश
  • गर्म स्नान या हीटिंग पैड या बर्फ पैक पैरों के लिए फायदेमंद हैं। 
  • अच्छी नींद की आदतें
  • वाइब्रेटिंग पैड, जिसे रिलैक्सिस कहा जाता है
  • आयरन और जिंक युक्‍त फल और सब्जियों का सेवन आदि। 

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Other Diseases In Hindi

Disclaimer