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Ramadan 2026: क्या हार्ट और बीपी के मरीज रोजा कर सकते हैं? एक्सपर्ट से जानें ये सुरक्षित है या नहीं

रमजान का पाक महीने की शुरुआत होने वाली है। इस महीने में लोग इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं, लेकिन क्या हार्ट और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए रोजा रखना जरूरी है? आइए लेख में जानें -

Is Roza Good For Heart Disease In Hindi: रमजान के पाक महीने की शुरुआत 17 फरवरी की शाम को चांद दिखने के बाद शुरु होने की उम्मीद है। यह महीना मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास है, इस दौरान लोग एक महीने तक रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को खास ख्याल रखने की जरूरत होती है, खासकर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इन लोगों को थोड़े-थोड़े समय में कुछ खाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में इन लोगों के लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना सही नहीं माना जाता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या ब्लड प्रेशर और हार्ट से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए रोजा रखना सही है या नहीं? ऐसे में आइए जयपुर में स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन (Archana Jain, Dietitian and Nutritionist, Director, Angelcare-A Nutrition and Wellness Center, Jaipur) और जयपुर के सीके बिरला हॉस्पिटल्स के हृदय रोग विशेषज्ञ और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट के डॉ. अंशुल पटोदिया (Dr. Ansul Patodia, Cardiologist and Electrophysiologist at CK Birla Hospitals, Jaipur) से जानें हार्ट और बीपी के मरीजों के लिए रोजा सुरक्षित है या नहीं?

ब्लड प्रेशर और हार्ट के मरीजों के लिए रोजा रखना सही है या नहीं?

डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, हार्ट या ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित लोग इसके नियंत्रित रहने की स्थिति में रोजा रख सकते हैं, लेकिन ये उनकी स्वास्थ स्थिति पर भी निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति को हार्ट की बीमारी से पीड़ित हो और दवा ले रहें हैं, तो ये लोग रोजा बिल्कुल न रखें। इन लोगों को डाइटिशियन या कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह के अनुसार ही अपने खानपान का खास ध्यान रखना चाहिए।

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डॉ. अंशुल पटोदिया के अनुसार, "हार्ट और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के मरीजों के लिए फास्टिंग पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं, यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। जिन मरीजों का बीपी और हृदय रोग नियंत्रित है और अगर वे नियमित दवाइयां ले रहे हैं, तो वह व्यक्ति डॉक्टर की सलाह से सीमित और संतुलित तरीके से रोजा रख सकते हैं। लेकिन जिन लोगों को हाल ही में हार्ट अटैक हुआ हो, एंजाइना की समस्या हो, हार्ट फेल्योर हो या ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता हो, उन्हें बिना डॉक्टरी सलाह के फास्टिंग नहीं करनी चाहिए।"

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डॉ. अंशुल पटोदिया आगे कहते हैं कि, "फास्टिंग यानी रोजा रखने के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे ब्लड प्रेशर के स्तर में उतार-चढ़ाव होने, चक्कर आने या कमजोरी महसूस हो सकती है। कुछ दवाइयों को खाली पेट लेने से परेशानी हो सकती हैं या उनके समय में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए दवाओं की टाइमिंग और डोज डॉक्टर की सलाह के समय तय करना जरूरी है।"

क्या कहती है रिसर्च?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, स्थिर हार्ट के रोगियों के लिए रमजान का रोजा सुरक्षित है और इससे बीएमआई (BMI), लिपिड प्रोफाइल व ब्लड प्रेशर में सुधार हो सकता है। हालांकि, हाल ही में आए हार्ट अटैक या गंभीर हार्ट फेलियर वाले अधिक जोखिम वाले मरीजों को उपवास से बचना चाहिए। दवाओं और लाइफस्टाइल में सही बदलाव जरूरी है।

रमजान में हार्ट और बीपी के मरीज रखें ध्यान

ब्लड प्रेशर और हार्ट की समस्या से पीड़ित व्यक्ति अगर डॉक्टरी सलाह के साथ रोजा रखता है, तो वे सहरी और इफतार के समय कुछ बातों का खास ध्यान रखें।

  • शरीर को हाइड्रेट करने की कोशिश करें।
  • ब्लड प्रेशर या हार्ट के लक्षण महसूस होने पर इनको नजरअंदाज न करें।
  • रमजान में अधिक तला-भूना, प्रोसेस्ड फूड या नमक का सेवन सीमित मात्रा में करें।

डॉ. अंशुल पटोदिया बताते हैं कि, "अगर मरीज रोजा रखना चाहते हैं, तो पर्याप्त हाइड्रेशन, हल्का और संतुलित आहार लें, नमक का सेवन सीमित करें और अचानक भारी भोजन से बचाव बेहद जरूरी है। किसी भी तरह का सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत कुछ खाना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही मार्गदर्शन के साथ फास्टिंग संभव है, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।"

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सावधानियां

ब्लड प्रेशर के अधिक बढ़ने या कम होने जैसी अनियंत्रिण की स्थिति रहने या हार्ट अटैक, ऑपरेशन या हार्ट से जुड़ी गंभीर स्थिति होना और दवाइयों का सेवन करने वाले व्यक्ति को रोजा रखने से बचना चाहिए। इन लोगों को शरीर को हाइड्रेट रखने, नमक और तले-भूने फूड्स का सेवन सीमित करने की सलाह भी दी जाती है।

निष्कर्ष

ब्लड प्रेशर और हार्ट की समस्या से पीड़ित लोगों को रोजा नहीं रखना चाहिए, खासकर दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों को। ध्यान रहे, रोजा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसके अलावा, हार्ट और ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित लोगों को अपने खानपान और शरीर की हाइड्रेशन पर खास ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, इन लोगों को रमजान के दौरान अधिक नमक युक्त और तला-भूना खाना खाने से बचना चाहिए। ध्यान रहे, इन लोगों को हार्ट और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करानी चाहिए और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • बीपी बढ़ने पर क्या महसूस होता है?

    शरीर में ब्लड प्रेशर का स्तर अधिक बढ़ने पर लोगों को सिर में दर्द होने, धुंधलापन होने, चक्कर आने, थकान होने, नाक से खून आने, सांस लेने में परेशानी होने, सीने में दर्द होने, बेचैनी होने, घबराहट होने, भारीपन महसूस होने, शरीर के अंगों में सुन्नपन होने और दिल की धड़कन के अनियमित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • बीपी कम करने के लिए क्या खाएं?

    ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए डाइट में पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्वों से युक्त साबुत अनाज, हरी सब्जियों, केला, संतरा, अनार, तरबूज, दही, लहसुन, बादाम और अखरोट जैसी फूड्स को डाइट में शामिल करें। इनका सेवन करने से शरीर में ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। 
  • रोजा रखने से क्या फायदा होता है?

    रोजा या उपवास करने से शरीर को नेचुरल रूप से डिटॉक्स करने, वजन कम करने, पाचन में सुधार करने, ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित रखने, हार्ट को हेल्दी रखने, शरीर के सेल्स को रिपेयर करने, स्ट्रेस को कम करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करने में मदद मिलती है। 

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Priyanka Sharma
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