एक्‍सपर्ट टिप्‍स: सेहत का आधार है लीवर, ऐसे रखें ख्‍याल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 14, 2017
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Quick Bites

  • लिवर हमारे शरीर के लिए 500 से भी ज्य़ादा कार्य करता है
  • इसी वजह से इसे बॉडी का सेंट्रल कंट्रोलर कहा जाता है
  • मामूली सी गड़बड़ी की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं

 

लिवर हमारे शरीर के लिए 500 से भी ज्य़ादा कार्य करता है। इसी वजह से इसे बॉडी का सेंट्रल कंट्रोलर कहा जाता है। इसमें होने वाली मामूली सी गड़बड़ी की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। अगर आप अपने शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रखना चाहते हैं तो उसके इस महत्वपूर्ण अंग का विशेष रूप से खयाल रखें।
 
दिल और किडनी की बीमारियों के अलावा भारत में लोगों को लिवर से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं सबसे ज्य़ादा परेशान कर रही हैं क्योंकि हमारे खानपान की आदतों और जीवनशैली से इसका गहरा संबंध है। इससे जुड़ी डिज़ीज़ के बारे में जानने से पहले यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हमारे शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग काम कैसे करता है?

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बॉडी का सेंट्रल कंट्रोलर

लिवर की कार्य प्रणाली को इस ढंग से समझा जा सकता है कि हम जो कुछ भी खाते हैं, वह पहले आंतों में जाता है। वहां मौज़ूद एंजाइम्स भोजन को बारीक कणों में परिवर्तित कर देते हैं। इसके बाद आंतों से आधा पचा हुआ भोजन लिवर में जाकर स्टोर होता है। हमारे शरीर में लिवर का स्थान उस केमिकल फैक्ट्री की तरह होता है, जो अधपचे भोजन के बारीक कणों से पोषक तत्वों को छांट कर अलग करता है। फिर रक्त प्रवाह के साथ इन सभी ज़रूरी विटमिंस और माइक्रो न्यूट्रीएंट्स को लिवर हमारे उन अंगों तक पहुंचाता है, जहां उनकी ज़रूरत होती है। इसके अलावा यह सभी विषैले तत्वों को पहचान कर उन्हें अलग करता है।

जो पानी में घुलनशील होते हैं, उन्हें यह किडनी में भेज देता है और वहां से वे यूरिन के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। जो अवशेष पानी में घुलने के योग्य नहीं होता, वह लिवर से मलाशय में चला जाता है और स्टूल के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है। यह कार्बोहाइड्रेट को ग्लाइकोजेन में परिवर्तित करके सुरक्षित रखता है। जब भी आकस्मिक रूप से शरीर को ज़रूरत होती है लिवर इसे तुरंत ग्लूकोज़ में परिवर्तित करके  रक्त में प्रवाहित कर देता है। उपवास के दौरान इसी सुरक्षित ग्लूकोज़ से हमारे शरीर को एनर्जी मिलती है। यह कई तरह के प्रोटीन और एंजाइम और हॉर्मोंस बनाने का भी काम करता है।

प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं

आमतौर पर लिवर से संबंधित तीन समस्याएं सबसे ज्य़ादा देखने को मिलती हैं-फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस। फैटी लिवर की समस्या में वसा की बूंदें लिवर में जमा होकर उसकी कार्यप्रणाली में बाधा पहुंचाती हैं। यह समस्या घी-तेल, एल्कोहॉल और रेड मीट के अधिक सेवन से हो सकती है। हेपेटाइटिस होने पर लिवर में सूजन आ जाती है। इसके लिए खानपान से होने वाले संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध या ब्लड ट्रांस्फ्यूज़न को जि़म्मेदार माना जाता है। अगर सही समय पर उपचार न किया जाए तो यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। इससे बचाव के लिए हेपेटाइटिस का वैक्सीन ज़रूर लगवाएं।

इसके अलावा सिरोसिस लिवर संबंधी समस्याओं की सबसे गंभीर और अंतिम अवस्था मानी जाती है। इसमें लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और उनका दोबारा निर्माण संभव नहीं हो पाता। एल्कोहॉल, वसायुक्त चीज़ों और नॉनवेज का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से यह समस्या हो सकती है। शुरुआती दौर में लिवर सिरोसिस को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन अंतिम अवस्था में ट्रांस्प्लांट ही एकमात्र उपचार होता है। इसलिए बेहतर यही होगा कि हम अपने शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग का पूरा ख्याल रखें।

सोर्स: सखी
लेखिका: विनीता                                 
इनपुट्स : डॉ. राखी माइवाल, सीनियर कंसल्टेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज़, दिल्ली

 

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